मार्च 9, 2026

विकसित भारत @2047: छावनी बोर्डों के लिए रोडमैप तैयार करने हेतु ‘मंथन 2025’ नामक दो दिवसीय सम्मेलन नई दिल्ली में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ

मुख्य बिंदुओं में 2030 तक कार्बन-न्यूट्रल छावनी, 2035 तक स्मार्ट छावनी, समावेशी विकास, जीवन में आसानी एवं व्यापार करने में सुगमता और डिजिटल प्रथम सेवा वितरण का लक्ष्य शामिल हैं

सरकार के ‘विकसित भारत @2047’ विजन के अनुरूप, छावनी बोर्डों के लिए रोडमैप तैयार करने हेतु भारतीय रक्षा संपदा सेवा (आईडीईएस) अधिकारियों का दो दिवसीय सम्मेलन मंथन 2025 19 सितंबर, 2025 को नई दिल्ली में संपन्न हुआ। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 18 सितंबर को उद्घाटन सत्र में अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने अधिकारियों से छावनी बोर्डों को स्मार्ट, हरित एवं टिकाऊ शहरी इकोसिस्टम में रूपांतरित करने के लिए प्रेरित किया और वर्ष 2035 तक इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु ठोस प्रयासों का आह्वान किया।

भूमि संसाधन विभाग के सचिव मनोज जोशी, भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमानी (वर्चुअल माध्यम से) और भारत के उप नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक सुबीर मलिक जैसे प्रतिष्ठित मुख्य वक्ताओं की बहुमूल्य अंतर्दृष्टि ने अधिकारियों को निर्धारित उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया।

दो दिवसीय सम्मेलन की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

1.       2030 तक कार्बन न्यूट्रल छावनी

  • नवीकरणीय ऊर्जा ग्रिड, रूफटॉप सौर ऊर्जा, बायो-गैस एवं अपशिष्ट-से-ऊर्जा संयंत्रों के माध्यम से शुद्ध-शून्य उत्सर्जन हासिल करना;
  • ईवी चार्जिंग हब, हरित परिवहन व बड़े पैमाने पर वनरोपण को प्रोत्साहित करना;
  • कार्बन ऑडिट तथा वार्षिक स्थिरता रिपोर्टिंग को संस्थागत बनाना।

2.       2035 तक स्मार्ट छावनी

  • डिजिटल रूप से सक्षम, हरित और नागरिक-अनुकूल इकोसिस्टम का निर्माण करना
  • स्मार्ट पावर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित निगरानी, ई-मोबिलिटी और जल पुनर्चक्रण का एकीकरण करना
  • आधुनिक सुविधाओं के साथ विरासत संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना।

3.      समावेशी विकास और जीवन यापन में आसानी

  • गरीबों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
  • बाधा-मुक्त बुनियादी ढांचे एवं समावेशी सामाजिक सुविधाओं का विकास किया जाए।
  • छावनियों को करुणामय और उत्तरदायी शासन का आदर्श स्वरूप बनाया जा सके।

4.       डिजिटल प्रथम सेवा वितरण

  • ई-छावनी 2.0 को एआई-संचालित शिकायत निवारण, बहुभाषी समर्थन और टेली-हेल्थ सेवाओं सहित स्मार्ट स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ उन्नत किया जाए।
  • नागरिक सेवाओं को 100% ऑनलाइन बनाते हुए स्मार्ट डैशबोर्ड के माध्यम से प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जाए।
  • दक्षता और पारदर्शिता को सुदृढ़ करने हेतु डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया को संस्थागत बनाया जाए।

5.      वित्तीय लचीलापन और संस्थागत मजबूती

  • नवीन राजस्व स्रोतों के माध्यम से वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर छावनी बोर्ड का निर्माण हो।
  • पीपीपी मॉडल, ग्रीन बॉन्ड और उपयोगकर्ता शुल्क जैसे विकल्पों का अन्वेषण किया जाए।
  • सुधारों की स्थिरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक सुदृढ़ राजकोषीय ढांचा विकसित किया जाए।

6.       हरित नेतृत्व और राष्ट्रीय आदर्श

  • यह प्रदर्शित करना कि विकास और पर्यावरण सामंजस्यपूर्ण रूप से सह-अस्तित्व में रह सकते हैं। 
  • जैव विविधता पार्कों का विकास, जल निकायों का पुनरुद्धार, अपशिष्ट पृथक्करण और पुनर्चक्रण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाए।
  • प्रत्येक छावनी को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील शासन की एक आदर्श ‘ प्रकाश स्तंभ परियोजना’ के रूप में स्थापित किया जाए।

7.       अधिकारियों का कौशल एवं ज्ञान उन्नयन

  • स्थिरता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस), हरित प्रौद्योगिकियों और आधुनिक शहरी प्रबंधन में सतत कौशल उन्नयन किया जाए।
  • प्रशिक्षण, सहकर्मी-शिक्षण और वैश्विक सहयोग को प्रोत्साहित किया जाए।
  • प्रत्येक कार्य को केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण में योगदान के अवसर के रूप में देखा जाए।

8.       सीईओ के कर्तव्य के मूल के रूप में जन संवाद

  • संरचित नागरिक सहभागिता को संस्थागत रूप प्रदान किया जाए।
  • मुख्य कार्यकारी अधिकारी निवासियों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, पूर्व सैनिकों और असैन्य समाज के साथ नियमित जन संवाद आयोजित करें।
  • प्रत्येक स्तर पर पारदर्शिता, विश्वास और सहभागितापूर्ण शासन की संस्कृति विकसित की जाए।

9.       छावनी क्षेत्रों में व्यापार करने में आसानी

  • उद्यमिता, लघु व्यवसायों और स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहित करने हेतु ‘ई-कनेक्ट’ जैसे प्लेटफ़ॉर्म को सुदृढ़ किया जाए।
  • डिजिटल माध्यमों से अनुमतियों, पट्टों और विनियामक प्रक्रियाओं को सरल एवं पारदर्शी बनाया जाए।
  • छावनियों को नवाचार, आजीविका सृजन और स्थानीय आर्थिक सशक्तिकरण के जीवंत केंद्र के रूप में विकसित किया जाए

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