मार्च 19, 2026

मौजूदा भूराजनीतिक अस्थिरता के बीच भारत को अगले कुछ वर्षों में ड्रोन विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनना होगा: रक्षा मंत्री का राष्ट्रीय रक्षा उद्योग सम्मेलन 2026 में वक्तव्य

“रणनीतिक स्वायत्तता, रक्षा तैयारियों और आत्मनिर्भरता के लिए स्वदेशी ड्रोन उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र आवश्यक है।”
डीआईएससी 14 और अदिति चैलेंजेस 4.0 के अंतर्गत रक्षा बलों, आईसीजी, डीएसए तथा डीपीएसयू के 200 से अधिक समस्या विवरण जारी किए गए
“आईडेक्स के माध्यम से 676 स्टार्ट-अप/एमएसएमई/इनोवेटर रक्षा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में शामिल हुए; 3,853 करोड़ रुपये मूल्य के 58 प्रोटोटाइप को खरीद संबंधी मंजूरी मिली; 2,326 करोड़ रुपये मूल्य के 45 खरीद अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए”
“एमएसएमई आर्थिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं; विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नई तकनीक को अपनाना आवश्यक है” 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “भारत को आने वाले कुछ वर्षों में स्वदेशी ड्रोन निर्माण के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए मिशन मोड में कार्य करना होगा।” उन्होंने वर्तमान भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के परिप्रेक्ष्य में रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित करने, रक्षा तैयारियों को सुदृढ़ बनाने और देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक सशक्त ड्रोन उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र के शीघ्र विकास की आवश्यकता पर बल दिया। वे 19 मार्च, 2026 को मानेकशॉ सेंटर, नई दिल्ली में रक्षा उत्पादन विभाग द्वारा ‘उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकी’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय रक्षा उद्योग सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), स्टार्ट-अप्स, इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडीईएक्स) के विजेताओं, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू), निजी रक्षा कंपनियों, नवोन्मेषकों, नीति-निर्माताओं और शिक्षाविदों की सक्रिय भागीदारी को देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को नई दिशा देने वाला बताया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बल देते हुए कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर ईरान-इज़राइल तनाव तक के वर्तमान वैश्विक संघर्ष यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि ड्रोन और ड्रोन-रोधी तकनीकें भविष्य के युद्धों में निर्णायक भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि ड्रोन निर्माण में आत्मनिर्भरता केवल अंतिम उत्पाद तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसके प्रत्येक घटक—सांचे, सॉफ्टवेयर, इंजन और बैटरी—का निर्माण भी भारत में ही होना आवश्यक है। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह एक चुनौतीपूर्ण लक्ष्य है, क्योंकि वर्तमान में अधिकांश ड्रोन निर्माण करने वाले देश अपने महत्वपूर्ण घटकों के लिए बड़ी मात्रा में आयात विशेष रूप से चीन पर निर्भर हैं। इस संदर्भ में उन्होंने स्वदेशीकरण को राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीकी संप्रभुता और दीर्घकालिक रणनीतिक मजबूती के लिए अनिवार्य बताया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी राष्ट्र का सशक्त रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र बड़े उद्योगों, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), स्टार्टअप्स और नवप्रवर्तकों के सामूहिक योगदान पर आधारित होता है। इसके साथ ही, यह सरकार की स्पष्ट और दूरदर्शी नीतिगत पहलों से भी संचालित होता है, जो देश की विशिष्ट रक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जाती हैं। उन्होंने निजी क्षेत्र से सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है और इस दिशा में हर संभव समर्थन प्रदान करेगी।

उद्घाटन सत्र के अंतर्गत, रक्षा मंत्री ने डिफेंस इंडिया स्टार्ट-अप चैलेंज (डीआईएससी-14) के 14वें संस्करण और आईडेक्स फ्रेमवर्क के तहत अदिति चैलेंज के चौथे संस्करण का शुभारंभ किया। रक्षा बलों, भारतीय तटरक्षक बल और रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी से प्राप्त कुल 107 समस्या विवरण, जिनमें डीआईएससी-14 के अंतर्गत 82 तथा अदिति चैलेंज 4.0 के अंतर्गत 25 शामिल हैं, विभिन्न क्षेत्रों में अभूतपूर्व नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तुत किए गए।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एमएसएमई और स्टार्ट-अप्स में डिज़ाइन-आधारित नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) के माध्यम से 101 नवाचार चुनौतियों वाली एक नई पहल की शुरुआत की। इन चुनौतियों का वित्तपोषण डीपीएसयू द्वारा किया जाएगा, जिसके तहत चयनित स्टार्ट-अप्स को न केवल मेंटरशिप प्रदान की जाएगी, बल्कि उन्नत परीक्षण सुविधाओं तक पहुंच और डीपीएसयू की आपूर्ति श्रृंखलाओं में संभावित एकीकरण के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे। यह पहल रक्षा क्षेत्र में नवाचार, तकनीकी आत्मनिर्भरता और उद्योग-आधारित सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

श्री राजनाथ सिंह ने आईडेक्स और अदिति (आईडेक्स के साथ नवोन्मेषी प्रौद्योगिकियों के विकास में अग्रणी बनें) को गेम-चेंजर पहल बताया, जिसके माध्यम से स्टार्ट-अप, इनोवेटर तथा एमएसएमई को रक्षा बलों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नए समाधान विकसित करने का अवसर प्रदान किया जाता है। फरवरी 2026 तक, 2018 में आईडेक्स की शुरुआत के बाद से लगभग 676 स्टार्टअप, एमएसएमई और व्यक्तिगत नवप्रवर्तक रक्षा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में शामिल हो चुके हैं। 548 अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए हैं और 566 चुनौतियां शुरू की गई हैं। इनमें से 58 प्रोटोटाइप को खरीद के लिए मंजूरी मिल चुकी है, जिनका मूल्य लगभग 3,853 करोड़ रुपये है। इसके अलावा, लगभग 2,326 करोड़ रुपये के 45 खरीद अनुबंधों पर पहले ही हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा, “ये आंकड़े दर्शाते हैं कि नवाचार धीरे-धीरे मूर्त उत्पादों एवं प्रौद्योगिकियों में तब्दील हो रहा है और इस परिवर्तन में हमारे स्टार्ट-अप तथा एमएसएमई द्वारा निभाई गई भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।“

रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, स्वचालन और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं, जो एक अभूतपूर्व व सकारात्मक परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने एमएसएमई और स्टार्टअप्स के लिए इन प्रौद्योगिकियों को अपनाना एवं एकीकृत करना अनिवार्य बताया ताकि वे अपने संसाधनों तथा क्षमताओं का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित कर सकें। उन्होंने कहा, “आज के परिदृश्य में, स्वचालन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसे नवाचार वैश्विक विनिर्माण क्षेत्र को नया आकार दे रहे हैं। इसके अलावा, ‘डिजिटल ट्विन’ और उन्नत सिमुलेशन टूल जैसी प्रौद्योगिकियां कई नई संभावनाओं के द्वार खोल रही हैं। ‘डिजिटल ट्विन’ में मूल रूप से वास्तविक दुनिया की प्रणाली का एक आभासी मॉडल बनाना शामिल है। ऐसी प्रौद्योगिकियां हमें जटिल प्रणालियों को बेहतर ढंग से समझने और अधिक जानकारीपूर्ण निर्णय लेने में सक्षम बनाती हैं।”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि एमएसएमई की क्षमताओं को सुदृढ़ करने में ‘एकीकरण’ एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवधारणा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एकीकरण दो प्रमुख रूपों—क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर—में संभव है। रक्षा मंत्री ने बताया कि क्षैतिज एकीकरण का तात्पर्य विभिन्न क्षेत्रों के एमएसएमई के बीच आपसी जुड़ाव, अनुभवों के आदान-प्रदान और सहयोग से है, जिससे सामूहिक क्षमता का विकास होता है। वहीं, ऊर्ध्वाधर एकीकरण का अर्थ है एमएसएमई का बड़े उद्योगों के साथ साझेदारी करना, उभरते तकनीकी क्षेत्रों में भागीदारी बढ़ाना और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन, रोबोटिक्स तथा एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करना। श्री सिंह ने एमएसएमई से आह्वान किया कि वे इंडस्ट्री 4.0 की दिशा में तेजी से अग्रसर हों। उनके अनुसार, जब क्षैतिज एवं ऊर्ध्वाधर—दोनों प्रकार के एकीकरण साथ-साथ आगे बढ़ते हैं, तभी एक सशक्त और टिकाऊ नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण संभव होता है।

रक्षा मंत्री ने लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सशक्त बनाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए अनेक कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस वर्ष के केंद्रीय बजट में एमएसएमई को इक्विटी, तरलता और व्यावसायिक सहायता प्रदान करने के लिए त्रिस्तरीय दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिससे वे ‘चैंपियन एमएसएमई’ के रूप में उभर सकें। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य एमएसएमई के विकास को गति देना और घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्ष 2014 से सरकार ने इस “अत्यंत महत्वपूर्ण” क्षेत्र के विस्तार को निरंतर प्राथमिकता दी है और इसे सुदृढ़ करने के लिए ठोस प्रयास किए हैं। उन्होंने बताया कि लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के पंजीकरण और पहचान की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ‘उद्यम पोर्टल’ और ‘उद्यम असिस्ट पोर्टल’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा, “इन पहलों का उद्देश्य लघु उद्योगों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में एकीकृत करना है, ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ मिल सके।” आंकड़ों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2012-13 में देश में एमएसएमई की संख्या लगभग 4.67 करोड़ थी, जो हाल के वर्षों में बढ़कर लगभग 8 करोड़ हो गई है। उनके अनुसार, यह उल्लेखनीय वृद्धि देश में बढ़ती उद्यमिता की भावना का परिचायक है और यह दर्शाती है कि लघु उद्योग अब आर्थिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एमएसएमई और स्टार्ट-अप्स से आग्रह किया कि वे पूरे जोश एवं उत्साह के साथ आगे बढ़ें, नवाचार को अपनाएं तथा नई तकनीकों के माध्यम से ‘आत्मनिर्भर भारत’ व ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने बताया कि स्टार्ट-अप्स अपने अभिनव विचारों के जरिए सामाजिक परिवर्तन के सशक्त उत्प्रेरक बन रहे हैं, वहीं कई उद्यम अत्यंत कम समय में ‘यूनिकॉर्न’ का प्रतिष्ठित दर्जा भी प्राप्त कर रहे हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में और भी अनेक स्टार्ट-अप्स ‘यूनिकॉर्न’ की नई पीढ़ी के रूप में उभरेंगे। इसके लिए निरंतर प्रयास, दृढ़ संकल्प और अटूट समर्पण अत्यंत आवश्यक है।

इस अवसर पर रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने बताया कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहित करना तथा उत्पादन प्रणाली के साथ-साथ डिजाइन, विकास और विनिर्माण से लेकर संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) का प्रभावी एकीकरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने आगे कहा कि 200 ‘समस्या विवरण’ एमएसएमई, उद्योगों, स्टार्टअप्स और युवा नवोन्मेषकों को अत्याधुनिक उत्पादों के डिजाइन और विकास में भागीदारी का अवसर प्रदान करेंगे। यह पहल न केवल नवाचार को बढ़ावा देगी, बल्कि प्रतिभागियों के कौशल विकास और आत्मनिर्भर रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

रक्षा मंत्रालय के सचिव ने ‘2025–सुधार वर्ष’ के दौरान घरेलू रक्षा उद्योग को सशक्त और प्रोत्साहित करने के लिए मंत्रालय द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों का विस्तृत उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि रक्षा विकास कार्यक्रम (डीडीपी) के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए गए हैं। इनमें स्वीकृतियों और अनुमतियों की प्रक्रियाओं का युक्तिकरण एवं सरलीकरण, गुणवत्ता प्रक्रियाओं को अधिक सुदृढ़ बनाना तथा परीक्षण प्रयोगशालाओं को रक्षा उपक्रमों व रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के अधीन लाना शामिल है। इसके साथ ही, रक्षा क्षेत्र में कार्यरत उद्योगों को एकीकृत करने के उद्देश्य से ‘सृजन दीप’ नामक एक डिजिटल डेटाबेस विकसित किया गया है। इस प्लेटफॉर्म पर 40,000 से अधिक उद्योगों को सूचीबद्ध किया गया है, जिससे अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) संसाधनों के विस्तार और उद्योगों के बीच समन्वय को बढ़ावा मिल सके।

इस कार्यक्रम के दौरान, रक्षा मंत्री ने रक्षा उत्पादन विभाग के 5 प्रकाशनों का भी विमोचन किया, जिनका उद्देश्य नीतिगत पहलों के बारे में जागरूकता बढ़ाना, रक्षा निर्यात को बढ़ावा देना और उद्योग से जुड़े हितधारकों के लिए व्यापार करने में आसानी प्रदान करना है। ये प्रकाशन इस प्रकार हैं:

समर्थ्य 2026 – रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर एक यात्रा: रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता को बढ़ाने के लिए रोडमैप और प्रमुख पहलों की रूपरेखा प्रस्तुत करने वाला एक दस्तावेज।

भारतीय रक्षा उद्योग – वैश्विक स्तर पर विस्तार: यह रिपोर्ट भारत के बढ़ते रक्षा निर्यात और वैश्विक बाजार में भारतीय कंपनियों के लिए मौजूद अवसरों पर प्रकाश डालती है।

संकलन: रक्षा कंपनियों और लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के सामान्य प्रश्नों के उत्तर प्रदान करने वाली एक उपयोगी मार्गदर्शिका।

रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) के पारिस्थितिकी तंत्र में एमएसएमई को एकीकृत करने के लिए सक्षम प्रावधान: एमएसएमई को डीपीएसयू पारिस्थितिकी तंत्र में एकीकृत करने के लिए नए उपायों की रूपरेखा प्रस्तुत करने वाली एक पुस्तिका।

एआई परिपक्वता मूल्यांकन मॉडल: एक ऐसा ढांचा जो रक्षा संगठनों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रौद्योगिकियों को अपनाने के आकलन और सुधार में मदद करता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अवसर पर एक प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया, जिसमें 20 प्रमुख रक्षा कंपनियों ने अपने स्टॉल स्थापित कर लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को भागीदार, आपूर्तिकर्ता और नवप्रवर्तक के रूप में जोड़ने हेतु अपनी गतिविधियों तथा कार्यक्रमों का प्रदर्शन किया। इसके अतिरिक्त, 24 भारतीय एवं विदेशी कंपनियां भी प्रदर्शनी में सहभागी बनीं, जिन्होंने स्वचालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग व स्मार्ट मैटेरियल्स जैसी उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन कर रक्षा उत्पादन क्षेत्र में नवाचार और तकनीकी प्रगति की झलक प्रस्तुत की।

इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, सेना अध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी कामत तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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