अप्रैल 27, 2026

केंद्रीय जल आयोग कल नई दिल्ली में बाढ़ के पूर्वानुमान और बाढ़ प्रबंधन संबंधी डीपीआर पर हितधारकों की एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन करेगा

भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग के अंतर्गत आने वाला केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) 9 फरवरी 2026 (सुबह 10 बजे से शाम 5.30 बजे तक) को सीडब्ल्यूसी पुस्तकालय भवन, आरके पुरम, नई दिल्ली स्थित सभागार में बाढ़ पूर्वानुमान सेवाओं और बाढ़ प्रबंधन डीपीआर की तैयारी एवं मूल्यांकन के लिए दिशानिर्देशों पर एक दिवसीय हितधारक कार्यशाला का आयोजन कर रहा है।

जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग के सचिव श्री वीएल कांता राव, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष श्री अनुपम प्रसाद, केंद्रीय जल आयोग के सदस्यों और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर सुबह 10:00 बजे से शुरू होने वाली कार्यशाला का उद्घाटन करेंगे।

कार्यशाला के दौरान, सभी हितधारकों के साथ सीडब्ल्यूसी की मौजूदा सेवाओं और नई पहलों को साझा करने और बाढ़ के पूर्वानुमान, तैयारी और बाढ़ प्रबंधन योजना में केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने के लिए उनके फीडबैक प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। साथ ही, विभिन्न संबंधित केंद्रीय संगठनों के सहयोग से राज्य सरकारों द्वारा सीडब्ल्यूसी की पूर्वानुमान और निर्णय-सहायता सेवाओं के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। बाढ़ प्रभावित राज्य सरकारों को बाढ़ की पूर्वानुमान गतिविधियों में अपनी पहलों और सीडब्ल्यूसी सेवाओं के साथ तालमेल बनाने के विकल्पों को साझा करने का अवसर दिया जाएगा।

सुबह के तकनीकी सत्रों में सीडब्ल्यूसी की बाढ़ की पूर्वानुमान क्षमताओं के बारे में बताया जाएगा। इनमें अल्पकालिक और सात दिवसीय परामर्श पूर्वानुमान, जलमग्नता पूर्वानुमान, एकीकृत जलाशय संचालन सहायता, जीएलओएफ निगरानी और एआई/एमएल अनुप्रयोगों जैसी नई पहलें, आईएमडी से विस्तारित अवधि के वर्षा पूर्वानुमानों का उपयोग और अचानक बाढ़ पूर्वानुमान शामिल हैं। राज्य सरकारें बाढ़ के पूर्वानुमान और सीडब्ल्यूसी के साथ समन्वय में अपने अनुभव और पहलों को साझा करेंगी।

दोपहर के सत्र में बाढ़ प्रबंधन और कटाव रोधी कार्यों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने, प्रस्तुत करने और मूल्यांकन के दिशा-निर्देशों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जिसमें परियोजना की गुणवत्ता में सुधार और समय पर मूल्यांकन पर जोर दिया जाएगा। राज्यों से प्राप्त फीडबैक से दिशा-निर्देशों को संशोधित करने में सहायता मिलेगी।

कार्यशाला का समापन सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष की अध्यक्षता में एक सत्र के साथ होगा, जिसमें मुख्य निष्कर्षों और आगे के मार्ग की रूपरेखा प्रस्तुत की जाएगी।

सरकार के आपदा से निपटने की क्षमता और जलवायु-अनुकूल जल प्रबंधन पर केंद्रित दृष्टिकोण के अनुरूप, इस कार्यशाला से बाढ़ की तैयारियों में सुधार, बेहतर गुणवत्ता वाले बाढ़ प्रबंधन प्रस्तावों और मजबूत संस्थागत समन्वय में योगदान मिलने की उम्मीद है।

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