जून 16, 2026

हिमाचल प्रदेश में पैलिएटिव देखभाल को मजबूत करेगी सरकारः स्वास्थ्य मंत्री

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनीराम शांडिल ने कहा है कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश में पैलिएटिव देखभाल प्रणाली को मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। पैलिएटिव देखभाल एक विशेष चिकित्सा देखभाल प्रणाली है, जिसका उद्देश्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित रोगियों को दर्द, परेशानी और तनाव से राहत प्रदान करना है।

हिमाचल प्रदेश का एक प्रतिनिधिमंडल स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में पैलियम इंडिया के पैलिएटिव देखभाल मॉडल का अध्ययन करेन के लिए 23 से 26 अक्तूबर, 2024 तक केरल में है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस अध्ययन का उद्देश्य राज्य स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली के माध्यम से हिमाचल प्रदेश में पैलिएटिव देखभाल, इसकी क्षमता और इसके कार्यान्वयन की संभावनाओं का पता लगाना था। राज्य सरकार का लक्ष्य हिमाचल के लिए एक अनुकूलित पैलिएटिव देखभाल ढांचा विकसित करना और इसी तरह की प्रथाओं को इसकी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में एकीकृत करना है।
प्रतिनिधिमंडल ने त्रिवेेन्द्रम में एक पैलिएटिव देखभाल अस्पताल का दौरा करने सहित पैलियम इंडिया द्वारा घरों में दी जा रही पैलिएटिव देखभाल सेवाओं की प्रक्रिया और प्रभावशीलता का अध्ययन भी किया।
डॉ. धनी राम शांडिल से केरल के पूर्व मुख्य सचिव एस. एम. विजयानंद पैलिएटिव देखभाल के संबंध में नीतिगत चर्चा करेंगे।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पहला पैलिएटिव देखभाल केंद्र वर्ष 2015 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा, जिला कांगड़ा में स्थापित किया गया था। वर्तमान में राज्य में चार जिला अस्पताल और तीन चिकित्सा महाविद्यालयों में पैलिएटिव देखभाल सेवाएं प्रदान की जा रही है।
उन्होंने कहा कि पैलियम इंडिया और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) हिमाचल प्रदेश ने राज्य में पैलिएटिव देखभाल केंद्रों को और मजबूत करने के लिए फरवरी, 2024 में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
समझौता ज्ञापन के अनुसार पैलियम इंडिया चिकित्सा अधिकारियों, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों, स्वास्थ्य एवं आशा कार्यकर्ताओं और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों को पैलिएटिव देखभाल प्रशिक्षण प्रदान करेगा।
प्रतिनिधिमंडल में स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा देवी, मिशन निदेशक एनएचएम प्रियंका वर्मा, निदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान डॉ. राकेश शर्मा, उप मिशन निदेशक डॉ. गोपाल बैरी और राज्य कार्यक्रम अधिकारी (एनसीडी) डॉ. अनादि शामिल हैं।

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