राष्ट्रीय शैक्षणिक भंडार (एनएडी)
शिक्षा में डिजिटल शासन को बढ़ावा देना
शैक्षणिक रिकॉर्ड प्रबंधन की मौजूदा स्थिति
भारत की शिक्षा प्रणाली दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे विविध प्रणालियों में से एक है। इसमें लगभग 14.71 लाख स्कूल (2024-25 के आंकड़ों के अनुसार), 1420 विश्वविद्यालय, 53,583 कॉलेज, 16,795 स्वतंत्र शिक्षण संस्थान और 280 शोध एवं अनुसंधान संस्थान शामिल हैं। ये सभी संस्थान मिलकर हर साल लाखों अकादमिक रिकॉर्ड तैयार करते हैं, जिनमें डिग्री, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट, मार्कशीट और मूल्यांकन रिपोर्ट शामिल हैं।
इतनी बड़ी संख्या में कागज़ी अकादमिक रिकॉर्ड को प्रबंधित करने में काफी वक्त लगता है, साथ ही यह प्रक्रिया महंगी और अक्षम भी है। भौतिक दस्तावेज़ों के खोने, खराब होने या उनमें धोखाधड़ी होने का खतरा रहता है, जबकि मानवीय सत्यापन प्रक्रिया के चलते छात्रों, शिक्षण संस्थानों, नियोक्ताओं और अन्य संबंधित लोगों के लिए देरी होती है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 एक अधिक लचीली, सीखने वाले पर केंद्रित और बहु-विषयक शिक्षा प्रणाली की कल्पना करती है। मल्टीपल एंट्री-मल्टीपल एग्जिट (एमईएमई), नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क (एनसीआरएफ) और एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (एबीसी) जैसी पहलों के ज़रिए, एनईपी 2020 सीखने के सरल रास्ते और आजीवन सीखने की सुविधा देती है। जैसे-जैसे छात्र कई संस्थानों और शिक्षा के विभिन्न चरणों में सीखने के परिणाम हासिल करते जा रहे हैं, एक सुरक्षित, इंटरऑपरेबल और आसानी से उपलब्ध अकादमिक रिकॉर्ड प्रणाली बहुत ज़रूरी हो गई है।
इन सुधारों को समर्थन देने के लिए, सरकार ने शैक्षणिक रिकॉर्ड प्रबंधन (एनएडी) शुरू किया, जोकि अकादमिक अवॉर्ड्स को डिजिटल रूप से स्टोर करने, सत्यापित करने, प्रमाणीकरण करने और उन्हें जारी करने की एक देशव्यापी व्यवस्था है। अकादमिक रिकॉर्ड्स को एक सुरक्षित डिजिटल भंडार में रखकर, एनएडी छात्रों को उनके क्रेडेंशियल्स को कभी भी और कहीं भी एक्सेस करने की सुविधा देता है, जिससे उन्हें जारी करने वाले संस्थानों से भौतिक कॉपी लेने की ज़रूरत नहीं पड़ती। यह नियोक्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों और दूसरे संगठनों के लिए सत्यापन को आसान बनाता है और साथ ही प्रमाणित डिजिटल रिकॉर्ड्स के ज़रिए धोखाधड़ी के जोखिम को भी काफी कम करता है।
2020 से एनएडी व्यवस्था को डिजिलॉकर के ज़रिए लागू किया गया है। डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के तहत डिजिलॉकर को 1 जुलाई 2015 को लॉन्च किया गया डिजिलॉकर, अकादमिक प्रमाण पत्र जारी करने और उन तक पहुंचने के लिए एक ऑपरेशनल डिजिटल प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करता है, जिसके तहत एनएडी काम करता है। इस व्यवस्था में एक तीसरा हिस्सा भी है, स्वचालित स्थायी शैक्षणिक खाता रजिस्ट्री (अपार) और एकेडमिक बैंक ऑफ़ क्रेडिट्स (एबीसी), जो छात्रों के क्रेडिट स्कोर को प्रबंधित करते हैं और अकादमिक मोबिलिटी को आसान बनाते हैं। ये तीनों मिलकर सुरक्षित अकादमिक रिकॉर्ड प्रबंधन के लिए एक एकीकृत व्यवस्था बनाते हैं। एनएडी को सरकार की ई-सनद सेवा के साथ भी जोड़ा गया है, जिससे शैक्षणिक और दूसरे आधिकारिक दस्तावेज़ों का इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन, अटेस्टेशन और एपोस्टिल संभव हो पाता है। यह एकीकरण विदेशों में उच्च शिक्षा, नौकरी या दूसरे अवसरों की तलाश कर रहे भारतीय नागरिकों के लिए दस्तावेजों के प्रमाणीकरण को आसान बनाता है।
एनएडी में केंद्रीय, राज्य, निजी, डीम्ड विश्वविद्यालय, सीबीएसई और दूसरे स्कूल बोर्ड, राष्ट्रीय महत्व के संस्थान और उच्च शिक्षा के अन्य संस्थान पंजीकृत होते हैं। इसके हितधारकों में छात्र और अकादमिक पुरस्कार पाने वाले अन्य लोग, अकादमिक संस्थान/बोर्ड/योग्यता जांचने वाली संस्थाएं और बैंक, घरेलू व विदेशी नियोक्ता कंपनियां, सरकारी संस्थाएं जैसी प्रमाणीकरण संस्थाएं शामिल हैं।

एनएडी की शासन संरचना
शिक्षा मंत्रालय एनएडी के लिए जिम्मेदार मुख्य मंत्रालय है। इसने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को डिजिलॉकर के ज़रिए एनएडी को लागू करने के लिए नोडल एजेंसी बनाया है। यह व्यवस्था एक मज़बूत कानूनी और नियामक ढांचे के समर्थन वाले समन्वित शासन ढ़ांचे के ज़रिए काम करती है। शिक्षण संस्थान सत्यापित डिजिटल अकादमिक रिकॉर्ड जारी करते हैं, जिन्हें छात्र सुरक्षित रूप से एक्सेस और साझा कर सकते हैं और अन्य संगठन तेज़ी से और भरोसेमंद तरीके से उनकी जांच कर सकते हैं। सभी डिजिटल जानकारी कानूनी रूप से मान्य होती हैं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के तहत भौतिक दस्तावेज़ों के बराबर ही कानूनी दर्जा रखते हैं।
कानूनी और विनियामक ढांचा
यह प्रणाली एक मजबूत कानूनी आधार पर काम करती है, जिसमें शामिल हैं:
• सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 – यह इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और डिजिटल हस्ताक्षरों को कानूनी मान्यता देता है।
• डिजिटल लॉकर नियम, 2016 – यह सुनिश्चित करता है कि दस्तावेज़ केवल उपयोगकर्ता की स्पष्ट मंज़ूरी से ही साझा किए जाएं।
• नेशनल ई-ऑथेंटिकेशन फ्रेमवर्क (एनईएएफ) – यह सुरक्षित पहचान की पुष्टि और प्रमाणीकरण के तरीके उपलब्ध कराता है।
राष्ट्रीय शैक्षणिक भंडार (एनएडी): प्रक्रिया का तरीका
एनएडी का कामकाज एक व्यवस्थित डिजिटल वर्कफ़्लो के तहत होता है:
•अकादमिक अवॉर्ड बनाना: शिक्षण संस्थान (स्कूल, विश्वविद्यालय, बोर्ड और अन्य अधिकृत संस्थाएं) कोर्स या परीक्षा पूरी होने के बाद अकादमिक अवॉर्ड जैसे डिग्री, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट और मार्कशीट जारी करते हैं।
•डिजीलॉकर/एनएडी पर डिजिटल अपलोड: संस्थान इन सत्यापित अकादमिक रिकॉर्ड्स को डिजीलॉकर प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए सुरक्षित रूप से राष्ट्रीय शैक्षणिक भंडार (एनएडी) में अपलोड या जारी करते हैं।
• डिजीलॉकर के ज़रिए छात्रों को पहुंच: जारी होने के बाद, डिजिटल अकादमिक दस्तावेज़ अपने-आप छात्र के डिजीलॉकर अकाउंट से जुड़ जाते हैं, जहाँ उन्हें कभी भी सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है।
•मंज़ूरी-आधारित शेयरिंग: छात्र अपने अकादमिक रिकॉर्ड्स को नियोक्ता, उच्च शिक्षा संस्थानों या सरकारी एजेंसियों के साथ केवल डिजीलॉकर के ज़रिए स्पष्ट तौर पर मंज़ूरी देने के बाद ही साझा कर सकते हैं।
•अधिकारियों द्वारा सत्यापन: अधिकृत संस्थाएं सीधे एनएडी/डिजीलॉकर के ज़रिए दस्तावेज़ों की वास्तविकता की जांच कर सकती हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि रिकॉर्ड असली हैं और उनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।
•सुरक्षित और स्थायी रखरखाव: सभी रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहते हैं, जिससे भौतिक प्रमाणपत्रों की ज़रूरत कम हो जाती है और खोने, खराब होने या धोखाधड़ी जैसे जोखिम खत्म हो जाते हैं।

यह प्रक्रिया भौतिक दस्तावेज़ीकरण से पूरी तरह डिजिटल अकादमिक रिकॉर्ड व्यवस्था में आसानी से बदलाव सुनिश्चित करती है।
एनएडी के मुख्य फ़ायदे
राष्ट्रीय शैक्षणिक भंडार (एनएडी) एक सुरक्षित, भरोसेमंद और पेपरलेस व्यवस्था प्रदान करता है और डिजिटल अकादमिक जानकारियों तक जीवन भर पहुंच की सुविधा देता है, जिससे छात्र और अकादमिक अवॉर्ड पाने वाले लोग कभी भी और कहीं से भी अपने रिकॉर्ड हासिल कर सकते हैं और उन्हें साझा कर सकते हैं। असली जानकारी के तुरंत सत्यापन की सुविधा देकर, एनएडी पारदर्शिता बढ़ाता है, सेवा व्यवस्था में सुधार करता है और दस्तावेज़ों की धोखाधड़ी का जोखिम कम करता है। यह एडमिशन, भर्ती और क्रेडेंशियल सत्यापन की अन्य प्रक्रियाओं को भी आसान बनाता है। यह व्यवस्था भारत को डिजिटल अकादमिक क्रेडेंशियल प्रबंधन में दुनिया के बेहतरीन तौर-तरीकों के अनुरूप भी बनाता है।

छात्र और अकादमिक अवॉर्ड पाने वाले: वे ज़िंदगी भर अपनी डिजिटल अकादमिक जानकारी को एक्सेस, स्टोर, रिट्रीव और सुरक्षित रूप से शेयर कर सकते हैं।

शैक्षणिक संस्थान और मूल्यांकन निकाय: विश्वविद्यालय, स्कूल बोर्ड, परीक्षा अधिकारी और प्रमाणीकरण से जुड़ी एजेंसियां एनएडी फ़्रेमवर्क के ज़रिए असली डिजिटल अकादमिक रिकॉर्ड और अवॉर्ड जारी करती हैं।

सत्यापन करने वाली संस्थाएं: नियोक्ता, स्कूल और उच्च शिक्षा संस्थान, सरकारी विभाग, बैंक और लाइसेंसिंग अधिकारी तुरंत अकादमिक विवरणों की वास्तविकता की जांच कर सकते हैं, जिससे सत्यापन का समय और प्रशासनिक बोझ कम होता है।

भारत के डिजिटल भविष्य में एनएडी
राष्ट्रीय शैक्षणिक भंडार (एनएडी) शिक्षा के लिए भारत के डिजिटल शासन ढांचे का एक अहम हिस्सा है, जो अकादमिक दस्तावेज़ों के सुरक्षित, मानकीकृत और इंटरऑपरेबल प्रबंधन को संभव बनाता है। सहमति-आधारित पहुंच और जानकारी के रियल-टाइम सत्यापन की सुविधा देकर, यह भौतिक दस्तावेज़ों पर निर्भरता कम करते हुए कार्यक्षमता, पारदर्शिता और भरोसे को बढ़ाता है। डिजीलॉकर व्यवस्था के एक अहम हिस्से के तौर पर, एनएडी एक सुरक्षित, नागरिक-केंद्रित और डिजिटल रूप से सशक्त शिक्षा प्रणाली के भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाता है।