मार्च 7, 2026

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने त्वरित अंतराल में दो प्रलय मिसाइलों का सफल प्रक्षेपण किया

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन-डीआरडीओ ने 31 दिसंबर, 2025 को दिन में लगभग 10 बजकर तीस मिनट पर ओडिशा तट के पास एक ही लॉन्चर से दो प्रलय मिसाइलों का सफल प्रक्षेपण किया। ये परीक्षण उपयोगकर्ता मूल्यांकन के तहत किए गए। चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज के ट्रैकिंग सेंसरों से पुष्टि हुई कि दोनों मिसाइलों ने निर्धारित पथ का अनुसरण कर सभी उड़ान उद्देश्यों को पूरा किया। प्रक्षेपण बिंदुओं के निकट तैनात जहाज़ पर लगे टेलीमेट्री सिस्टम से भी इसकी पुष्टि हुई।

प्रलय स्वदेशी रूप से विकसित ठोस प्रणोदक अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसमें उच्च भेदक क्षमता सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक मार्गदर्शन और नेविगेशन तकनीक का उपयोग किया गया है। यह मिसाइल विभिन्न लक्ष्यों तक कई प्रकार के वारहेड ले जाने में सक्षम है।

प्रलय मिसाइल को मिसाइल प्रणाली और वैमानिकी के उन्नत प्रौद्योगिकी पर काम करने वाले हैदराबाद स्थित इमारत अनुसंधान केंद्र ने डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं (रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला, उन्नत प्रणाली प्रयोगशाला, शस्त्र अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान, उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला, रक्षा धातुकर्म अनुसंधान प्रयोगशाला, टर्मिनल बैलिस्टिक्स अनुसंधान प्रयोगशाला, अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (इंजीनियर) और एकीकृत परीक्षण रेंज), विकास-सह-उत्पादन साझेदारों (भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड) और अन्य भारतीय उद्योगों के सहयोग से विकसित किया है। परीक्षणों के लिए, दोनों विकास-सह-उत्पादन साझेदारों ने प्रणालियों को एकीकृत किया। परीक्षण के दौरान डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक, भारतीय वायु सेना और भारतीय सेना के उपयोगकर्ता प्रतिनिधि, और विकास-सह-उत्पादन साझेदारों सहित उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित थे।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने त्वरित अंतर पर मिसाइलों के सफल प्रक्षेपण पर डीआरडीओ, भारतीय वायु सेना, भारतीय सेना, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम और उद्योग जगत की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रलय मिसाइल के साल्‍वो प्रक्षेपण ने मिसाइल की विश्वसनीयता को स्थापित कर दिया है। रक्षा विशेषज्ञों की भाषा में ‘साल्वो लॉन्च’ का मतलब होता है. एक साथ या बहुत कम अंतर पर कई हथियारों से हमला।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास सचिव और डीआरडीओ अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने सफल परीक्षण में शामिल टीम को बधाई दी और कहा कि यह उपलब्धि उपयोगकर्ताओं के लिए मिसाइल प्रणाली के शीघ्र शामिल हो पाने की तैयारी का संकेत है।

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