मार्च 7, 2026

विकसित भारत@ 2047 के लिए विश्व-स्तरीय सड़क और परिवहन अवसंरचना के निर्माण के लिए सरकार प्रतिबद्ध: केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा

राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क वर्ष 2014 में 91 हजार किलोमीटर से बढ़कर आज 1.46 लाख किलोमीटर से अधिक हो गया है, जिससे यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क बन गया है – राज्य मंत्री

कॉरपोरेट मामले तथा सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने आज दिल्ली में सड़क एवं राजमार्ग शिखर सम्मेलन को संबोधित किया।

मंत्री महोदय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय एक विश्व-स्तरीय सड़क और परिवहन अवसंरचना का निर्माण करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो लोगों को जोड़ेगा, आर्थिक विकास को गति देगा और सभी के लिए सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करेगा।

मल्होत्रा ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के विजन को वास्तविकता में बदलने के लिए अथक प्रयास किया है – शहरों को जोड़ना, समुदायों को सशक्त बनाना और राजमार्ग निर्माण की अभूतपूर्व गति और पैमाने के माध्यम से विकास को गति देना।

मल्होत्रा ने कहा कि ये आधुनिक राजमार्ग सिर्फ सड़कें नहीं हैं, ये प्रगति की जीवन रेखाएं हैं, जो लोगों, उद्योगों और अवसरों को जोड़ती हैं और नेटवर्क का विस्तार करके सरकार ने यात्रा के अनुभव को पुनः परिभाषित किया है – जिससे यह प्रत्येक नागरिक के लिए अधिक तीव्र, सुरक्षित और अधिक आरामदायक बन गई है।

मल्होत्रा ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क वर्ष 2014 में 91 हजार किलोमीटर से बढ़कर आज 1.46 लाख किलोमीटर से अधिक हो गया है, जिससे यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क बन गया है।

मंत्री महोदय ने कहा कि वर्ष 2013-14 और वर्ष 2024-25 के बीच सड़क की बुनियादी ढांचे पर सरकार का खर्च 6.4 गुना बढ़ गया है और सड़क परिवहन और राजमार्गों के लिए बजट आवंटन में वर्ष 2014 से वर्ष 2023-24 तक 57 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है, जो सम्पर्क, गतिशीलता और आर्थिक विकास के लिए सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मंत्री महोदय ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में सड़क अवसंरचना ने 45 करोड़ मानव दिवस प्रत्यक्ष रोजगार, 57 करोड़ मानव दिवस अप्रत्यक्ष रोजगार तथा 532 करोड़ मानव दिवस प्रेरित रोजगार सृजित किए हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार सृजन पर अवसंरचना परियोजनाओं के महत्वपूर्ण प्रभाव को दर्शाता है।

मल्होत्रा ने यह भी कहा कि पिछले दशक के दौरान पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) में 10 हजार किलोमीटर से अधिक राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) का निर्माण किया गया है, जो इस क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मल्होत्रा ने दिल्ली डीकंजेशन प्लान का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य शहर में यातायात की भीड़भाड़ और प्रदूषण को कम करना और शहर में सम्पर्क में सुधार करना है। इस योजना में दिल्ली और हरियाणा में केएमपीई से यूईआर-II (एनएच-344एम) तक दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे (एनई-5) का विस्तार, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में अलीपुर के पास यूईआर-II (एनएच-344एम) का ट्रोनिका सिटी के पास दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे (एनएच-709बी) तक विस्तार, द्वारका एक्सप्रेसवे (शिव मूर्ति महिपालपुर के पास) से नेल्सन मंडेला मार्ग, वसंत कुंज तक एक सड़क सुरंग का निर्माण शामिल है।

मंत्री महोदय ने कहा कि मंत्रालय वर्ष 2028-29 तक 700 से अधिक वेसाइड सुविधाएं (डब्ल्यूएसए) विकसित करने की प्रक्रिया में है, जिनमें स्वच्छ शौचालय, गुणवत्तापूर्ण भोजन, विश्राम क्षेत्र, ईंधन स्टेशन और ईवी चार्जिंग पॉइंट उपलब्ध होंगे।

मल्होत्रा ने कहा कि मंत्रालय ने सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और बताया कि 14 हजार दुर्घटना संभावित ब्लैकस्पॉट्स को ठीक किया गया है। उन्होंने गुड समैरिटन स्कीम और कैशलेस गोल्डन ऑवर स्कीम जैसी योजनाओं के सफल कार्यान्वयन की भी सराहना की।

मल्होत्रा ने कहा कि हरित राजमार्ग नीति और ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी पहलों के साथ मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर 4.78 करोड़ से अधिक पेड़ लगाए हैं और लगभग 70 हजार पेड़ों को प्रत्यारोपित किया है।

मंत्री महोदय ने बताया कि मंत्रालय ने यूईआर-II और अहमदाबाद-धोलेरा एक्सप्रेसवे जैसी प्रमुख परियोजनाओं में 80 लाख टन से अधिक प्लास्टिक कचरे के उपयोग सहित सतत निर्माण पद्धतियों को भी अपनाया है। इसके अतिरिक्त, ताप विद्युत संयंत्रों से निकलने वाली फ्लाई ऐश को राजमार्ग निर्माण में शामिल किया जा रहा है, जिससे कच्चे माल की आवश्यकता कम हो रही है और उत्सर्जन में कमी आ रही है।

अंत में मल्होत्रा ने कहा कि विकसित भारत@ 2047 के विजन को प्राप्त करने के लिए अधिक राजमार्गों का निर्माण महत्वपूर्ण है। राजमार्ग विकास में निवेश किया गया प्रत्येक रुपया सकल घरेलू उत्पाद में तीन गुना रिटर्न देता है, रोजगार के व्यापक अवसर खोलता है और राजस्व सृजन के लिए कई चैनल खोलता है और सरकार केवल सड़कें नहीं बना रही है – यह एक समृद्ध, शांतिपूर्ण और लचीले भारत की नींव रख रही है।

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