सितम्बर 22, 2026

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की 97वीं वार्षिक आम बैठक में कृषि क्षेत्र में परिवर्तनकारी सुधार का रोडमैप

मांग-आधारित अनुसंधान किसान, बाजार और उपभोक्ता केंद्रित रखना आवश्यक: केंद्रीय कृषि मंत्री
एकीकृत खेती लघु और सीमांत किसानों की आय में विविधता लाने की कुंजी: शिवराज सिंह चौहान
प्रयोगशाला से खेत तक: प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में तेजी लाने के लिए आईसीएआर-उद्योग के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक: शिवराज सिंह चौहान
आईसीएआर का नया दृष्टिकोण: अधिक संवाद, स्पष्ट प्राथमिकताएं और बेहतर परिणाम: चौहान
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विचार मूल हैं, नवाचार को क्रियान्वयन और प्रभाव में बदलने का आह्वान किया

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-आईसीएआर की 97वीं वार्षिक आम बैठक आयोजित की गई।

चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि क्षेत्र को विकसित किए बिना विकसित भारत का सपना साकार नहीं हो सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को केवल खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने से आगे बढ़कर अब खेत से वैश्विक बाजार तक मजबूत पहचान बनानी होगी। उन्होंने किसानों की आवश्यकताओं, बाजार मांग और उपभोक्ताओं की जरूरतों के अनुरूप मांग-आधारित अनुसंधान प्रणाली का समर्थन किया जिससे किसानों को प्रत्यक्ष और मापन योग्य लाभ मिले।

उन्होंने जोर देकर कहा कि कृषि क्षेत्र में बदलाव के अगले चरण में किसानों की आय में सुधार और छोटे एवं सीमांत किसानों की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने इसके लिए एकीकृत कृषि प्रणालियों के साथ ही गुणवत्तापूर्ण बीजों और रोपण सामग्री की समय पर उपलब्धता, उर्वरक के संतुलित उपयोग, बेहतर मृदा स्वास्थ्य और संवहनीय कृषि पद्धतियों पर बल दिया। (एकीकृत कृषि प्रणाली में फसल उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन, मछली पालन, मुर्गी पालन, बागवानी और मधुमक्खी पालन जैसी सहायक गतिविधियों को एक साथ जोड़ा जाता है। इसमें एक घटक का कचरा या अपशिष्ट दूसरे घटक के लिए संसाधन का काम करता है, जिससे लागत कम होती है और साल भर नियमित आमदनी मिलती है।)

चौहान ने गुणवत्ता, पोषण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, शेल्फ लाइफ (शेल्फ लाइफ वह समय जब तक कोई उत्पाद बिना खराब हुए सुरक्षित और उपयोग के लायक रहता है।) और वैश्विक मानकों के अनुपालन द्वारा भारत की निर्यात क्षमता मजबूत बनाने के महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने अनुसंधान द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों को किसानों तक अधिक तेजी और प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए आईसीएआर-उद्योग के बीच साझेदारी मजबूत बनाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, केवल अनुसंधान ही पर्याप्त नहीं है; बल्कि सही समय पर, सही समस्या का समाधान और किसान तक शीघ्रता से इसके लाभ पहुंचाना ही सफलता का सही पैमाना है।

शिवराज सिंह चौहान ने परिणामोन्मुखी अनुसंधान प्रणाली की आवश्यकता पर जोर देते हुए, वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, किसानों, उद्योग जगत और अन्य हितधारकों के बीच संवाद बढ़ाने और स्पष्ट रूप से अनुसंधान उद्देश्यों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने बल देकर कहा कि नवोन्मेषी विचारों को प्रयोगशालाओं से बाहर निकलकर व्यावहारिक समाधानों में इस्तेमाल होना चाहिए और जमीनी स्तर पर उनका स्पष्ट प्रभाव दिखना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि हमारे कड़े परिश्रम, अनुसंधान और प्रयास भारत की छवि बदल सकते हैं और देश के किसानों की किस्मत बदल सकते हैं।

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में वर्ष 2014 से कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, और अब अगली प्राथमिकता कृषि में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। चौधरी ने दलहन, तिलहन, बीज, पशुधन और मूल्यवर्धित प्रसंस्करण में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन अनुकूल कृषि, मिट्टी के स्वास्थ्य और संवहनीय संसाधन प्रबंधन बढ़ावा देने की चर्चा की। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने के लिए मजबूत किसान उत्पादक संगठनों और उनका बाजार से संपर्क सुदृढ़ बनाने पर भी बल दिया।

चौधरी ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के लाभ किसानों तक पहुंचाने में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और कृषि विज्ञान केंद्र की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर कृषि क्षेत्र वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर और विकसित भारत दृष्टियोजना साकार करने में अतयंत महत्वपूर्ण हैं।

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने खाद्यान्न, बागवानी, डेयरी, मत्स्य पालन, मांस और अंडे सहित कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में भारत की महत्वपूर्ण प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने इसका श्रेय वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिकों, किसानों तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों के सामूहिक प्रयासों को दिया।

बघेल ने हरित क्रांति और श्वेत क्रांति विरासत की चर्चा करते हुए भारत के विश्व के सबसे बड़े दूध उत्पादक देश बनने और मत्स्य उत्पादन एवं निर्यात में उसकी उल्लेखनीय वृद्धि का उल्लेख किया। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ बनाने के लिए कृषि, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन और मुर्गी पालन के अधिक समेकन पर बल दिया।

बैठक में केंद्रीय और राज्य मंत्रियों के साथ ही कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के अन्य हितधारक शामिल हुए। इनमें अरुणाचल प्रदेश के कृषि, पशुपालन एवं पशु चिकित्सा, बागवानी एवं मत्स्य पालन मंत्री गेब्रियल दानवांग वांगसु; असम की पशुपालन एवं पशु चिकित्सा एवं मत्स्य पालन मंत्री नीलिमा देवी; बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा; हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन एवं बागवानी मंत्री श्याम सिंह राणा; जम्मू-कश्मीर के कृषि उत्पादन मंत्री जावेद अहमद डार; मध्य प्रदेश के बागवानी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा; नागालैंड के विधायक एवं कृषि विभाग सलाहकार मेथुथुंग यंथन; पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं दुग्ध उत्पादन मंत्री गुरमीत सिंह खुदियां, सिक्किम के कृषि, पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा, बागवानी एवं मत्स्य पालन मंत्री पूरन कुमार गुरुंग; उत्तराखंड के कृषि एवं बागवानी मंत्री गणेश जोशी; उत्तर प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही; उत्तर प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विकास मंत्री धर्मपाल सिंह; उत्तर प्रदेश के मत्स्य पालन मंत्री संजय निषाद; और पश्चिम बंगाल के कृषि मंत्री दूध कुमार मंडल शामिल हुए।

आईसीएआर महानिदेशक और कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग सचिव डॉ. एमएल जाट ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की प्रमुख उपलब्धियों की चर्चा करते हुए पिछले वर्षों में विज्ञान आधारित, किसान-केंद्रित कृषि क्षेत्र में हुए बदलाव में आईसीएआर की तेज प्रगति का उल्‍लेख किया।

उन्होंने कहा कि खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 19 मिलियन टन की वृद्धि हुई, जबकि बागवानी, दूध और मत्स्य पालन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। डॉ. जाट ने कहा कि  कुल 386 नई फसल किस्में जारी की गईं, जिनमें 94 प्रतिशत जलवायु-प्रतिरोधी और 29 जैव-संवर्धित किस्में शामिल हैं। इससे उत्पादकता, जलवायु-प्रतिरोधकता और पोषण सुरक्षा मजबूत हुई है।

डॉ. जाट ने जीनोमिक्स (विज्ञान की वह शाखा जिसमें किसी जीव के संपूर्ण आनुवंशिक पदार्थ यानी जीनोम/डीएनए का अध्ययन किया जाता है), जीनोम एडिटिंग, पशुधन स्वास्थ्य, मत्स्य पालन, मिट्टी के स्वास्थ्य और प्राकृतिक खेती में हुई प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख किया, जिनसे भारत की कृषि क्षमता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी अफ्रीकन स्वाइन फीवर टीके से सूअरों के स्वास्थ्य और किसानों की आजीविका से संबंधित महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सफलता मिली है।

उन्होंने कहा कि आईसीएआर ने अनुसंधान को जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन और बाजार अवसरों में बदलने की प्रक्रिया भी तेज की है। डॉ. जाट ने बताया कि पिछले वर्ष लगभग 805 आईपी (बौद्धिक संपदा अधिकार) आवेदन दाखिल किए गए, जबकि 36 संस्थानों में प्रौद्योगिकी व्यावसायीकरण को सुदृढ़ बनाया गया। उन्होंने कहा कि कृषि-खाद्य प्रणालियों के राष्ट्रीय जेंडर प्लेटफॉर्म से अब 9,000 से अधिक संस्थानों को जोड़ दिया गया है, जिससे कृषि में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है।

डॉ. जाट ने आईसीएआर की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 भी प्रस्तुत की और इसे अपनाए जाने की प्रस्तावना पढ़ी।

डीएआरई अपर सचिव, और आईसीएआर के वित्तीय सलाहकार संदीप सरकार ने वर्ष 2024-25 के लिए लेखा परीक्षक की रिपोर्ट के साथ वार्षिक खाते प्रस्तुत किए, जिसके बाद उन्हें अपनाने का प्रस्ताव पारित किया गया।

इससे पहले, बैठक के आरंभ में पिछली वार्षिक आम बैठक के बाद आईसीएआर की अनुसंधान प्रगति पर एक प्रस्तुति दी गई, जिसमें कृषि अनुसंधान, नवाचार और विकास में परिषद के योगदान पर प्रकाश डाला गया।

कृषि अनुसंधान और विकास के सहयोगात्मक प्रयासों और संसाधन जुटाने की प्रक्रिया और मजबूत बनाने के लिए आईसीएआर के साथ कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व साझेदारी हेतु उद्योग और सीएसआर दाताओं के साथ एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए।

इस अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के चार प्रकाशन जारी किए गए। बैठक में आईसीएआर सोसायटी के नियमों और उपनियमों में अद्यतन/संशोधन पर भी विचार और उन्हें अपनाने का प्रस्ताव पेश किया गया।

सदस्यों ने कृषि अनुसंधान संबंधी आईसीएआर की उपलब्धियों और अपेक्षाओं पर अपने सुझाव साझा किए। इससे परिषद के अनुसंधान और विकास एजेंडा बेहतर बनाने के लिए बहुमूल्य सुझाव मिले।

बैठक में भाग लेने वाले केंद्रीय और राज्य मंत्रियों ने खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि और कृषि क्षेत्र में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग और मजबूत बनाने और किसानों की समृद्धि और कृषि क्षेत्र के विकास की सामूहिक प्रयास की प्रतिबद्धता दोहरायी।

डीएआरई अपर सचिव और आईसीएआर वित्तीय सलाहकार संदीप सरकार द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ बैठक का समापन, हुआ। इसके बाद समवेत राष्ट्रगान गाया गया।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने वार्षिक आम बैठक में केंद्र और राज्य सरकारों के साथ घनिष्ठ सहयोग से कृषि अनुसंधान, नवाचार और प्रौद्योगिकी-आधारित विकास आगे बढ़ाने की अपनी निरंतर प्रतिबद्धता की पुष्टि की, जिसमें किसानों के कल्याण, खाद्य और पोषण सुरक्षा और स्थिति अनुरूपित, संवहनीय और आत्मनिर्भर कृषि क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित किया गया।

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