मार्च 9, 2026

प्राकृतिक खेती से आर्थिक समृद्धि की राह पर पांगी घाटी के 1600 किसान

प्राकृतिक खेती उप-मंडल बनने से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था होगी मज़बूत

कृषि हिमाचल की अर्थव्यवस्था का मुख्य स्तम्भ है। कृषि व अन्य सम्बद्ध क्षेत्रों के सुदृढ़ीकरण से प्रदेश सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत बनाने को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है। इस दिशा में राज्य में प्राकृतिक खेती पद्धति को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस पद्धति को बढ़ावा देने का मुख्य उद्देश्य खेती में आने वाली लागत और अन्य संसाधनों पर निर्भरता कम करना तथा किसानों की आमदनी में वृद्धि करना है।
हिमाचल के दूर-दराज चम्बा जिला की मनोरम पांगी घाटी के किसानों ने प्राकृतिक खेती की सफल मिसाल पेश की है। हिमाचल के मानचित्र में पांगी घाटी का पुंटो गांव प्राकृतिक खेती के लिए आदर्श गांव के रूप में उभर रहा है। पुंटो गांव के कुल 62 किसान परिवारों में से 50 परिवार सफलतापूर्वक प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। इस गांव को प्राकृतिक खेती के आदर्श गांव के रूप में उभारने में यहां की प्रगतिशील महिला किसान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहीं हैं। गांव की कृषक स्वयं सहायता समूह की महिलाएं प्राकृतिक खेती से राजमाह, आलू, जौ, बकव्हीट, प्रोसोमिलट और सेब आदि फसलें तैयार कर रही हैं। कृषक स्वयं सहायता समूह की 23 महिलाएं गांव की 25 हैक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक विधि से खेती कर रही हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए विभिन्न प्रोत्साहन प्रदान करने के साथ-साथ प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। प्रगतिशील महिला किसानों को प्रदेश सरकार द्वारा पौधों से संबंधित बीमारियों के लिए प्राकृतिक विधि द्वारा तैयार किए गए लेप, जीवामृत, घनजीवामृत और अग्निशस्त्र की भी जानकारी दी गई है। इस जानकारी का लाभ उठाकर वे उत्तम खेती के लिए फसलों में इनका छिड़काव करती हैं। इनके उपयोग से उनकी फसलों में आश्चर्यजनक वृद्धि हुई हैं। शून्य बजट की खेती को अपनाकर आज प्रगतिशील महिला किसानों को सौ फीसदी मुनाफा मिल रहा है।
जनजातीय पांगी घाटी की भौगोलिक परिस्थितियों के फलस्वरूप क्षेत्र के किसान वर्ष भर में एक ही फसल उगा पाते हैं। इस स्थिति में प्राकृतिक खेती उनके लिए लाभदायी साबित हुई है। क्षेत्र की 19 पंचायतों में प्राकृतिक खेती के एक-एक मॉडल गांव बनकर उभरे हैं। पांगी क्षेत्र के 1600 किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। पुंटो गांव की तरह ही क्षेत्र के हिल्लू टवान गांव के 42 में से 32 किसान परिवार सफलतापूर्वक प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।
क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अपने पांगी प्रवास के दौरान पांगी को हिमाचल का पहला प्राकृतिक खेती उपमंडल बनाने की घोषणा की। इसके लिए 5 करोड़ रुपये का रिवॉलविंग फंड प्रदान किया जाएगा। क्षेत्र के किसानों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से प्राकृतिक रूप से उगाए गए जौ को 60 रुपये प्रति किलोग्राम के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा।
मुख्यमंत्री और प्रदेश सरकार के इन प्रयासों के फलस्वरूप वर्तमान में प्रदेश के किसान प्राकृतिक खेती को अपनाकर आर्थिक समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं।

Leave a Reply

Copyright © All rights reserved. Newsphere द्धारा AF themes.

Discover more from जन किरण

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading