इलेक्ट्रॉनिक न्यायालय मिशन जनित परियोजना ई- न्यायालय मिशन मोड परियोजना ने भारत की कागज़-आधारित न्यायपालिका को डिजिटल-सक्षम और ट्रैक योग्य न्याय वितरण प्रणाली में बदल दिया है। 2014 से अब तक, मामले दायर करने और निपटाने की संख्या लगभग तीन गुना बढ़ गई है, और हर वर्ष न्यायालय लगातार दायर मामलों की तुलना में अधिक मामले निपटाते रहे हैं। 753 करोड़ से अधिक पृष्ठों के न्यायालयी अभिलेख डिजिटाइज़ किए जा चुके हैं, जबकि हजारों e-Sewa केंद्र डिजिटल भेदभाव को पाटने और न्यायिक सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। ये सुधार मिलकर न्याय प्रणाली को तेज़, अधिक पारदर्शी और सभी के लिए सुलभ बना रहे हैं। भारतीय न्यायपालिका का डिजिटलीकरण भारत की न्यायपालिका, जो एक अरब से अधिक लोगों को...
राष्ट्रीय समाचार
श्री प्रल्हाद जोशी ने कहा—भविष्य की पीढ़ियों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए शिक्षा प्रणालियों का निरंतर विकास सुनिश्चित...
प्रधानमंत्री मेधावी छात्रों को संस्थान के सर्वाधिक प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान करेंगेप्रधानमंत्री आईआईटी दिल्ली के सोनीपत कैंपस में स्थापित एआई-सक्षम उच्च-प्रदर्शन...
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि इस दिन...
हथकरघा क्षेत्र के सतत विकास के लिए नई प्रौद्योगिकियों का उचित उपयोग आवश्यक है: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मुयुवा उद्यमी, डिजाइनर्स और...
जल जीवन मिशन (जेजेएम)– हर घर जल का शुभारंभ अगस्त 2019 में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से किया गया...
रक्षा मंत्री ने प्रादेशिक सेना संबंधी रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 6 अगस्त, 2026 को नई दिल्ली में रक्षा मंत्रालय के लिए संसदीय सलाहकार समिति की...
मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल 'अग्नि-4' का सफल परीक्षण 6 अगस्त, 2026 को ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज...
देश की जैविक संपदा को स्वच्छ ऊर्जा, ग्रामीण समृद्धि और आर्थिक विकास में परिवर्तित करने की ऐतिहासिक राष्ट्रीय योजनासुनिश्चित खरीद,...
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए इस बात पर बल दिया कि मानवता को पृथ्वी के साथ...
भारत तेज़ी से इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की ओर बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अब आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और साफ़-सुथरे भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बन रही है। 2016 के बाद से ईवी की बिक्री में लगभग 46 गुना बढ़ोतरी हुई है, जो ग्राहकों की पसंद में आए बड़े बदलाव को दिखाता है। निर्यात 2020 में 12 लाख अमेरिकन डॉलर से बढ़कर 2024 में 8.4 करोड़ अमेरिकन डॉलर हो गया है। इससे भारत एक उभरते हुए ईवी केन्द्र के तौर पर स्थापित हो रहा है। 'नेशनल मिशन ऑन मैन्युफैक्चरिंग', ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री के लिए 'पीएलआई स्कीम' और 'पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एनहांसमेंट स्कीम' (पीएम ई-ड्राइव) जैसी सरकारी योजनाएं एक ज़्यादा आत्मनिर्भर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम को मज़बूत कर रही हैं। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर भारत का कदम पूरे भारत में भीड़-भाड़ वाले शहरों में रोज़ाना आने-जाने और छोटे शहरों में 'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी' (यानी यात्रा के आखिरी चरण की सुविधा) के तरीकों को पूरी तरह से नए सिरे से विचार किया जा रहा है। इस बदलाव के केंद्र में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी है। यह तकनीकी बदलाव देश की जलवायु रणनीति और टिकाऊ परिवहन के विज़न के लिए महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। सरकारी प्रोत्साहन, पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता और तेज़ी से हो रही तकनीकी प्रगति की वजह से, ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गए हैं और ऑटोमोबाइल उद्योग के भविष्य को आकार दे रहे हैं। भारत में मोबिलिटी में हो रहा बदलाव न सिर्फ़ पर्यावरण के लिहाज़ से ज़रूरी है, बल्कि यह एक आर्थिक मौक़ा भी है। यह देश के सबसे बड़े और सबसे प्रभावी उद्योगों में से एक को नया रूप दे रहा है। यह बदलाव ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए एक रणनीतिक ज़रिया बनकर उभर रहा है। साथ ही, इससे जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम हो रही है और अर्थव्यवस्था के लिए कम कार्बन उत्सर्जन वाली, कुशल विकास की राह बन रही है। इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) क्या है?ईवी एक ऐसा वाहन है जो इलेक्ट्रिक मोटर से चलता है और बैटरी में जमा ऊर्जा का इस्तेमाल करता है। इसे बाहरी पावर सोर्स से रिचार्ज किया जा सकता है।ईवी चार तरह के होते हैं:- बैटरी ईवी (बीईवी) जो पूरी तरह से इलेक्ट्रिक होते हैं।- हाइब्रिड ईवी (एचईवी) और प्लग-इन एचईवी, जो वाहन को चलाने के लिए इंटरनल कंबशन इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर दोनों का इस्तेमाल करते हैं। पीएचईवी में ज़्यादा देर तक सिर्फ़ इलेक्ट्रिक मोड में चलने के लिए बाहरी तौर पर रिचार्ज होने वाले बैटरी पैक भी होते हैं।- फ्यूल सेल ईवी (एफसीईवी), जिनमें केमिकल एनर्जी से इलेक्ट्रिक एनर्जी बनाई जाती है। भारत में ईवी क्रांति: पिछला दशक भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की शुरुआत 2015 में हुई। इसकी शुरुआत 'नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान' और 'एफएएमई स्कीम' को लॉन्च करके की गई, ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी ) को अपनाने को बढ़ावा दिया जा सके। यह कदम कुछ खास रणनीतिक प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर उठाया गया था। इनमें पेट्रोलियम ईंधन के बढ़ते आयात बिल को कम करना और शहरों में बिगड़ते वायु प्रदूषण की समस्या से निपटना शामिल था। साथ ही, इसका मकसद परिवहन क्षेत्र से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना भी था, जो भारत के कुल उत्सर्जन का लगभग 9 प्रतिशत हिस्सा है। नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान (एनईएमएमपी 2020)एनईएमएमपी ने 2020 भारत में ईवी (इलेक्ट्रिक वाहनों) को अपनाने और उनके घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप तैयार किया है। इसके दो मुख्य उद्देश्य हैं, ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करना और साफ़-सुथरी, टिकाऊ मोबिलिटी को बढ़ावा देना।भारत में (हाइब्रिड एवं) ईवी को तेज़ी से अपनाना और उनका विनिर्माण बढ़ाना (एफएएमई इंडिया)एनईएमएमपी 2020 के तहत, ईवी को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए 2015 में एफएएमई इंडिया योजना शुरू की गई थी। इस योजना के तहत खरीदारों को प्रोत्साहन दिए गए और चार्जिंग अवसंरचना के निर्माण तथा उत्पादन में मदद की गई। इसका पहला चरण मार्च 2019 तक चला, जिसके बाद दूसरा चरण शुरू हुआ, जिसे अप्रैल 2024 तक पांच वर्षों के लिए लागू किया गया। कोविड के बाद के समय, यानी वित्तीय वर्ष 22 में एक अहम मोड़ आया। खास नीतिगत प्रोत्साहन, ज़्यादा सब्सिडी और गाड़ियों की बेहतर उपलब्धता की वजह से ईवी को अपनाने की रफ़्तार तेज़ी से बढ़ी। इस दौरान बाज़ार में एक बड़ा ढांचागत बदलाव भी देखने को मिला। जहां वित्तीय वर्ष 20 – वित्तीय वर्ष 21 में शुरुआत में ई-रिक्शा का दबदबा था, वहीं जल्द ही इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स भी काफ़ी लोकप्रिय हो गए। वित्तीय वर्ष 25 तक, वे एक प्रमुख सेगमेंट बन गए, जो अनौपचारिक, शेयर्ड मोबिलिटी से मुख्यधारा के निजी और कमर्शियल इस्तेमाल की ओर एक बड़े बदलाव का संकेत था। क्या आप जानते हैं?ईवी को अपनाने में कई गुना बढ़ोतरी हुई है; यह वित्तीय वर्ष 15-16 में 0.08 प्रतिशत से बढ़कर वित्तीय वर्ष 25-26 में 8.26 प्रतिशत हो गया है। भारत तीव्र गति की राह पर: वैश्विक विस्तार के बीच ईवी की बढ़ोतरी दुनिया भर में लोग ईवी को तेज़ी से अपना रहे हैं। बेहतर ड्राइविंग रेंज और अच्छी कीमत वाले कई मॉडल बाज़ार में आ रहे हैं। साथ ही, सार्वजनिक तौर पर चार्जिंग अवसंरचना का भी तेज़ी से विस्तार हो रहा है। भारत में मज़बूत नीतिगत समर्थन, बढ़ती बिक्री और रजिस्ट्रेशन के ज़रिए यह तेज़ी देखी जा रही है। घरेलू विनिर्माण और चार्जिंग नेटवर्क के बढ़ते इकोसिस्टम से इसे और बढ़ावा मिल रहा है, जिससे ईवी को अपनाने वालों की संख्या बढ़ रही है। भारत का ईवी स्कोरकार्ड- बढ़ती बिक्री, रजिस्ट्रेशन और निर्यात 2016 में लगभग 50,000 ईवी की मामूली बिक्री के मुकाबले, 2025 में 23 लाख यूनिट्स बेची गईं। यह भारत के ईवी मार्केट में 46 गुना बढ़ोतरी को दिखाता है। भारत की यह बढ़ोतरी वैश्विक प्रदर्शन से कहीं ज़्यादा रही है। जहां वैश्विक स्तर पर ईवी की बिक्री लगभग 20 गुना बढ़ी और 2016 में 9,18,000 से बढ़कर 2024 में 1.878 करोड़ हो गई। क्या आप जानते हैं?2025 में, उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा ईवी बाज़ार बनकर उभरा। 4 लाख से ज़्यादा यूनिट्स के साथ, इसने देश की कुल ईवी बिक्री का 18 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया। इसके बाद महाराष्ट्र (2.66 लाख यूनिट्स - 12 प्रतिशत) और कर्नाटक (2 लाख यूनिट्स - कुल बिक्री का 9 प्रतिशत) का स्थान रहा। ...
डाक विभाग ने ग्राहकों से राखी की सुरक्षित एवं समयबद्ध डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए अपनी 24 स्पीड पोस्ट एवं...
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने आज 'एक्सेस (वायरलाइन और वायरलेस) और ब्रॉडबैंड (वायरलाइन और वायरलेस) सेवा विनियम, 2024 की सेवा की...
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आध्यात्मिक विकास पर बल देने वाले एक संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया: "आत्मोदयः परज्यानिर्द्वयं नीतिरितीयती। तदूरीकृत्य...
प्रधानमंत्री ने अनुच्छेद 370 और 35(ए) के निरसन के सात वर्ष पूरे होने पर उसके महत्व के बारे में बताया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज अनुच्छेद 370 और 35(ए) के ऐतिहासिक निरसन के सात साल पूरे होने पर 5 अगस्त, 2019 को भारत के समावेशी विकास की...
पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत हर छह दिन में एक लाख लाभार्थी परिवार जुड़ेजुलाई 2026 में इस...
अवैध मादक पदार्थों के व्यापार एवं नशीले पदार्थों के दुरुपयोग की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो(एनसीबी), संबंधित...
सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्य का विषय है, इसलिए पूरे देश में, विशेष रूप से पूर्वी भारत में ओडिशा सहित, नए आयुष...
केंद्र प्रायोजित योजना राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) के तहत, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों से उनकी राज्य वार्षिक कार्य योजनाओं (एसएएपी)...
भारत-उज़्बेकिस्तान संसदीय मैत्री समूह द्विपक्षीय संबंधों को नई गति प्रदान करेगा: लोकसभा अध्यक्षउज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव ने लोकसभा...
'राष्ट्र सर्वोपरि' की अवधारणा सैन्य और नागरिक सेवाओं की साझा प्रतिबद्धता है; यदि लक्ष्य एक हो, तो हर तत्व राष्ट्रीय...
नवनिर्मित अभिनव हाइब्रिड मैग्नेटो-रियोमीटर, स्मार्ट तरल पदार्थों के उपयोग के परिणाम की पहचान करने का एक नया तरीका प्रदान करता...
त्रि-सैन्य भावी युद्धकला पाठ्यक्रम के चौथे संस्करण का शुभारंभ 3 अगस्त, 2026 को नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में हुआ।...
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय दल के प्रदर्शन की सराहना की है। प्रधानमंत्री...
उज्बेकिस्तान गणराज्य के विदेश मंत्री, महामहिम सईदोव बख्तियार ओदिलोविच ने आज, 3 अगस्त, 2026 को राष्ट्रपति भवन में भारत की...
नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) ने भारत की आजादी के 79 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 2 अगस्त, 2026 को...
मैं प्रत्येक नागरिक, विशेषकर हमारे युवाओं से, इस आंदोलन में शामिल होने का आग्रह करता हूं: प्रधानमंत्रीआज, जब देश ने...
भारत की राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मु ने आज, 2 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति...
सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने आज नई दिल्ली में स्वदेशी रूप से विकसित एक्सट्रीम वेदर ग्रेड (एक्सडब्ल्यूजी) डीजल लॉन्च...
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए 36,441 करोड़ रुपये के संयुक्त परिव्यय के साथ विस्तारित खेलो इंडिया योजना और राष्ट्रीय खेल संघों (एएनएसएफ) को बढ़ी हुई सहायता को मंजूरी दे दी है। यह युवा विकास और राष्ट्र निर्माण के लिए खेलों की शक्ति का उपयोग करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। यह आजादी के बाद से देश का सबसे महत्वाकांक्षी खेल विकास कार्यक्रम है। खेलों के प्रति देश के युवाओं की आकांक्षाओं को काफी बढ़ावा दिया गया है और आने वाले दशक में इसका परिवर्तनकारी प्रभाव पड़ेगा। स्वीकृत परिव्यय पिछली खेलो इंडिया योजना की तुलना में लगभग आठ गुना है, जो खेलों को युवा विकास, राष्ट्र-निर्माण और वैश्विक खेल महाशक्ति के रूप में भारत के उद्भव की आधारशिला बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। संशोधित योजना को स्कूल के खेल के मैदानों और गांव के खेल के मैदानों से लेकर ओलंपिक पोडियम तक प्रत्येक प्रतिभाशाली युवा भारतीय के लिए एक सहज मार्ग बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि भूगोल, आर्थिक पृष्ठभूमि या अवसरों की कमी के कारण कोई भी खेल प्रतिभा अनदेखी न रहे। खेलो भारत नीति 2025 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दृष्टिकोण के अनुरूप, यह योजना 2030 राष्ट्रमंडल खेलों और ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी के लिए देश की दावेदारी सहित भारत की दीर्घकालिक खेल महत्वाकांक्षाओं के लिए एक मजबूत नींव रखते हुए शिक्षा, फिटनेस, प्रौद्योगिकी और श्रेष्ठ प्रदर्शन प्रशिक्षण के साथ खेलों को एकीकृत करती है। हर प्रतिभाशाली युवा को उत्कृष्टता का मार्ग: पहली बार, प्रतिभा की पहचान और वैज्ञानिक प्रशिक्षण से लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता और ओलंपिक की तैयारी तक हर स्तर पर युवा खिलाड़ियों का समर्थन करने के लिए एक व्यापक एथलीट विकास मार्ग बनाया गया है। यह योजना एक एकीकृत राष्ट्रव्यापी खेल इकोसिस्टम स्थापित करती है जिसमें राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई), खेलो इंडिया उत्कृष्टता केंद्र (केआईसीओई), भारतीय खेल प्राधिकरण प्रशिक्षण केंद्र (एसटीसी), खेलो इंडिया मान्यता प्राप्त अकादमियां (केआईएए), खेलो इंडिया केंद्र (केआईसी) और सशस्त्र बलों की युवा खेल कंपनियां (वाईएससी) शामिल हैं। साथ में, ये संस्थान देश भर में विश्व स्तरीय कोचिंग, खेल विज्ञान सहायता और आधुनिक बुनियादी ढांचा प्रदान करेंगे। स्कूली खेल इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए, सरकार ने दो नई पहल- खेलो इंडिया फीडर स्कूल (केआईएफएस) और खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय (केआईयूवी) शुरू की हैं, जो खेल को मुख्यधारा की शिक्षा के साथ एकीकृत करेंगे और प्रतिभाशाली बच्चों की प्रारंभिक पहचान और व्यवस्थित पोषण को सक्षम करेंगे। भारत के एथलीट पूल का लगभग दस गुना विस्तार: इस योजना के तहत एक बड़ा सुधार मौजूदा खेलो इंडिया एथलीट कार्यक्रम के साथ-साथ इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट (ई-केआईए) श्रेणी का निर्माण है। यह संरचित एथलीट विकास इकोसिस्टम का लगभग दस गुना विस्तार करेगा, जिससे हजारों अतिरिक्त युवा एथलीटों को पेशेवर कोचिंग, वैज्ञानिक सहायता और दीर्घकालिक सलाह के तहत लाया जाएगा। प्रतिभा पहचान विकास समितियों, क्षेत्रीय समितियों, प्रतिभा स्काउट्स, उच्च प्रदर्शन निदेशकों और उच्च प्रदर्शन प्रबंधकों को शामिल करते हुए एक मजबूत राष्ट्रव्यापी प्रतिभा पहचान का ढांचा देश भर में होनहार एथलीटों की निरंतर पहचान, ट्रैकिंग और विकास सुनिश्चित करेगा। यह योजना जमीनी स्तर की प्रतियोगिताओं से खेलो इंडिया और बाद में टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) तक एक स्पष्ट प्रगति का मार्ग भी स्थापित करती है, जिससे योग्य एथलीटों को उच्चतम स्तर पर पदकों के लिए प्रतिस्पर्धा करने के लिए विश्व स्तरीय प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और व्यापक समर्थन प्राप्त करने में सक्षम बनाया जा सके। अधिक प्रतियोगिताएं, अधिक अवसर: इस...
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विख्यात साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुंशी...
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में पुरुषों के +110 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में रजत पदक जीतने पर...
जमीनी स्तर के नवाचार हमारी जरूरतों के प्रति अधिक अनुकूल होते हैं क्योंकि उनमें स्थानीय अनुभव, वैज्ञानिक सोच तथा व्यक्तिगत...