मार्च 7, 2026

भारतीय नौसेना के प्रथम प्रशिक्षण स्‍क्‍वाड्रन (1टीएस) की दक्षिण पूर्व एशिया में लंबी दूरी प्रशिक्षण तैनाती

भारतीय नौसेना के प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1टीएस) के जहाज – आईएनएस तिर, शार्दुल, सुजाता और आईसीजीएस सारथी – 110वें एकीकृत अधिकारी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम (आईओटीसी) के हिस्से के रूप में दक्षिण पूर्व एशिया में लंबी दूरी प्रशिक्षण तैनाती (एलआरटीडी) पर रवाना होंगे।

इस तैनाती के दौरान प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन सिंगापुर, इंडोनेशिया और थाईलैंड के बंदरगाहों पर रुकेगी । इस तैनाती का उद्देश्य अधिकारी प्रशिक्षुओं को व्यापक परिचालन और अंतर-सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करना है, साथ ही भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद महासागर क्षेत्र के दृष्टिकोण के अनुरूप दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ भारत की निरंतर समुद्री भागीदारी को सुदृढ़ करना है।

इस दौरान, मेजबान नौसेनाओं और समुद्री एजेंसियों के साथ व्यापक स्तर पर पेशेवर संवाद, प्रशिक्षण कार्यक्रम और सहयोगात्मक गतिविधियों की योजना बनाई गई है। इनमें संरचित प्रशिक्षण आदान-प्रदान, क्रॉस-डेक दौरे, विभिन्न विषय विशेषज्ञों के साथ बातचीत और संयुक्त समुद्री साझेदारी अभ्यास शामिल हैं।

इन पहलों का उद्देश्य अंतर्संचालनीयता, पारस्परिक विश्वास और समझ को और अधिक बढ़ाना है, साथ ही सर्वोत्तम समुद्री प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।

110वें एकीकृत अधिकारी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में छह अंतरराष्ट्रीय अधिकारी प्रशिक्षु शामिल हैं, जो मित्र विदेशी राष्ट्रों के कर्मियों की क्षमता निर्माण और व्यावसायिक प्रशिक्षण के प्रति भारतीय नौसेना की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इसके अतिरिक्त, भारतीय सेना और वायु सेना के कर्मी भी तैनाती के लिए रवाना हुए हैं, जिससे दोनों सेवाओं के बीच संयुक्तता और सामंजस्य और मजबूत हुआ है।

यह दीर्घकालीन प्रशिक्षण तैनाती भारतीय नौसेना के प्रशिक्षण उत्कृष्टता पर जोर को रेखांकित करती है, साथ ही क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए समुद्री कूटनीति, सद्भावना और सहयोगात्मक दृष्टिकोण में योगदान देती है।

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