जून 7, 2026

दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कल आयोजित मंत्रिपरिषद की सफल बैठक के संबंध में आज विस्तृत जानकारी साझा की। प्रधानमंत्री ने...

समझौता ज्ञापन/समझौते: क्रमांकसमझौता ज्ञापन/समझौता1.आतंकवाद रोधी संयुक्त कार्य समूह की स्थापना पर समझौता ज्ञापन2.भारत के सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान और...

ब्रिक्स देशों के युवा उद्यमियों ने नवाचार, समावेशन और टिकाऊ उद्यम पर विचार-विमर्श किया ब्रिक्स युवा परिषद उद्यमिता कार्य समूह...

बिजली उत्पादन के बुनियादी ढांचे की समीक्षा कीवैश्विक ऊर्जा संकट के बीच उत्तरदायी जल प्रबंधन का आह्वान किया राज्यपाल कविन्द्र...

यह स्‍मारक कोरियाई युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों के शौर्य, बलिदान और मानवीय योगदान को श्रद्धांजलि है रक्षा मंत्री श्री...

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने...

पूरे जम्मू एवं कश्मीर में गैर-एटीएल स्कूलों को सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए आमंत्रित किया नीति आयोग के...

मेघालय के उमरोई सैन्य स्टेशन में आज बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास प्रगति-2026 का शुभारंभ हुआ। इस सैन्य अभ्यास में भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका और वियतनाम सहित 12 मित्र देशों ने भागीदारी कर रहे...

दोनों मंत्रियों ने मजबूत रक्षा सम्बंधों और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपने संकल्प को दोहरायाभारत और दक्षिण कोरिया ने...

राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज कांगड़ा जिला के राजकीय प्राथमिक विद्यालय गुजरेडा का दौरा किया। उन्होंने राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों...

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 21 मई को एपीओ की 68वीं शासी निकाय बैठक के उद्घाटन सत्र में...

प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है प्रधानमंत्री नरेन्द्र...

भारत सरकार के वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग के अंतर्गत वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद ने नॉर्वे में स्वच्छ ऊर्जा,...

रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जम्मू-श्री माता वैष्णो देवी कटरा खंड की दीर्घकालिक सुरक्षा और विश्वसनीयता को मजबूत करने की परियोजना:...

वर्ष 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय का युवा कार्यक्रम विभाग 20-21 मई,...

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा, संरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने की प्रतिबद्धता की पुष्टि कीदोनों मंत्रियों ने...

आयुष अनुदान पोर्टल अनुदान प्रबंधन में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगा: प्रतापराव जाधवयह पोर्टल डिजिटल रूप से सशक्त और...

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 19 मई 2026 को ओस्लो में आयोजित भारत-नॉर्डिक तृतीय शिखर सम्मेलन के दौरान फिनलैंड के प्रधानमंत्री...

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने परमाणु ऊर्जा सहयोग पर अमेरिकी उद्योगपतियों के साथ चर्चा कीभारत का परमाणु विस्तार और...

सौरभ विजय ने सोमवार को भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। वे...

इस परामर्श में गर्मी से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए निवारक उपायों, पारंपरिक स्‍वास्‍थ्‍य पद्धतियों और आपातकालीन प्रतिक्रिया...

जम्मू में रोटरी क्लब लीडरशिप लर्निंग सेमिनार को किया संबोधित राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि प्रभावी नेतृत्व केवल किसी...

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को नॉर्वे के महामहिम सम्राट हेराल्ड पंचम ने आज ओस्लो में आयोजित एक विशेष समारोह में 'द...

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री महामहिम रॉब जेटेन के साथ नीदरलैंड की प्रतिष्ठित जल प्रबंधन संरचना, अफस्लुइटडिज्क का...

.No.DocumentsAreas1.Roadmap of India-Netherlands Strategic Partnership Overarching Document2.Restitution of Chola Copper Plates Culture3.Memorandum of Understanding on Mobility and Migration between the Government...

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज हेग में डच प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास(कैटश्यूस) में नीदरलैंड के प्रधानमंत्री महामहिम रोब जेटेन के साथ...

भारत दुनिया के 70 प्रतिशत से ज़्यादा गुड़ का उत्पादन करता है, जिससे वह प्राकृतिक मिठास के मामले में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। देश के गन्ने के कुल उत्पादन का लगभग 20–30 प्रतिशत हिस्सा गुड़ बनाने में इस्तेमाल होता है, जिससे लगभग 25 लाख ग्रामीण लोगों को आजीविका मिली हुई है। इस क्षेत्र में निर्यात में भी काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है। 2015–16 से 2024–25 के बीच गुड़ के निर्यात के मूल्य में 106.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो इसकी बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग का संकेत है। आयरन, मिनरल्स और जरूरी माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण, गुड़ रिफाइंड चीनी का एक ज़्यादा सेहतमंद विकल्प है। इस बढ़ोतरी को और बढ़ावा देने के लिए, सरकार की कई योजनाएं जैसे प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना, पीएम सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग उन्नयन योजना और एक जिला एक उत्पाद के साथ-साथ जीआई टैगिंग भी अहम भूमिका निभा रही हैं। ये योजनाएं उत्पादों की वैल्यू बढ़ाने, ग्रामीण उद्यमों को मजबूत करने और निर्यात की संभावनाओं को बढ़ाने में मदद कर रही हैं। भारत में गुड़ सेक्टर: उत्पादन, महत्व और आजीविका गुड़, एक पारंपरिक, बिना रिफाइन किया हुआ और प्राकृतिक मीठा पदार्थ है। इसे बिना किसी रसायन का इस्तेमाल किए, गन्ने के रस को गाढ़ा करके बनाया जाता है। इसे अक्सर "औषधीय चीनी" भी कहा जाता है, और पोषक तत्वों के मामले में यह शहद के बराबर होता है। गुड़ का सेवन एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किया जाता है, जहां इसे अलग-अलग स्थानीय नामों से जाना जाता है। गुड़ को प्राकृतिक रुप से बनाने, बनाने के पारंपरिक तरीकों और रसायन-मुक्त मीठे पदार्थों के प्रति उपभोक्ताओं की बढ़ती पसंद के कारण इसे काफी महत्व दिया जाता है। दुनिया भर में गुड़ के कुल उत्पादन का 70 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा भारत में होता है। इस वजह से भारत दुनिया का सबसे बड़ा गुड़ उत्पादक देश है। देश में गन्ने के कुल उत्पादन का लगभग 20–30 प्रतिशत हिस्सा गुड़ बनाने में इस्तेमाल होता है। यह ग्रामीण भारत के प्रमुख कृषि-प्रसंस्करण उद्योगों में से एक है। इस क्षेत्र की खासियत विकेंद्रित प्रसंस्करण, परिवहन की कम लागत, छोटे पैमाने पर उद्यमिता और कुटीर उद्योग है। इससे लगभग 25 लाख लोगों की आजीविका चलती है। बढ़ती मिठास: भारत की बढ़ती गुड़ अर्थव्यवस्था भारत के गुड़ क्षेत्र को गन्ने के भारी उत्पादन का लाभ मिलता है। वर्ष 2024-25 में, गन्ने का कुल उत्पादन 444.9 मिलियन टन (एमटी) रहने का अनुमान था। कुल उत्पादन में उत्तर प्रदेश का योगदान 48.5 प्रतिशत रहा, जिसके बाद महाराष्ट्र (24.1 प्रतिशत) और कर्नाटक (10.5 प्रतिशत) का स्थान था। अन्य उत्पादक राज्यों में गुजरात, तमिलनाडु, बिहार, उत्तराखंड, पंजाब, मध्य प्रदेश और हरियाणा शामिल हैं।1 भारत गुड़ और कन्फेक्शनरी उत्पादों (जिनमें पारंपरिक भारतीय मिठाइयां और टॉफियां शामिल हैं) के प्रमुख निर्यातकों में से एक है। वर्ष 2015-16 में, 292.8 मीट्रिक टन निर्यात हुआ जिससे 197 मिलियन अमेरिकी डॉलर मिले। वर्ष 2024-25 तक निर्यात बढ़कर 471.9 मीट्रिक टन हो गया जिससे 406.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर प्राप्त हुए। इस अवधि के दौरान, मूल्य में लगभग 106.5 प्रतिशत और मात्रा में 61.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।2 वर्ष 2024-25 में निर्यात के प्रमुख ठिकानों में इंडोनेशिया, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), नाइजीरिया और नेपाल शामिल थे। 3 अगर हम साल-दर-साल बढ़ोत्तरी की तुलना करें, तो अप्रैल-जनवरी (2025-26) के दौरान निर्यात 450.1 मिट्रिक टन तक पहुंच गया, जिसका मूल्य 384.4 मिलियन अमेरिकी डॉलर था। यह 2024-25 की इसी अवधि की तुलना में मात्रा में लगभग 16.5 प्रतिशत और कीमत में 15.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखाता है, जब निर्यात 386.2 मिट्रिक टन था और  मूल्य  331.4 मिलियन अमेरिकी डॉलर था। प्राकृतिक स्वीटनर्स की घरेलू मांग भी बढ़ी है। स्वीटनर क्षेत्र में, गुड़ और शहद ने 2021-24 के दौरान 15–20 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज की है। घरेलू बाजारों में गुड़ की बिक्री अगस्त 2024 तक सालाना लगभग 5,000 मीट्रिक टन तक पहुंच गई थी। यह पारंपरिक और प्राकृतिक मीठे उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं की बढ़ती पसंद को दर्शाता है। भारत की गुड़ परंपरा की प्राचीन जड़ें गुड़ को व्यापक रूप से एक स्वदेशी भारतीय उत्पाद माना जाता है। इसका इतिहास गन्ने की खेती और उसके प्रसंस्करण से गहराई से जुड़ा है, जिसकी शुरुआत वैदिक काल से मानी जाती है। गन्ने की खेती का शुरुआती जिक्र भारतीय ग्रंथों में लगभग 1400–1000 ईसा पूर्व के आसपास मिलता है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि गन्ने की शुरुआती पतली किस्में पूर्वोत्तर भारत के नमी वाले इलाकों में विकसित हुईं। समय के साथ, गन्ने की खेती उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में फैल गई, जिससे यह एक महत्वपूर्ण वैश्विक फसल बन गई। "शुगर" शब्द संस्कृत शब्द 'शर्करा' से लिया गया है, जो इस उपमहाद्वीप में मीठा उत्पादन की सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाता है। ऐतिहासिक विवरणों से पता चलता है कि 647 ईस्वी में, एक चीनी प्रतिनिधिमंडल गन्ना प्रसंस्करण तकनीक सीखने के लिए मगध गया था। यह मीठा उत्पादन में भारतीय ज्ञान के शुरुआती प्रसार को दर्शाता है। खेती, प्रसंस्करण और ज्ञान के आदान-प्रदान की इस लंबी परंपरा ने गुड़ उत्पादन में भारत को प्रमुख बनाया। पोषण और जन स्वास्थ्य के लिए गुड़ गुड़ को अब एक 'सुपरफूड' के तौर पर ज्यादा से ज्यादा  पहचाना जा रहा है।  यह रिफाइंड चीनी का एक प्राकृतिक और पोषक तत्वों से भरपूर विकल्प है। गुड़ को गन्ने के गाढ़े रस से, बिना किसी रासायनिक रिफाइनिंग के बनाया जाता है। इसलिए, इसमें वे जरूरी खनिज और सूक्ष्म पोषक तत्व बने रहते हैं, जो आमतौर पर चीनी को साफ करने की प्रक्रिया के दौरान नष्ट हो जाते हैं। भारत में, गन्ने से अलग-अलग उत्पादन विधियों के जरिए गुड़, खांडसारी और चीनी बनाई जाती है। इन तीनों में से, गुड़ को सबसे प्राकृतिक तरीके से बनाया जाता है, और यह पोषक तत्वों के मामले में भी सबसे ज़्यादा समृद्ध है। गुड़ का इस्तेमाल कई तरह के पारंपरिक व्यंजनों में, और साथ ही तरल रूप में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और उपभोक्ताओं के प्राकृतिक मिठास की ओर बढ़ते रुझान के कारण, गुड़ की मांग लगातार बढ़ रही है। अपने पारंपरिक उपयोग के अलावा, गुड़ को अब बेकरी और कन्फेक्शनरी उत्पादों जैसे प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में एक ज्यादा सेहतमंद मीठे के तौर पर भी पहचाना जा रहा है। इस क्षेत्र के लगातार विस्तार के साथ, गन्ने का गुड़, ताड़ का गुड़ और कच्चा गुड़ जैसे गुड़ के अलग-अलग प्रकार बाजार में अपनी जगह तेजी से बना रहे हैं। यह बदलाव प्राकृतिक और कम से कम प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के प्रति उपभोक्ताओं की बदलती पसंद को दिखाता है। गुड़ का पोषण मूल्य गुड़ गन्ने के रस में मौजूद जयादातर पोषक तत्वों को बनाए रखता है, जिससे यह सबसे ज्यादा पोषक तत्वों वाले प्राकृतिक मीठे पदार्थों में से एक बन जाता है। यह कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, फॉस्फोरस, सोडियम, आयरन, जिंक, कॉपर और मैंगनीज जैसे खनिजों को सुरक्षित रखता है, जो सफेद चीनी बनाने की कड़ी रिफाइनिंग प्रक्रिया में नष्ट हो जाते हैं। अच्छी क्वालिटी के गुड़ में आमतौर पर 70 प्रतिशत से ज्यादा सुक्रोज, थोड़ी मात्रा में ग्लूकोज और फ्रक्टोज, और लगभग 5 प्रतिशत खनिज होते हैं, जिसमें नमी की मात्रा कम होती है। आयरन की मात्रा (हर 100 ग्राम में लगभग 10-13 एमजी) हीमोग्लोबिन के स्तर को बेहतर बनाने में मदद करती है, जबकि पोटैशियम और मैग्नीशियम ह्रदय संंबंधी और मांसपेशियों के काम को ठीक रखने में सहायक होते हैं। गुड़ में विटामिन की  बहुत कम मात्रा होती है, जिसमें फोलिक एसिड और बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन, साथ ही विटामिन ए, सी, डी और ई शामिल हैं। ये सूक्ष्म पोषक तत्व गुड़ को एक ऊर्जा से भरपूर भोजन बनाते हैं, जो इन पोषक तत्वों की कमी को दूर करने में मदद कर सकता है। इसमें खनिज लवण की मात्रा रिफाइंड चीनी की तुलना में काफी ज्यादा होती है। यह इसे आहार पूरक के लिए एक उपयुक्त विकल्प बनाता है, खासकर उन आबादी के लिए जो कुपोषण का शिकार हैं। पोषण उपायों में गुड़ को शामिल करना...

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के बहादुर और सतर्क योद्धाओं को ‘ऑपरेशन RAGEPILL’को सफलतापूर्वक...

शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) के सचिव श्री संजय कुमार की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई। इस...

गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (जेम) अपना निगमन दिवस 2026 मना रहा है। यह पारदर्शिता, दक्षता और प्रौद्योगिकी-संचालित शासन के माध्यम से भारत में सार्वजनिक...

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कार्यों की केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने की विस्तृत समीक्षाइंटीग्रेटेड और सस्टेनेबल...

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज सिक्किम के राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर सिक्किम के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं दी।...

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज हेग में भारतीय समुदाय के स्वागत समारोह में हिस्सा लिया। श्री मोदी के आगमन पर...

6628 निर्दिष्ट बांधों के साथ भारत दुनिया भर में बड़े बांधों के मामले में तीसरे स्थान पर है। 26 प्रतिशत से अधिक बांध 50 वर्ष से अधिक पुराने...

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