अप्रैल 21, 2026

वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम

सरकार ने अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के 19 जिलों के उत्तरी सीमा से सटे 46 ब्लॉकों के चुनिंदा गांवों के व्यापक विकास के लिए 15 फरवरी, 2023 को केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-I (वीवीपी-I) को मंजूरी दे दी है। शुरुआत में, इस कार्यक्रम के तहत प्राथमिकता के आधार पर व्यापक विकास के लिए 662 सीमावर्ती गांवों की पहचान की गई है। राज्यवार गांवों की संख्या इस प्रकार है: अरुणाचल प्रदेश-455, हिमाचल प्रदेश-75, सिक्किम-46, उत्तराखंड-51 और लद्दाख (केंद्र शासित प्रदेश)-35 ।

इस कार्यक्रम में पर्यटन एवं सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने, कौशल विकास एवं उद्यमिता, कृषि/बागवानी, औषधीय पौधों/जड़ी-बूटियों की खेती आदि सहित सहकारी समितियों के विकास के माध्यम से आजीविका सृजन के अवसर पैदा करने हेतु चयनित गांवों में क्रियाकलाप के केंद्रित क्षेत्रों की परिकल्पना की गई है। इन क्रियाकलापों में सड़क संपर्क से वंचित गांवों को सड़क संपर्क प्रदान करना, गांव में बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य सुविधा, शिक्षा का बुनियादी ढांचा, अक्षय ऊर्जा सहित ऊर्जा, टेलीविजन और दूरसंचार संपर्क प्रदान करना भी शामिल है। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को चयनित गांवों में रहने के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन प्रदान करना है।

केंद्र सरकार ने 2 अप्रैल, 2025 को केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम-II (वीवीपी-II) को मंजूरी दी है, जिसमें वित्तीय वर्ष 2028-29 तक 6839 करोड़ रुपये का कुल परिव्यय है। इसका उद्देश्य अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गुजरात, जम्मू-कश्मीर (केन्द्र शासित प्रदेश), लद्दाख (केन्द्र शासित प्रदेश), मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में वीवीपी-I के तहत पहले से ही कवर की गई उत्तरी सीमा के अलावा, अंतरराष्ट्रीय भूमि सीमाओं (आईएलबी) से सटे ब्लॉकों में स्थित चुनिंदा रणनीतिक गांवों का व्यापक विकास करना है।

गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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