मार्च 11, 2026

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ब्रिटेन के रक्षा मंत्री ने लंदन में ब्रिटेन-भारत रक्षा उद्योग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोलमेज सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की

भारत कुशल मानव संसाधन आधार, एक सशक्त प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सहयोग और व्यापार समर्थक पारिस्थितिकी तंत्र तथा एक विशाल घरेलू बाजार के साथ तत्पर है: राजनाथ सिंह
“भारत सहयोग, सह-निर्माण और सह-नवप्रवर्तन के लिए ब्रिटेन के साथ एक समृद्ध साझेदारी की कल्पना करता है”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ब्रिटेन की अपनी यात्रा के दूसरे और अंतिम दिन 10 जनवरी, 2024 को लंदन स्थित ट्रिनिटी हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ब्रिटेन के शीर्ष रक्षा उद्योग कारोबारियों तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ बातचीत की। राजनाथ सिंह ने ब्रिटेन-भारत रक्षा उद्योग मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोलमेज सम्मेलन की सह-अध्यक्षता अपने ब्रिटिश समकक्ष ग्रांट शाप्स के साथ की, जिसमें बड़ी संख्या में ब्रिटेन के रक्षा उद्योग से आने वाले मुख्य कार्यकारी अधिकारियों; ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों; यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष तथा सीआईआई इंडिया के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में ब्रिटेन का प्रतिनिधित्व करने वाली कुछ प्रमुख कंपनियों में बीएई सिस्टम्स, जीई वर्नोवा, जेम्स फिशर डिफेंस, लियोनार्डो एस.पी.ए., मार्टिन बेकर एयरक्राफ्ट कंपनी लिमिटेड, एसएएबी यूके, थेल्स यूके, अल्ट्रा-मैरीटाइम रोल्स-रॉयस, एडीएस ग्रुप और एमबीडीए यूके शामिल थे।

इस बैठक में ब्रिटेन के रक्षा खरीद राज्य मंत्री जेम्स कार्टिल्ज भी उपस्थित थे। गोलमेज सम्मेलन के दौरान भारत और ब्रिटेन के मध्य रक्षा औद्योगिक संबंधों को मजबूत बनाने पर भी विषयगत चर्चा की गई।

बैठक में रक्षा मंत्री ने ब्रिटेन से निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग मिलने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारत कुशल मानव संसाधन आधार, एक सशक्त प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सहयोगऔर व्यापार समर्थक पारिस्थितिकी तंत्र तथा एक विशाल घरेलू बाजार के साथ तत्पर है।

राजनाथ सिंह ने इस बात पर बल दिया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत वर्ष 2047 तक एक विकसित अर्थव्यवस्था बनने की राह पर आगे बढ़ रहा है। इस महत्वाकांक्षा को आगे का रास्ता निर्धारित करने के लिए एक स्पष्ट नेतृत्व वाले रोडमैप द्वारा सहयोग प्रदान किया गया है और विकास के इस मार्ग पर बने रहने के उद्देश्य से 1.4 अरब भारतीयों की सामूहिक इच्छाशक्ति द्वारा समर्थन दिया गया है।

रक्षा मंत्री ने भारत तथा ब्रिटेन के संबंधों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच एक पारस्परिक, लाभदायक व आंतरिक साझेदारी संबंध है और भारत सरकार ब्रिटेन के साथ सहयोग, सह-निर्माण एवं सह-नवप्रवर्तन के लिए एक समृद्ध साझेदारी की कल्पना करती है। उन्होंने कहा कि हमारी आपसी शक्तियों का समन्वय करके, हम एक साथ महान कार्य पूरा कर सकते हैं।

ग्रांट शाप्स भारत और ब्रिटेन के बीच पारस्परिक, लाभदायक व आंतरिक साझेदारी के संबंध में राजनाथ सिंह के बयान से सहमत हुए। ग्रांट शाप्स ने आगे कहा कि ये पारस्परिक, लाभदायक व आंतरिक साझेदारी संबंध सामान्य खरीदार-विक्रेता संबंधों से ऊपर हैं और हमारे बीच मूल रूप से एक रणनीतिक सहभागिता है।

ब्रिटेन से उद्योग जगत के कारोबारियों ने भारत के लिए अपनी वर्तमान एवं भविष्य की योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की। संयुक्त रूप से कार्य करने के कुछ मुख्य क्षेत्रों के रूप में एयरो-इंजन, इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन, मिसाइल, पावर-पैक और समुद्री प्रणालियों की पहचान की गई। रक्षा मंत्री ने भारत और भारतीय कंपनियों के साथ काम करने को लेकर ब्रिटेन के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों एवं प्रमुख कारोबारियों की सकारात्मकता तथा उत्साह पर भी अपने विचार साझा किये।

राजनाथ सिंह ने 09 जनवरी को ग्रांट शाप्स के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।द्विपक्षीय बैठक के बाद भारत और ब्रिटेन के बीच दो समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए – द्विपक्षीय अंतर्राष्ट्रीय कैडेट विनिमय कार्यक्रम के संचालन पर हुआ एक समझौता ज्ञापन वहीं दूसरा समझौता अनुसंधान एवं विकास में रक्षा सहयोग पर रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की सहायता से और ब्रिटेन की रक्षा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला (डीएसटीएल) की सहभागिता हेतु एक व्यवस्था पत्र पर किया गया है।

रक्षा मंत्री ने टैविस्टॉक स्क्वायर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि भी अर्पित की। उन्होंने लंदन में आंबेडकर हाउस का भी दौरा किया और डॉ. बीआर आंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। आंबेडकर हाउस डॉ. बीआर आंबेडकर का वह घर था, जिसमें वे 1921 और 1922 के बीच रहे थे, उस समय वे ग्रे इन में लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अर्थशास्त्र के लिए डिग्री और कानून की डिग्री हासिल कर रहे थे। रक्षा मंत्री ने डॉ. आंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए आगंतुक पुस्तिका संदेश में कहा कि हमारे गणतंत्र के मार्गदर्शक, भारत के आदरणीय संविधान के निर्माता के स्मारक पर जाना एक स्मरणीय अनुभव है।

राजनाथ सिंह नेस्डेन में स्वामीनारायण मंदिर भी गए और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

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