मार्च 18, 2026

​​​​​​​विश्व क्षय रोग (टीबी) दिवस – 2025; टीबी मुक्त भारत की ओर

“टीबी के मामलों में कमी, भारत के समर्पित और अभिनव प्रयासों का परिणाम है। सामूहिक भावना के ज़रिए, हम टीबी मुक्त भारत की दिशा में काम करते रहेंगे।”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी [1]

विश्व क्षय रोग (टीबी) दिवस हर साल 24 मार्च को मनाया जाता है, ताकि दुनिया की सबसे घातक संक्रामक बीमारी टीबी को खत्म करने की ज़रुरत के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके। यह दिन 1882 में डॉ. रॉबर्ट कोच द्वारा टीबी की बीमारी पैदा करने वाले जीवाणु की खोज का प्रतीक है। भारत 1982 से वैश्विक समुदाय के साथ इस दिन को मनाता आ रहा है। अब तक हुई काफी प्रगति के बावजूद, टीबी अभी भी लाखों लोगों की ज़िंदगियों को प्रभावित कर रहा है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियाँ पैदा हो रही हैं।[3] इस वर्ष की थीम, “हाँ! हम टीबी को खत्म कर सकते हैं: प्रतिबद्धतानिवेशपरिणाम”, सशक्त प्रतिबद्धताओं और कार्रवाई के महत्व पर प्रकाश डालती है, खासकर बढ़ती दवा प्रतिरोधी टीबी के खिलाफ।[4]

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2025 तक टीबी को खत्म करने का भारत का लक्ष्य दुनिया के सबसे महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य मिशनों में से एक है। राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत, भारत ने उन्नत निदान, नवीन नीतियों, निजी क्षेत्र की भागीदारी और रोगी-प्रथम दृष्टिकोण के साथ, टीबी के प्रति अपने उपायों को मजबूत किया है। इसके तहत प्रमुख कारकों में रिकॉर्ड-उच्च केस रिपोर्टिंग, बेहतर निदान, रोगियों के लिए वित्तीय सहायता और मजबूत बहु-क्षेत्रीय सहयोग शामिल हैं। हालाँकि, वैश्विक टीबी फंडिंग में कमी और प्राथमिकताओं में बदलाव के चलते, भारत के 2025 के लक्ष्य और 2030 तक टीबी को खत्म करने के संयुक्त राष्ट्र के लक्ष्य को पूरा करने के लिए निरंतर प्रतिबद्धता बेहद ज़रुरी है।

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वैश्विक प्रयासों के बावजूद, टीबी दुनिया भर में एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है, जिसका सबसे ज़्यादा बोझ भारत पर है। वैश्विक और राष्ट्रीय दोनों अनुमानों को समझना, इस बीमारी के पैमाने और भारत में इसके उन्मूलन मिशन की तात्कालिकता को मापने के लिए बेहद ज़रुरी है।

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टीबी उन्मूलन के लिए भारत सरकार द्वारा की गई प्रमुख पहल

इस चिंताजनक समस्या से निपटने के लिए, भारत सरकार ने अपने राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत कई केंद्रित रणनीतियों को लागू किया है। एनटीईपी के तहत इन प्रमुख पहलों का मकसद निदान, उपचार और रोकथाम के प्रयासों को मजबूत करना है, ताकि टीबी मुक्त भारत की दिशा में प्रगति में तेज़ी आ सके।

राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP)[7]

2020 में, भारत सरकार ने संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम (आरएनटीसीपी) का नाम बदलकर राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) कर दिया। यह कदम 2030 के वैश्विक लक्ष्य से पाँच साल पहले, 2025 तक क्षय रोग (टीबीको खत्म करने के भारत के लक्ष्य को दर्शाता है। टीबी उन्मूलन के लिए प्रमुख लक्ष्य इस प्रकार हैं:

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एनटीईपी राष्ट्रीय रणनीतिक योजना (2017-2025) का अनुसरण करता है, जिसमें चार प्रमुख कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया है:

भारत में टीबी को नियंत्रित करने और उसे समाप्त करने के लिए पता लगाना – उपचार करना – रोकना – निर्माण करना (डीटीपीबी)

उद्देश्य [8]

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एनटीईपी कार्यक्रम की उपलब्धियाँ [9]

एनटीईपी 2025 तक टीबी को खत्म करने की दिशा में मजबूत कदम उठा रहा है। इसकी प्रमुख उपलब्धियाँ इस प्रकार हैं:

  • इस कार्यक्रम के तहत 2023 में 25.5 लाख टीबी मामलों और 2024 में 26.07 लाख मामलों की रिपोर्ट करते हुए अब तक के सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए।
  • पहला स्वदेशी टीबी बोझ मॉडल: राज्यवार टीबी अनुमानों के लिए भारत का अपना गणितीय मॉडल। [10]
  • आशाटीबी चैंपियन और देखभाल करने वालों के लिए प्रोत्साहन: रोगी सहायता प्रणालियों को मजबूत करना।
  • घर-घर जाकर जांच के माध्यम से 3 लाख अतिरिक्त मामले पाए गए: उच्च जोखिम वाले समूहों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
  • मेडिकल कॉलेज टास्क फोर्स सक्रिय: 560 कॉलेज कर रहे हैं टीबी का पता लगाने और अनुसंधान का समर्थन।
  • उप-राष्ट्रीय रोग-मुक्त प्रमाणन लागू किया गया: नियमित सर्वेक्षण, दवा बिक्री ट्रैकिंग और अंडर-रिपोर्टिंग आकलन।
  • मजबूत बहु-क्षेत्रीय भागीदारी: मंत्रालयों, उद्योगों, गैर सरकारी संगठनों और तकनीकी निकायों के साथ सहयोग।

डब्ल्यूएचओ की वैश्विक टीबी रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने तपेदिक से लड़ने में अहम कामयाबी हासिल की है। राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत, टीबी के मामलों की घटना दर में लगभग 17.7% की गिरावट आई है, जो 2015 में प्रति 1 लाख लोगों पर 237 मामलों से घटकर 2023 में 195 हो गई है। इसी अवधि के दौरान टीबी से संबंधित मौतों में भी कमी आई है, जो 28 से घटकर 22 प्रति 1 लाख लोगों पर आ गई है।

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इसकी प्रमुख उपलब्धियों में से एक यह है कि टीबी के ना पता लग पाने वाले मामलों की संख्या 2015 में 15 लाख से घटकर 2023 में 83% की कमी के साथ 2.5 लाख रह गई है।

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एनटीईपी के तहत, भारत ने बेहतर दवा प्रतिरोधी टीबी उपचार शुरू किए हैं, जिसमें सुरक्षित, कम समय तक चलने वाला ऑल-ओरल बेडाक्विलाइन रेजिमेन शामिल है, जिससे सफलता दर 68% (2020) से बढ़कर 75% (2022) हो गई है। एमबीपीएएल रेजिमेन (बेडाक्विलाइनप्रीटोमैनिडलाइनज़ोलिडएमडीआर-टीबी के लिए 80% सफलता प्रदान करता है, जिससे उपचार छह महीने तक कम हो जाता है।

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एनटीईपी कार्यक्रम के प्रमुख घटक

प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान( पीएमटीबीएमबीए) [12]

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प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान (पीएमटीबीएमबीए), एनटीईपी के घटकों में से एक है, जिसका मकसद टीबी रोगियों और उनके परिवारों का समर्थन करने के लिए समुदायों, व्यवसायों और संस्थानों को एकजुट करना है। यह उपचार के परिणामों को बेहतर बनाने, बीमारी और मौतों को कम करने और भारत के टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को तेजी से हासिल करने के लिए पोषणनैदानिक ​​और व्यावसायिक सहायता प्रदान करने पर केंद्रित है। पीएमटीबीएमबीए को टीबी रोगियों को पोषण संबंधी सहायता के लिए दुनिया की सबसे बड़ी क्राउड-सोर्सिंग पहल के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।

मुख्य लक्ष्यों में शामिल हैं:

  • टीबी से प्रभावित व्यक्तियों को अतिरिक्त देखभाल और सहायता प्रदान करना।
  • सक्रिय सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना।
  • व्यवसायों और संस्थानों से सीएसआर योगदान जुटाना।

निक्षय पोषण योजना (एनपीवाई) [13]

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 2018 में शुरू की गई निक्षय – टीबी अधिसूचना प्रोत्साहन योजना, निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को टीबी मामलों की रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे टीबी निगरानी और उपचार में सुधार होता है।

निक्षय पोषण योजना (एनपीवाई) के तहत, टीबी रोगियों के पोषण के लिए वित्तीय सहायता 500 रुपए से बढ़ाकर 1,000 रुपए प्रति माह कर दी गई है, जिससे पूरे उपचार के दौरान प्रति रोगी 3,000 रुपए से 6,000 रुपए प्रदान किए जाते हैं। रोगी को निक्षय पोर्टल पर पंजीकृत और अधिसूचित होना चाहिए।

सरकार ने कम वजन वाले टीबी रोगियों (बीएमआई < 18.5) के लिए ऊर्जा सघन पोषण अनुपूरण (ईडीएनएस) शुरू किया है। लगभग 12 लाख रोगियों को उपचार के पहले दो महीनों के दौरान ये सप्लीमेंट प्राप्त होंगे, ताकि रिकवरी दर और समग्र स्वास्थ्य परिणामों में सुधार हो सके।

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नि-क्षय मित्र पहल – प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान (पीएमटीबीएमबीए) के तहत, नि-क्षय मित्र पहल व्यक्तियों, गैर सरकारी संगठनों, कॉरपोरेट्स, धार्मिक संगठनों और अन्य लोगों को कम से कम छह महीने के लिए टीबी रोगियों को गोद लेने के लिए प्रोत्साहित करती है, ताकि उन्हें पोषण, सामाजिक या आर्थिक सहायता मिल सके।

इस पहल का दायरा अब टीबी रोगियों के घरेलू संपर्कों के लिए खाद्य टोकरियाँ शामिल करने के लिए बढ़ा दिया गया है, जिसका मकसद उनकी प्रतिरक्षा को बढ़ाना, संक्रमण के जोखिम को कम करना और परिवारों के वित्तीय बोझ को कम करना है। इसके अतिरिक्त, निक्षय पोषण योजना (एनपीवाई) के तहत प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के ज़रिए 1.13 करोड़ लाभार्थियों को 3,202 करोड़ रुपए से अधिक की राशि वितरित की गई है, जो बेहतर पोषण और उपचार परिणामों की प्रतीक है। इन प्रयासों को और मजबूत करने के लिए, सरकार ने अतिरिक्त 1,040 करोड़ रुपए (केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 साझा) की प्रतिबद्धता जताई है, जिससे सहायता में बढ़ोत्तरी और टीबी से संबंधित मृत्यु दर में कमी सुनिश्चित हुई है।

निक्षय पोर्टल

निक्षय पोर्टलराष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत एक वेब-आधारित रोगी प्रबंधन और निगरानी प्रणाली है। एनआईसी और डब्ल्यूएचओ इंडिया के सहयोग से केंद्रीय टीबी डिवीजनस्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा विकसित, यह प्रणाली सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को टीबी के मामलों को दर्ज करने, परीक्षण का आदेश देने, उपचार रिकॉर्ड करने, अनुपालन की निगरानी करने और मामलों को स्थानांतरित करने में मदद करती है। यह भारत की राष्ट्रीय टीबी निगरानी प्रणाली के रूप में भी काम करता है, जो सरकार को वास्तविक समय पर डेटा रिपोर्टिंग प्रदान करता है।[14]

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स्रोत – 23 मार्च 2025 तक– https://dashboards.nikshay.in/community_support/overview

1.51 करोड़ से ज़्यादा टीबी मरीज़ों को इलाज मिल रहा है, जिनमें से करीब 1.18 करोड़ ने सहायता पाने के लिए सहमति दी है। निक्षय मित्रों द्वारा लगभग 1.18 करोड़ प्रतिबद्धताएँ व्यक्त की गई हैं, और 2.59 लाख से ज़्यादा मित्र पंजीकृत हैं। यह पहल टीबी उन्मूलन में जन भागीदारी पर ज़ोर देती है, जो मानवता के लिए प्रधानमंत्री के आह्वान के अनुरूप है। अधिक जानकारी निक्षय डैशबोर्ड पर हासिल की जा सकती है।[15]

निष्कर्ष

भारत, राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत केंद्रित उपायों के ज़रिए 2025 तक टीबी को खत्म करने के अपने लक्ष्य में लगातार तरक्की कर रहा है। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान (पीएमटीबीएमबीए) और निक्षय पोषण योजना (एनपीवाई) जैसी प्रमुख पहल, सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दे रही हैं, पोषण संबंधी सहायता सुनिश्चित कर रही हैं और  उपचार के पालन में सुधार कर रही हैं। निक्षय पोर्टल निगरानी और रोगी देखभाल को और मजबूत करता है। लेकिन इस मिशन की रफ्तार को बनाए रखने के लिए, निवेश, नवाचार और भागीदारी में वृद्धि बेहद ज़रुरी है। निरंतर प्रतिबद्धता के साथ, भारत टीबी के खिलाफ लड़ाई में एक वैश्विक उदाहरण बनने के लिए तैयार है।

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