हिमाचल प्रदेश में मत्स्य पालन प्रशिक्षण केंद्र
मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग ने वर्ष 2022-23 के दौरान हिमाचल प्रदेश सरकार के गगरेट में अत्याधुनिक मत्स्य पालन प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की। इस परियोजना की कुल लागत 5.17 करोड़ रुपये है, जिसमें से 5.00 करोड़ रुपये तक की राशि को मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (एफआईडीएफ) के अंतर्गत ब्याज अनुदान हेतु सीमित किया गया है। एफआईडीएफ के अंतर्गत एक नोडल ऋण प्रदाता संस्था (एनएलई) राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने हिमाचल प्रदेश सरकार को अत्याधुनिक मत्स्य पालन प्रशिक्षण केंद्र, गगरेट की स्थापना के लिए 5.00 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है तथा नाबार्ड द्वारा यह पूरी राशि जारी भी कर दी गई है।
(ग): मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय का मत्स्य पालन विभाग हिमाचल प्रदेश सहित देश के सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मत्स्य क्षेत्र के समग्र विकास के लिए विभिन्न योजनाओं/कार्यक्रमों का क्रियान्वयन कर रहा है। प्रमुख योजनाओं में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) (2020-21 से 2025-26), मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (एफआईडीएफ) (2018-19 से 2025-26) तथा पीएमएमएसवाई की केंद्रीय क्षेत्र की एक उप-योजना, प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) (2023-24 से 2026-27) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, भारत सरकार ने वर्ष 2018-19 से मछुआरों एवं मत्स्य किसानों की कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) सुविधा भी प्रदान की है। ये योजनाएँ मुख्य रूप से मछली उत्पादन एवं उत्पादकता से संबंधित महत्वपूर्ण कमियों को दूर करने, गुणवत्ता, प्रौद्योगिकी, मछली पकड़ने या उपज के उपरांत अवसंरचना एवं प्रबंधन, मूल्य श्रृंखला के आधुनिकीकरण एवं सुदृढ़ीकरण तथा मछुआरों की आजीविका और कल्याण के सुदृढ़ीकरण के उद्देश्य से तैयार की गई हैं।
(घ): हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कांगड़ा और चम्बा जिलों में पिछले तीन वर्षों के दौरान मछली उत्पादन का विवरण निम्नलिखित है:
(टन में)
| क्र. सं. | वर्ष | कांगड़ा | चम्बा |
| 1. | 2022-23 | 4871.09 | 1075.36 |
| 2. | 2023-24 | 5263.48 | 1140.72 |
| 3. | 2024-25 | 5480.62 | 1379.48 |
हिमाचल प्रदेश में मत्स्य किसानों को जारी किए गए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के अतिरिक्त, राज्य में मछली उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मछली उत्पादन वर्ष 2019-20 में 13,745 टन से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 16,250 टन तक पहुँच गया है, जो इस क्षेत्र में निरंतर प्रगति को दर्शाता है। इसमें कांगड़ा जिले में 2,850 टन तथा चम्बा जिले में 1,920 टन उत्पादन शामिल है, जो इन क्षेत्रों में जलीय कृषि के बढ़ते विस्तार को प्रतिबिंबित करता है।
यह जानकारी मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।