सितम्बर 20, 2026

खेती को नई दिशा देने वाला लखनऊ सम्मेलन, शिवराज सिंह चौहान ने दिया समग्र कृषि विकास का संदेश

टीम इंडिया की भावना से आगे बढ़ेगी कृषि- केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान
किस राज्य में किस दल की सरकार है, यह महत्वपूर्ण नहीं; सभी का लक्ष्य किसानों का कल्याण, खेती की उन्नति और कृषि क्षेत्र की मजबूती हो- शिवराज सिंह
किसान हित के हर मुद्दों पर बनेगी कार्ययोजना, होगी नियमित समीक्षा- शिवराज सिंह चौहान
केंद्र का राज्यों के सहयोग से बीज, मिट्टी, उपज खरीद और किसान कल्याण पर साफ फोकस- श्री चौहान
नकली बीज-खाद पर सख्ती, छोटे किसान की भलाई पर विशेष जोर- शिवराज सिंह चौहान
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज का राज्यों को खुला आमंत्रण, केंद्र करेगा पूरा सहयोग
उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन से निकला समन्वय और विकास का स्पष्ट रोडमैप

लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब खेती-किसानी के मुद्दे केवल बैठकों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन पर समयबद्ध अमल होगा। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने समापन सत्र में साफ कहा कि यह सम्मेलन औपचारिकता नहीं, बल्कि निर्णय, कार्ययोजना, जवाबदेही और किसान-केंद्रित परिणामों का मंच है। श्री शिवराज सिंह ने केंद्र और राज्यों को “टीम इंडिया” की भावना से मिलकर काम करने का आह्वान करते हुए कहा कि किसान हित सर्वोपरि है, और जो मुद्दे सम्मेलन में उठे हैं, उन पर ठोस कार्यवाही कर हर तीन महीने में समीक्षा की जाएगी।

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन ने कृषि, बागवानी और किसान कल्याण के मुद्दों पर एक स्पष्ट, सकारात्मक और परिणामोन्मुख दिशा दी। समापन सत्र में श्री चौहान ने जोर देकर कहा कि यह बैठक किसी प्रकार का कर्मकांड नहीं है, बल्कि इसमें उठे विषयों पर ठोस कार्ययोजना बनाकर समयबद्ध तरीके से अमल किया जाएगा।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय को सम्मेलन का सबसे बड़ा संदेश बताया। उन्होंने कहा कि किस राज्य में किस दल की सरकार है, यह महत्वपूर्ण नहीं है; सभी सरकारों का लक्ष्य किसानों का कल्याण, खेती की उन्नति और कृषि क्षेत्र की मजबूती होना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सम्मेलन में उठाए गए सभी मुद्दों पर कार्ययोजना बनाई जाएगी और उसकी हर तीन महीने में समीक्षा होगी। साथ ही, राज्यों से कहा गया कि वे कृषि और बागवानी से जुड़े अपने मुद्दे, प्रस्ताव और आवश्यकताएँ सीधे केंद्र सरकार के सामने रखें और बैठकों का इंतजार न करें। श्री चौहान ने राज्यों को निर्देश दिया कि केंद्रीय योजनाओं के प्रस्ताव समय पर भेजे जाएँ, ताकि स्वीकृति और पहली किस्त जारी करने में देरी न हो। उन्होंने यह भी कहा कि योजनाओं की राशि समय पर खर्च करना जरूरी है, क्योंकि व्यय की गति का सीधा असर अगली किस्त और भविष्य के बजट पर पड़ता है।
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने अच्छे बीज को बेहतर खेती की बुनियाद बताते हुए कहा कि ब्रीडर सीड, फाउंडेशन सीड और सर्टिफाइड सीड की पूरी श्रृंखला को मजबूत करना होगा। उन्होंने राज्यों से अपेक्षा की कि वे आवंटित ब्रीडर सीड समय पर उठाएँ और नई किस्मों को केवल जारी करने तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें खेत तक पहुँचाने की व्यवस्था भी मजबूत करें।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने संतुलित उर्वरक उपयोग पर विशेष जोर देते हुए कहा कि किसानों को मिट्टी की वास्तविक जरूरत के अनुसार ही खाद उपयोग की सलाह दी जानी चाहिए। उन्होंने सॉइल हेल्थ कार्ड को व्यवहारिक बनाने, जिलेवार मृदा की जानकारी साझा करने और वैज्ञानिक सलाह को किसान तक पहुँचाने की जरूरत बताई। उन्होंने नकली बीज, नकली खाद और घटिया कीटनाशकों के खिलाफ सख्त अभियान चलाने का आह्वान भी किया।
उन्होंने कहा कि उपलब्ध प्रयोगशालाओं का पूरा उपयोग हो, सैंपलों की समयसीमा में जांच हो, और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई प्रभावी ढंग से आगे बढ़े। किसान क्रेडिट कार्ड के मुद्दे पर श्री चौहान ने कहा कि अभी भी बड़ी संख्या में किसान, विशेषकर छोटे किसान, इससे बाहर हैं और उन्हें जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाना चाहिए। उन्होंने दलहन और तिलहन की खेती बढ़ाने के लिए भरोसेमंद खरीद व्यवस्था, पारदर्शिता और सरकारी वादों के अक्षरशः पालन पर भी जोर दिया।
समापन भाषण में उन्होंने यह भी कहा कि फसल विविधीकरण, इंटीग्रेटेड फार्मिंग, नई तकनीक, नई किस्में और उत्पादकता वृद्धि अब आगे की अनिवार्य दिशा हैं। उन्होंने कृषि क्षेत्र में नई कार्य संस्कृति विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा कि लक्ष्य तय हों, रोडमैप बने, जिम्मेदारियाँ स्पष्ट हों और फिर केंद्र-राज्य मिलकर उसे जमीन पर उतारें।
विभिन्न सत्रों में हुई चर्चा
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में किसान क्रेडिट कार्ड, कृषि ऋण, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, डिजिटल कृषि, फार्मर रजिस्ट्री, दलहन आत्मनिर्भरता, तिलहन, बागवानी, बीज, खरीद व्यवस्था, मृदा स्वास्थ्य, डीएसआर, फसल विविधीकरण, प्रसंस्करण, विपणन और आईसीएआर इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम जैसे विषयों पर विस्तार से प्रस्तुतियाँ दी गईं। केंद्र और राज्यों के अधिकारियों ने अलग-अलग विषयों पर प्रेजेंटेशन देकर जमीनी चुनौतियों, उपलब्धियों और आगे की संभावनाओं को सामने रखा। राज्यों ने अपने अनुभव और बेहतर कार्यप्रणालियाँ भी साझा कीं, ताकि एक राज्य की सफल पहल दूसरे राज्यों के लिए उपयोगी मॉडल बन सके। सम्मेलन का फोकस केवल समस्याओं की पहचान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाधान, समन्वय, समयबद्ध क्रियान्वयन और कृषि विकास के साझा रोडमैप पर रहा।
विभिन्न मंत्रियों का संबोधन
सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर और श्री भागीरथ चौधरी के साथ ही उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री श्री सूर्यप्रताप शाही और बागवानी मंत्री श्री दिनेश प्रताप सिंह, कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख, हिमाचल प्रदेश के बागवानी मंत्री श्री जगत सिंह नेगी, पंजाब के  बागवानी मंत्री श्री महेंद्र भगत, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव अतीश चंद्रा तथा आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने संबोधित किया। समापन सत्र में श्री शिवराज सिंह चौहान ने इन सभी की सक्रिय भागीदारी, गंभीर चर्चा और सकारात्मक सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि यही भावना कृषि क्षेत्र को नई ऊँचाई दे सकती है।
सम्मेलन में शामिल राज्यों के मंत्रियों, अधिकारियों, वैज्ञानिकों और संस्थागत प्रतिनिधियों ने अपने-अपने राज्यों की प्राथमिकताओं, चुनौतियों और अपेक्षाओं को रखा। इस पूरे विचार-विमर्श से यह संदेश उभरकर आया कि उत्तर भारत में खेती और बागवानी को नई गति देने के लिए केंद्र और राज्य अब अधिक समन्वित, जवाबदेह और किसान-केंद्रित तरीके से आगे बढ़ेंगे।

Leave a Reply

Copyright © All rights reserved. Newsphere द्धारा AF themes.

Discover more from जन किरण

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading