सितम्बर 21, 2026

आईआईटीएम पुणे में अत्याधुनिक इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन, जलवायु उद्यमिता परिवर्तनकारी बदलाव के लिए डबल्यूआईएसई 2026 सम्मेलन आयोजित

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय  के अंतर्गत भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान -आईआईटीएम, पुणे ने आज मौसम और जलवायु क्षेत्र में स्टार्टअप्स के लिए समर्पित इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर नए स्टार्टअप्स और उद्यमियों के लिए एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन, मौसम और जलवायु नवाचार सम्मेलन -ड्ब्ल्यू आई एस ई-2026 आयोजित किया गया जो भारत की मौसम विज्ञान सेवाओं में निजी क्षेत्र के एकीकरण के नए युग का संकेतक है।  

मुख्य अतिथि, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय सचिव डॉ. एम.रविचंद्रन ने इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया। समारोह में विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय उन्नत अध्ययन संस्थान- एनआईएएस के निदेशक और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव डॉ. शैलेश नाइक , आईआईटीएम के निदेशक डॉ. ए सूर्यचंद्र राव और अन्य विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहें। यह इन्क्यूबेशन सेंटर राष्ट्रीय वायुमंडलीय प्रौद्योगिकी उद्यम (एनईएटी) का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय के मिशन मौसम के अंतर्गत महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक-निजी भागीदारी द्वारा प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा देना है।

जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने में सामूहिक कार्रवाई की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्‍लेख करते हुए पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन ने जोर देकर कहा कि जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न आधुनिक मौसम के जटिल स्वरूपों के लिए पारंपरिक अनुसंधान से हटकर समावेशी, बहु-हितधारक पारिस्थितिकी तंत्र की ओर बढ़ना आवश्यक है। उन्होंने रेखांकित किया कि नवगठित मिशन मौसम, उन्नत अवलोकन, कृत्रिम बुद्धिमत्‍ता-आधारित मॉडलिंग और स्थानीय प्रसार को एकीकृत करते हुए, जीवन सुरक्षा के लिए मौसम के प्रति तैयारी और जलवायु-स्मार्ट राष्ट्र के निर्माण की दिशा में मूलभूत कदम है।

उन्‍होंने मूलभूत वैज्ञानिक सिद्धांतों और वैज्ञानिक अनुसंधानों तथा तकनीकों पर आधारित गहन विज्ञान और व्यावहारिक अनुप्रयोग के बीच की खाई को पाटने के महत्व पर जोर दिया। उन्‍होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों के युवा उद्यमी अन्य हितधारकों की आवश्‍यकताओं को बेहतर ढंग से समझते हैं। इसलिए हमें मिलकर काम करने की जरूरत है। उन्‍होंने कहा कि यह सहयोग निश्चित रूप से कई समाधान निकालेगा जो केवल आर्थिक आवश्यकता ही नहीं, बल्कि जीवन और आजीविका बचाने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

  • प्रगति के चार स्तंभ: पृथ्वी विज्ञान सचिव ने पूर्वानुमान में सुधार के लिए अवलोकन, मॉडलिंग, उपयोगकर्ता-विशिष्ट अनुप्रयोग और प्रसार को आवश्यक स्तंभों के रूप में चिन्हित किया।
  • मिशन मौसम: एक पांच वर्षीय परियोजना है जिसका उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों और स्टार्टअप्स को शामिल करते हुए स्वास्थ्य प्रणाली दृष्टिकोण द्वारा मौसम पूर्वानुमान और जलवायु-स्तरीय जानकारियों को व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराना है।
  • कार्रवाई आह्वान: पृथ्वी विज्ञान सचिव ने नवप्रवर्तकों को मंत्रालय के स्वतंत्र रूप से रिमोट सेंसिंग और पुनर्विश्लेषित डाटा सहित उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर कृषि, विमानन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों के लिए लागत प्रभावी, अति स्थानीय समाधान विकसित करने को आमंत्रित किया।

उद्घाटन के बाद एक उच्च स्तरीय पैनल परिचर्चा में मौसम एवं जलवायु विज्ञान में रणनीतिक बदलाव पर विमर्श किया गया। इसमें कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अनुसंधान से आगे बढ़कर व्यावहारिक, स्टार्टअप-आधारित समाधानों की ओर कदम बढ़ाने पर चर्चा हुई। इस आयोजन में मुख्य रूप से यह मान्यता रही कि मौसम संबंधी जानकारी से आर्थिक जानकारी प्राप्त होती है, जिसमें नवप्रवर्तक अत्याधुनिक वायुमंडलीय डेटा को खाद्य सुरक्षा, ग्रिड स्थिरता और शहरी स्थिति अनुरूपन के लिए व्यावहारिक उपायों में परिवर्तित कर रहे हैं। संस्थापकों और शोधकर्ताओं के सहयोग के लिए एक ऊर्जावान वातावरण को बढ़ावा देकर, इस डबल्यूआईएसई कार्यशाला के सत्रों में इस बात पर बल दिया गया कि जलवायु स्थिति अनुरूपन का भविष्य कार्रवाई योग्य पूर्वानुमान और जटिल विज्ञान तथा अंतिम उपयोगकर्ता के बीच की खाई को पाटने की क्षमता पर निर्भर करता है।

इस आयोजन  में मिशन मौसम के क्रियान्वयन को भी बल मिला और एक समग्र दृष्टिकोण पर जोर दिया गया, जिसमें स्टार्टअप भारत के जलवायु अवसंरचना के निर्माण में मूलभूत भूमिका निभाते हैं। राष्ट्रीय मध्यम-श्रेणी मौसम पूर्वानुमान केंद्र एनसीएमआरडब्ल्यूएफ, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, पुणे और विभिन्न आईआईटी जैसे प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा संचालित विषयगत पैनलों में डबल्यूआईएसई 2026 ने एक विविध पारितंत्र प्रदर्शित किया जिसमें अति स्थानीय पूर्वानुमान से लेकर एआई-संचालित स्वास्थ्य हस्तक्षेप तक शामिल हैं – जिनका उद्देश्य जीवन और आजीविका की रक्षा करना है। परिचर्चा के समापन पर, यह संदेश मिला कि जलवायु-तकनीक नवाचार अब कोई विशिष्ट क्षेत्र नहीं, बल्कि मुख्यधारा का व्यावसायिक अवसर और सामाजिक आवश्यकता है, जिसके समावेशी, विस्तार योग्य और प्रभावी बने रहने के लिए गहन अंतःविषयक सहयोग की आवश्यकता है।

डबल्यूआईएसई 2026 के उद्घाटन और स्टार्टअप कार्यक्रम में जलवायु-तकनीक समुदाय के लोगों की काफी संख्या में उपस्थिति रही। इसके उद्घाटन समारोह में कुल 400 लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में 100 प्रतिभागियों (स्टार्टअप कंपनियों के महत्वाकांक्षी संस्थापकों) ने सक्रिय रूप से भागीदारी की, जिनका पूरा ध्यान वैज्ञानिक डेटा को व्यावहारिक, वास्तविक और प्रभावकारी अनुप्रयोगों को बदलने पर केंद्रित रहा।

प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों और मार्गदर्शकों की उपस्थिति से यह सहयोगात्मक पारिस्थितिकी तंत्र और मजबूत हुआ। प्रमुख सहभागी संगठनों में राष्ट्रीय मध्यम श्रेणी मौसम पूर्वानुमान केंद्र, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागरीय अनुसंधान केंद्र शामिल रहे। अकादमिक और अनुसंधान का प्रतिनिधित्व अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान पुणे , दिल्ली, मुंबई और गांधीनगर सहित विभिन्न भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञों ने किया।

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