राष्ट्रीय महत्व के स्मारक
देश में 3,697 प्राचीन स्मारक, पुरातात्विक स्थल और अवशेष राष्ट्रीय महत्व के घोषित किए गए हैं। इसका ब्यौरा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की वेबसाइट https://asi.nic.in पर दिया गया है।
स्मारकों और स्थलों की घोषणा प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 की धारा 4 के अंतर्गत की जाती है। केंद्र सरकार किसी भी प्राचीन स्मारक को, जो पुरातात्विक, ऐतिहासिक या वास्तुशिल्प रूप से राष्ट्रीय महत्व के होने की योग्यता रखता है, जनता से विचार/आपत्तियां आमंत्रित करके दो महीने का नोटिस देती है और स्मारक को राष्ट्रीय महत्व का घोषित करने के अपने इरादे की अधिसूचना जारी करती है। निर्धारित अवधि में प्राप्त विचारों/आपत्तियों पर विचार करने के बाद, केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में एक अधिसूचना प्रकाशित करके प्राचीन स्मारक को राष्ट्रीय महत्व का घोषित कर सकती है।
पिछले पांच वर्षों में देश के स्मारकों और राष्ट्रीय महत्व के स्थलों के संरक्षण, बचाव और रखरखाव पर व्यय का ब्यौरा संलग्नक में दिया गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ओडिशा सहित पूरे देश में आवश्यकता, प्राथमिकता और संसाधनों के अनुसार राष्ट्रीय महत्व के प्राचीन स्मारकों और पुरातत्वीय स्थलों और अवशेषों का संरक्षण, बचाव और रखरखाव करता है। इसके अलावा, स्मारकों में बुनियादी सुविधाएं और आगंतुक सुविधाएं जैसे रास्ता, संकेतक, आगंतुक बेंच, दिव्यांगों के लिए सुविधाएं, ध्वनि एवं प्रकाश शो, रोशनी, स्मारिका की दुकानें आदि प्रदान की जाती हैं। इसके अलावा, स्मारकों में और उनके आस-पास भूदृश्य निर्माण और पर्यावरणीय विकास निरंतर चलने वाला कार्य है।
यह जानकारी केंद्रीय संस्कृति, पर्यटन और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री, जी किशन रेड्डी ने राज्यसभा में दी।