मार्च 10, 2026

भारत में प्लास्टिक पार्क; पॉलिमर-आधारित औद्योगिक इकोसिस्‍टम के विकास को गति प्रदान करना

परिचय

रसायन और पेट्रो-रसायन विभाग, पेट्रोकेमिकल्स की नई योजना के मुख्य भाग के अंतर्गत प्लास्टिक पार्कों की स्थापना के लिए योजना को कार्यान्वित कर रहा है। जिससे आवश्यकता-आधारित प्लास्टिक पार्कों की स्थापना में सहायता की जा सके, अपेक्षित अत्याधुनिक अवसंरचना हो, क्लस्टर विकास दृष्टिकोण के माध्यम से सामान्य सुविधाएं सक्षम हों, जिससे घरेलू डाउनस्ट्रीम प्लास्टिक प्रसंस्करण उद्योग की क्षमताओं को समेकित किया जा सके। इसका उद्देश्य डाउनस्ट्रीम प्लास्टिक प्रसंस्करण उद्योग की क्षमताओं को समेकित और समन्वित करना है ताकि इस क्षेत्र में निवेश, उत्पादन और निर्यात बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार सृजन में सहायता मिल सके। इस योजना के अंतर्गत सरकार प्रति परियोजना 40 करोड़ रुपये की सीमा के अंतर्गत परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान निधि प्रदान करती है।

प्लास्टिक पार्क एक औद्योगिक क्षेत्र है जिसे विशेष रूप से प्लास्टिक से संबंधित व्यवसायों और उद्योगों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका उद्देश्य प्लास्टिक प्रसंस्करण उद्योग की क्षमताओं को समेकित और समन्वित करना, निवेश, उत्पादन और निर्यात को प्रोत्साहन देना और साथ ही रोजगार सृजित करना है। ये पार्क अपशिष्ट प्रबंधन और पुनर्चक्रण पहलों के माध्यम से पर्यावरणीय रूप से दीर्घकालीन विकास पर भी ध्यान केंद्रित करते हैं।

प्लास्टिक पार्क प्लास्टिक अपशिष्ट के प्रबंधन, रीसाइक्लिंग और रासायनिक उद्योग को प्रोत्साहन देने की भारत की रणनीति का एक अभिन्न भाग बनकर उभरे हैं। अब तक विभिन्न राज्यों में 10 प्लास्टिक पार्कों को अनुमति दी गई है। पिछले पांच वर्षों के दौरान इन प्लास्टिक पार्कों को जारी की गई धनराशि का विवरण इस प्रकार है:

प्लास्टिक पार्क स्थानस्वीकृति वर्षकुल परियोजना लागत(करोड़ रुपये)स्वीकृत अनुदान सहायता(करोड़ रुपये)जारी की गई राशि(करोड़ रुपये)
तामोट, मध्य प्रदेश2013108.0040.0036.00
जगतसिंहपुर, ओडिशा2013106.7840.0036.00
तिनसुकिया, असम201493.6540.0035.73
बिलौआ, मध्य प्रदेश201868.7234.3630.92
देवघर, झारखंड201867.3333.6730.30
तिरुवल्लूर, तमिलनाडु2019216.9240.0022.00
सितारगंज, उत्तराखंड202067.7333.9330.51
रायपुर, छत्तीसगढ़202142.0921.0411.57
गंजीमट्ट, कर्नाटक202262.7731.386.28
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश202269.5834.7919.13

पृष्ठभूमि एवं उद्देश्य

विश्व बैंक के वर्ष 2022 के अनुमान के अनुसार, प्लास्टिक के वैश्विक निर्यात में भारत 12वें स्थान पर है।  वर्ष 2014 में मात्र 8.2 मिलियन हज़ार अमरीकी डॉलर के सापेक्ष इसमें तेज़ी से वृद्धि हुई है, और वर्ष 2022 के अनुमान के अनुसार यह 27 मिलियन हज़ार अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया है । यह वृद्धि प्लास्टिक के उत्पादन और निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार द्वारा प्लास्टिक पार्क स्थापित करने जैसे निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

भारतीय प्लास्टिक उद्योग बड़ा था, लेकिन बहुत अधिक विखंडित था, जिसमें छोटी, लघु और मध्यम इकाइयों का प्रभुत्व था और लाभ उठाने की क्षमता का अभाव था। रसायन और पेट्रोकेमिकल्स विभाग ने क्लस्टर विकास के माध्यम से क्षमताओं को समन्वित और समेकित करने तथा भारत की प्लास्टिक उत्पादन और निर्यात क्षमताओं को प्रोत्साहन के उद्देश्य से इस योजना को तैयार किया। इस योजना के निम्नलिखित उद्देश्य हैं :

  1. आधुनिक, अनुसंधान और विकास आधारित मापकों के अनुकूलन के माध्यम से घरेलू डाउनस्ट्रीम प्लास्टिक प्रसंस्करण उद्योग में प्रतिस्पर्धात्मकता, पॉलीमर अवशोषण क्षमता और मूल्य संवर्धन में वृद्धि करना।
  2. क्षमता और उत्पादन में वृद्धि, गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे का निर्माण और अन्य सुविधाओं के माध्यम से इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाना ताकि मूल्य संवर्धन और निर्यात में वृद्धि सुनिश्चित हो सके।
  3. अपशिष्ट प्रबंधन, पुनर्चक्रण आदि के नवीन तरीकों के माध्यम से पर्यावरणीय रूप से दीर्घकालीन विकास प्राप्त करना।
  4. संसाधनों के अनुकूलन और पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं के कारण होने वाले लाभों के कारण उपरोक्त उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए क्लस्टर विकास दृष्टिकोण अपनाना ।

प्लास्टिक पार्क स्थापित करने की प्रक्रिया

प्लास्टिक पार्कों की स्थापना के उद्देश्य से रसायन और पेट्रो-रसायन विभाग राज्य सरकारों से प्रारंभिक प्रस्ताव आमंत्रित करता है, जिसमें प्रस्तावित स्थान, वित्तीय विवरण, व्यापक लागत अनुमान आदि पर जानकारी एकत्र की जाती है। योजना संचालन समिति से सैद्धांतिक अनुमोदन के बाद राज्य कार्यान्वयन एजेंसी को विभाग को एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) प्रस्तुत करना आवश्यक है, जिसका मूल्यांकन किया जाता है और प्रस्तावित परियोजना की व्यवहार्यता के आधार पर योजना संचालन समिति द्वारा अंतिम अनुमोदन दिया जाता है।

उदाहरण के लिए, नवंबर, 2020 में विभाग ने दो नए प्लास्टिक पार्क स्थापित करने के लिए राज्य सरकारों से प्रस्ताव आमंत्रित किए। बिहार, उत्तर प्रदेश (02 प्रस्ताव), कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश की राज्य सरकारों से प्रस्ताव प्राप्त हुए। इनकी एक विशेषज्ञ समिति द्वारा जांच की गई, जिसके आधार पर क्रमशः जुलाई, 2022 और जनवरी, 2022 में गोरखपुर, उत्तर प्रदेश और गंजीमठ, कर्नाटक में प्लास्टिक पार्क स्थापित करने को अनुमति दी गई।

सरकार प्लास्टिक पार्कों की स्थापना के लिए अनुदान सहायता प्रदान करती है। इन परियोजनाओं के कार्यान्वयन के साथ-साथ उन्हें औद्योगिक इकाइयों से लैस करने की प्रक्रिया मुख्य रूप से राज्य सरकार या राज्य औद्योगिक विकास निगम या उनकी एजेंसियों द्वारा स्थापित विशेष प्रयोजन इकाई के हाथों में है। संबंधित राज्यों ने इन प्लास्टिक पार्कों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहन देने के लिए कई कदम उठाए हैं , जिनमें उद्योग के लिए जागरूकता और संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित करना, प्रतिस्पर्धी दरों पर भूखंड उपलब्ध कराना , कर प्रोत्साहन देना आदि सम्मिलित हैं।

इस योजना के अंतर्गत औद्योगिक इकाइयों की सततता और पर्यावरण मित्रता के लिए समान बुनियादी ढांचा प्रदान किया जाता है, जिसमें अपशिष्ट उपचार संयंत्र, ठोस/खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक पुनर्चक्रण के लिए सुविधाएं, भस्मक आदि शामिल हैं। कुछ प्लास्टिक पार्कों ने प्लास्टिक कचरे के पुनर्चक्रण के लिए इन-हाउस पुनर्चक्रण शेड भी स्थापित किए हैं।

भारत में प्लास्टिक उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए अन्य सरकारी पहलें

प्लास्टिक प्रसंस्करण को बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा की गई अन्य पहलें इस प्रकार हैं:

  1. उत्कृष्टता केन्द्र (सीओई): पॉलिमर और प्लास्टिक में अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहन देने के लिए विभाग ने विभिन्न राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों में 13 उत्कृष्टता केन्द्र स्थापित किए हैं।
उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) का स्थानउत्कृष्टता केंद्र का शीर्षकअनुमोदन की तिथि
राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला, पुणेसतत पॉलिमर उद्योग से अनुसंधान एवं नवाचार तक15.04.2011
केंद्रीय प्लास्टिक इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईपीईटी), चेन्नईग्रीन ट्रांसपोर्ट नेटवर्क (ग्रीट)01.04.2011
सीआईपीईटी, भुवनेश्वरदीर्घकालीन हरित सामग्री06.04.2013
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली    उन्नत पॉलिमर सामग्री15.03.2013
आईआईटी, गुवाहाटीसतत पॉलिमर (सस-पोल)अप्रैल 2013
आईआईटी, रुड़कीपेट्रोकेमिकल उद्योगों में प्रक्रिया विकास, अपशिष्ट जल प्रबंधन12.02.2019
सीआईपीईटी, भुवनेश्वरजैव-इंजीनियरिंग सतत पॉलिमर प्रणालियाँ12.02.2019
राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला, पुणेअनुकूलित अनुप्रयोगों के लिए विशेष पॉलिमर12.02.2019
सीएसआईआर – पूर्वोत्तर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (सीएसआईआर-एनईआईएसटी)पेट्रोलियम उद्योगों के सतत विकास के लिए पॉलिमर, उनके कंपोजिट और पॉलिमरिक झिल्ली04.12.2020
सीएसआईआर-आईआईसीटी, हैदराबादसजावटी, सुरक्षात्मक और रणनीतिक अनुप्रयोगों के लिए पॉलिमर कोटिंग्स04.12.2020
सीआईपीईटी, भुवनेश्वरअगली पीढ़ी के जैव-चिकित्सा उपकरणों का विनिर्माण04.12.2020
आईआईटी, गुवाहाटीपॉलिमर-आधारित उत्पादों का टिकाऊ और अभिनव डिजाइन और विनिर्माणफरवरी 2022
आईआरएमआरए, ठाणेरबर और संबद्ध तैयार उत्पादों के मूल्यवर्धित खिलौनों के लिए डिजाइन और विकासफरवरी 2022

ये उत्कृष्टता केंद्र विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जैसे कि टिकाऊ पॉलिमर, उन्नत पॉलिमर सामग्री, जैव-इंजीनियरिंग सिस्टम और पेट्रोकेमिकल उद्योगों में अपशिष्ट जल प्रबंधन के लिए प्रक्रिया विकास। इनका उद्देश्य नवाचार को प्रोत्साहन देना, प्रौद्योगिकी में सुधार करना और क्षेत्र के भीतर पर्यावरणीय रूप से दीर्घकालीन विकास को प्रोत्साहन देना है।

  1. कार्यबल का कौशलीकरण: केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान उद्योग की कौशल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्लास्टिक प्रसंस्करण और प्रौद्योगिकी में कई अल्पकालिक और दीर्घकालिक पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है।

भारतीय प्लास्टिक उद्योग और पर्यावरण सततता

भारत सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं कि प्लास्टिक उद्योग का विकास पर्यावरणीय दृष्टि से दीर्घकालीन हो तथा वैश्विक स्थिरता मानकों के अनुरूप हो ।

  1. प्लास्टिक पैकेजिंग के लिए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) विनियमन में न्यूनतम स्तर के पुन: उपयोग, पुनर्चक्रण और पुनर्चक्रित सामग्री के उपयोग के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। यह अपशिष्ट संग्रह, पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करता है। प्लास्टिक कचरे को कम करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए कुछ एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया गया है । विनियमन में पैकेजिंग उत्पादों में न्यूनतम मात्रा में पुनर्चक्रित सामग्री का उपयोग करने का भी आदेश दिया गया है ।
  2. खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का उद्देश्य खतरनाक रसायनों का उचित निपटान सुनिश्चित करना तथा अपशिष्ट न्यूनीकरण और संसाधन पुनः प्राप्ति को बढ़ावा देना है।
  3. सरकार प्लास्टिक उद्योग में चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों को अपनाने को प्रोत्साहन देती है, जिसमें पुनर्चक्रण और बायोडिग्रेडेबल विकल्पों का उपयोग शामिल है। चक्रीय अर्थव्यवस्था के लिए नवीनतम तकनीकों और उत्पादों को प्रोत्साहन देने के लिए, विभाग अपशिष्ट प्रबंधन, पुनर्चक्रण और अप-साइक्लिंग के साथ-साथ पुनर्चक्रित सामग्री से बने अभिनव उत्पादों के लिए नवीनतम तकनीकों और मशीनरी को प्रदर्शित करने के लिए चर्चाओं और प्रदर्शनियों के आयोजन में उद्योग का समर्थन और प्रोत्साहन करता है।
  4. भारत वैश्विक स्थिरता मानकों के अनुपालन को सक्षम करने के लिए विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ समन्वय कर रहा है। इसके अलावा, भारत अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (आईएसओ) की बैठकों में सक्रिय रूप से भाग लेता है जो प्लास्टिक उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक तैयार करता है।

निष्कर्ष

रसायन और पेट्रोकेमिकल्स विभाग के तहत प्लास्टिक पार्क योजना एक व्यापक और दूरदर्शी पहल का प्रतिनिधित्व करती है जो भारतीय प्लास्टिक क्षेत्र के औद्योगिक विकास और पर्यावरणीय स्थिरता दोनों को संबोधित करती है। अत्याधुनिक बुनियादी ढाँचा प्रदान करके, क्लस्टर-आधारित विकास को बढ़ावा देकर और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करके, यह योजना न केवल भारत की डाउनस्ट्रीम प्लास्टिक प्रसंस्करण क्षमताओं को मजबूत करती है बल्कि निवेश को भी आकर्षित करती है, निर्यात को बढ़ावा देती है और रोजगार सृजित करती है। जैसे-जैसे भारत वैश्विक प्लास्टिक व्यापार रैंकिंग में आगे बढ़ रहा है, प्लास्टिक पार्क योजना और संबद्ध उपाय यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण बने रहेंगे कि यह विकास दीर्घकालीन, समावेशी और नवाचार-संचालित हो।

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