जून 15, 2026

आयुष मंत्रालय ने बहुभाषी आयुष डिजिटल सेवाओं को मजबूत करने के लिए डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

इस सहयोग का उद्देश्य आयुष के डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेवाओं पर एआई-संचालित बहुभाषी पहुंच को सक्षम बनाना है
भाषिणी प्रौद्योगिकियां आयुष सेवाओं को सभी 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने में सहायता करेंगी

आयुष मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन (डीआईबीडी) के बीच आज एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसका उद्देश्य उन्नत एआई-संचालित भाषा प्रौद्योगिकी के माध्यम से आयुष ज्ञान प्रणालियों का कई भारतीय भाषाओं में तेजी से प्रतिलेखन और अनुवाद सक्षम बनाना है।

“भाषिणी राजयम – एक भाषिणी सहयोगी कार्यक्रम” नामक पहल के तहत, इस साझेदारी का उद्देश्य आयुष मंत्रालय के विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्मों और सेवाओं में भारत के राष्ट्रीय भाषा डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, भाषिणी प्लेटफार्म को एकीकृत करना है।

आयुष मंत्रालय, आयुष ग्रिड पहल के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा, क्षमता निर्माण, अनुसंधान, औषधि प्रशासन और संबंधित क्षेत्रों में काम कर रहा है। आयुष ग्रिड के तहत विकसित कई पोर्टल, एप्लिकेशन और एआई-आधारित समाधानों को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यताप्राप्त सभी 22 अनुसूचित भाषाओं में उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है, ताकि व्यापक पहुंच और उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

इस सहयोग के तहत डिजिटल इंडिया भाषिणी की तकनीकों को आयुष ग्रिड पोर्टल, एप्लिकेशन और एआई टूल सहित आयुष डिजिटल समाधानों में एकीकृत किया जाएगा, ताकि बहुभाषी पहुंच को मजबूत किया जा सके और देश भर में डिजिटल पहुंच का विस्तार किया जा सके। इसके अलावा, आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी से संबंधित स्वास्थ्य और कल्याण संवाद के लिए डोमेन-विशिष्ट बहुभाषी शब्दावली प्रणालियों को विकसित करने, आयुष भाषा डेटासेट को मजबूत करने और प्रासंगिक एआई मॉडल बनाने के लिए भी विशेष प्रयास किए जाएंगे।

आयुष मंत्रालय के निदेशक डॉ. सुबोध कुमार और डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) श्री अमिताभ नाग ने आधिकारिक तौर पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह हस्ताक्षर समारोह आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा और संयुक्त सचिव डॉ. कविता जैन की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।

आयुष ज्ञान को हर भारतीय भाषा में सुलभ बनाने के महत्व पर जोर देते हुए, आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा, “आयुष चिकित्सा प्रणालियों में अपार सभ्यतागत ज्ञान और सांस्कृतिक गहराई समाहित है। यह सुनिश्चित करना कि यह ज्ञान हर भारतीय भाषा में सुलभ हो, समावेशी स्वास्थ्य सेवा वितरण और जन जागरूकता के लिए आवश्यक है। भाषिणी के साथ इस सहयोग के माध्यम से, हमारा उद्देश्य आयुष प्रणाली में बहुभाषी क्षमताओं को मजबूत करना, विशिष्ट क्षेत्र से संबंधित ठोस शब्दावलियां विकसित करना और भविष्य के लिए तैयार एआई प्रणालियां बनाना है जो भाषायी सीमाओं के पार नागरिकों को निर्बाध रूप से सहायता प्रदान कर सकें।”

जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में सुधार लाने में बहुभाषी एआई प्रौद्योगिकियों की परिवर्तनकारी क्षमता पर जोर देते हुए, आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव डॉ. कविता जैन ने कहा, “आयुष मंत्रालय ने पहुंच और सेवा वितरण में सुधार के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाने पर लगातार ध्यान केंद्रित किया है। भाषिणी द्वारा प्रदर्शित बहुभाषी एआई समाधान, विशेष रूप से नुस्खे तैयार करने में सक्षम डॉक्टर-मरीज संवाद प्रणाली, जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत करने में प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी क्षमता को दर्शाते हैं। यह सहयोग अधिक समावेशी और नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) श्री अमिताभ नाग ने कहा, “डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए भाषा-समावेशी एआई सिस्टम महत्वपूर्ण हैं। आयुष मंत्रालय के साथ इस सहयोग के माध्यम से, हमारा लक्ष्य बहुभाषी और वॉइस-इनेबल्ड हेल्थकेयर इकोसिस्टम का निर्माण करना है जो नागरिकों को उनकी पसंदीदा भाषाओं में सहायता प्रदान करने में सक्षम हो और साथ ही भारत के व्यापक डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के विजन को मजबूत करे।”

इस पहल से आयुष डिजिटल प्लेटफॉर्म में भाषिणी अनुवाद एपीआई, वाक् और ध्वनि प्रौद्योगिकियों के एकीकरण में सुविधा मिलेगी, जिससे देश के विभिन्न भाषायी क्षेत्रों में सुलभता और नागरिक सहभागिता में सुधार होगा। चर्चाओं में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए शब्दावली निर्माण और भविष्य में बहुभाषी एआई मॉडल विकसित करने हेतु मानकीकृत आयुष शब्दावलियों के लिए भारत के डिजिटल भंडार, नमस्‍ते पोर्टल का लाभ उठाने के अवसरों पर भी विचार किया गया।

इस संवाद के दौरान, डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन ने डिजिटल समावेशन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कई नागरिक-केंद्रित उपयोग के उदाहरण प्रस्तुत किए। प्रमुख प्रदर्शनों में बहुभाषी वाक् इंटरफेस का उपयोग करके एआई-सक्षम डॉक्टर-मरीज प्रिस्क्रिप्शन जनरेशन सिस्टम, श्रुतलेख के माध्यम से तत्‍क्षण मीटिंग ट्रांसक्रिप्शन और मीटिंग मिनट जनरेशन, श्रमिक वर्ग के रोजगार में सहायता के लिए आवाज-आधारित सीवी निर्माण समाधान और भारत की प्राचीन पांडुलिपि विरासत के डिजिटलीकरण और संरक्षण पर केंद्रित भाषा प्रौद्योगिकी उपकरण शामिल थे।

यह सहयोग आयुष मंत्रालय की देश भर में एक समावेशी, सुलभ और नागरिक-केंद्रित आयुष इकोसिस्‍टम के निर्माण के लिए उभरती डिजिटल प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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