मार्च 8, 2026

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा सचिव ने ओडिशा के मुख्य सचिव के साथ राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन और प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना की प्रगति पर चर्चा के लिए बैठक की

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा (एमएनआरई) सचिव श्री संतोष कुमार सारंगी ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (एनजीएचएम) और केंद्र सरकार के दो प्रमुख कार्यक्रमों पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (पीएमएसजी: एमबीवाई) पर विचार विमर्श के लिए ओडिशा के मुख्य सचिव श्री मनोज आहूजा और राज्य के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की।

बैठक के दौरान ओडिशा के मुख्य सचिव ने इस बात पर बल दिया कि ओडिशा भारत के हरित हाइड्रोजन परिवर्तन का नेतृत्व करने के लिए मज़बूत स्थिति में है। जल उपलब्धता, बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण और सक्षम अवसंरचना ढाँचे के विकास जैसी प्रमुख चुनौतियों को स्वीकार करते हुए, उन्होंने कहा कि राज्य की रणनीतिक तटीय स्थिति, मज़बूत औद्योगिक पारिस्थितिकी प्रणाली और सक्रिय नीतिगत ढाँचा, ओडिशा को हरित हाइड्रोजन डेरिवेटिव के वैश्विक निर्यातक के रूप में उभरने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करता है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा सचिव श्री संतोष कुमार सारंगी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि ओडिशा भारत के हरित हाइड्रोजन उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए विशिष्ट स्थिति में है और राज्य में विशेष रूप से पारादीप और गोपालपुर जैसे प्रमुख बंदरगाहों के पास, हरित अमोनिया/हरित मेथनॉल जैसे हरित हाइड्रोजन डेरिवेटिव के उत्पादन के लिए घरेलू निवेशकों की बड़ी रुचि है।

ओडिशा सरकार, प्रमुख केंद्रीय मंत्रालयों और अग्रणी ग्रीन हाइड्रोजन विकासकर्ता के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में सम्मिलित हुए, तथा उन्होंने बड़े पैमाने पर ग्रीन हाइड्रोजन/ग्रीन अमोनिया परियोजनाओं, विशेष रूप से गोपालपुर में एसईजेड के विकास में आने वाली महत्वपूर्ण चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया।

इन प्रयासों का उद्देश्य भारत के तेजी से बढ़ते ग्रीन हाइड्रोजन पारिस्थितिकी प्रणाली में भविष्य की व्यापक योजना तैयार करना है।

ओडिशा सरकार ने समयबद्ध तरीके से ग्रीन हाइड्रोजन डेरिवेटिव के उत्पादन और निर्यात के लिए एक सहयोगी पारिस्थितिकी प्रणाली और पसंदीदा निवेश गंतव्य के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (पीएमएसजी: एमबीवाई) केंद्र सरकार की प्रमुख पहलों में से एक है जिसका उद्देश्य देश भर में छतों में सौर ऊर्जा प्रणाली अपनाने को प्रोत्साहन देना है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने मुख्य सचिव के साथ राज्य के प्रदर्शन की समीक्षा की। समीक्षा के बाद, जिला कलेक्टरों को राज्य भर में छतों में सौर ऊर्जा प्रणाली लगाने की गति बढ़ाने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने नियमित एसएलबीसी बैठकें आयोजित करने, विक्रेताओं और बैंकरों के साथ संवाद करने और कार्यान्वयन को सुगम बनाने के लिए शीघ्र ऋण स्वीकृति और वितरण सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने यूटिलिटी-लेड एग्रीगेशन (यूएलए) मॉडल को लागू करने की भी सलाह दी, जिसमें 1 किलोवाट से कम क्षमता वाली प्रणाली स्थापित करने वाले निम्न-आय वाले परिवारों पर केंद्रित दृष्टिकोण अपनाया जाए।

मंत्रालय ने पीएम कुसुम के अंतर्गत कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा उपकरणों के प्रयोग को प्रोत्साहन देने के लिए अन्य राज्यों द्वारा अपनाई गई सर्वोत्तम कार्यप्रणाली की जानकारी दी। इन पर ध्यान देते हुए, मुख्य सचिव ने राज्य नोडल एजेंसी को निर्देश दिया कि वह राज्य में फीडर स्तर पर सौर ऊर्जा उपकरणों के प्रयोग को लागू करे ताकि कृषक समुदाय को स्वच्छ ऊर्जा का लाभ मिल सके।

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