रक्षा क्षेत्र में आधुनिकीकरण के लिए नॉन-लैप्सेबल फंड
संविधान के अनुच्छेद 112-114 और 266 में यह प्रावधान है कि संसद के समक्ष प्रस्तुत किए गए वार्षिक बजट के माध्यम से अनुमति मिले बिना सरकार भारत की समेकित निधि से कोई भी पैसा खर्च नहीं कर सकती है। चूंकि विनियोग अधिनियम के तहत मिली अनुमति संबंधित विशेष वित्त वर्ष के लिए होती है, इसलिए इसके तहत उस सार्वजनिक निधि के संचालन की अनुमति नहीं होती है जो दरअसल नॉन-लैप्सेबल होती है। इस संबंध में एक नॉन-लैप्सेबल रक्षा आधुनिकीकरण फंड को संचालित करने हेतु रक्षा मंत्रालय के लिए एक विशेष व्यवस्था का पता लगाने के उद्देश्य से वित्त मंत्रालय द्वारा रक्षा मंत्रालय के परामर्श से एक अलग व्यवस्था करने पर काम किया जा रहा है।
रक्षा व्यय ही समस्त केंद्रीय मंत्रालयों में सर्वाधिक व्यय होता है। कुल सरकारी व्यय/जीडीपी के एक निश्चित प्रतिशत के रूप में रक्षा व्यय को इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए सुनिश्चित नहीं किया जा सकता है कि संसाधनों का आवंटन विभिन्न प्रतिस्पर्धी प्राथमिकताओं के बीच आवश्यकता के आधार पर किया जाता है। बजटीय आवंटन का इष्टतम उपयोग किया जाता है और यदि आवश्यक हो, तो पूरक/आरई चरण में अतिरिक्त धनराशि की मांग की जाती है, ताकि रक्षा सेवाओं की परिचालन संबंधी तैयारियों से कोई समझौता किए बिना ही अत्यावश्यक और महत्वपूर्ण क्षमताओं को निश्चित रूप से हासिल किया जा सके।
यह जानकारी रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने लोकसभा में डॉ. अमर सिंह को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।