मार्च 10, 2026

ई-केवाईसी होने से पात्र परिवारों को मिल रहा सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ

मार्च, 2025 तक 97 फीसदी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूर्ण
तकनीक के जरिए दक्षतापूर्ण और पारदर्शी बनी सार्वजनिक वितरण प्रणाली  

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने ई-केवाईसी प्रक्रिया को अपनाकर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को और अधिक दक्षतापूर्ण और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत आधार कार्ड नंबर को राशन कार्ड से लिंक किया गया है जिससे यह सुनिश्चित हुआ है कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल पात्र लोगों को ही मिले।
ई-केवाईसी होने से फर्जी या अपात्र लोगों को पीडीएस से बाहर करने और पात्र परिवारों को सब्सिडी युक्त अनाज और अन्य लाभ पहुंचाने में मदद मिल रही है। ई-केवाईसी प्रक्रिया मई, 2022 में शुरू हुई और पूरे प्रदेश में संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने में इसकी अहम भूमिका है। मई, 2022 से जनवरी, 2023 तक, करीब 60 फीसदी पीडीएस लाभार्थियों ने उचित मूल्य की दुकानों पर अपनी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करवाई।
प्रदेश के तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने खुद का ई-केवाईसी एप्लिकेशन जुलाई, 2023 में लॉन्च किया। इससे लाभार्थियों के लिए उचित मूल्य की दुकानों पर आधार द्वारा फिंगरप्रिंट सत्यापन का इस्तेमाल करके ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करना सुगम हो गया।
जुलाई, 2023 से जुलाई, 2024 तक ई-केवाईसी करवाने वालों की संख्या 77 फीसदी  हो गई। हालांकि, दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले कई लोगों को उचित मूल्य की दुकानों तक पहुंचने में असुविधा या सत्यापन के दौरान फिंगरप्रिंट का मिलान न होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
इसके समाधान के लिए प्रदेश सरकार ने एक मोबाइल ऐप लॉन्च की, ताकि लाभार्थी आधार द्वारा चेहरे की पहचान के माध्यम से ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर सकें। इससे दुर्गम क्षेत्रों में रह रहे परिवारों के लिए यह प्रक्रिया सरल हो गई क्योंकि उन्हें अब उचित मूल्य की दुकानों पर जाने की जरूरत नहीं रही। चेहरे से सत्यापन की सुविधा शुरू होने से ई-केवाईसी की दर जुलाई, 2024 में 77 फीसदी से बढ़कर मार्च, 2025 तक 97 फीसदी हो गई है।
आधार सत्यापन ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पूरी तरह से रूपांतरित कर दिया है। इससे पात्र परिवारों की पहचान हुई, साथ ही प्रतिलिपिकरण (डुप्लीकेशन) को हटाने और प्रक्रिया को गतिशील व अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिली। ई-केवाईसी और चेहरे से सत्यापन की सफलता दर्शाती है कि तकनीक के माध्यम से हर संसाधन का बेहतर तरीके से इस्तेमाल और पात्र लोगों तक लाभ पहुंचाया जा सकता है।

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