मार्च 8, 2026

अंतरिक्ष क्षेत्र के “अनशेकलिंग” से स्टार्टअप में तेजी आई हैः डॉ. जितेंद्र सिंह

“एकल अंक से बढ़कर 150 से अधिक हुए अंतरिक्ष स्टार्टअप”
डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस की नव स्थापित रॉकेट विकास सुविधा देखी; संभवतः भारत में निजी क्षेत्र में यह सबसे बड़ी सुविधा
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार क्षमताओं के लिए सार्वभौमिक मान्यता अर्जित करने में सक्षम बनाया; हमारे स्टार्टअप की बहुत मांग: डॉ. जितेंद्र सिंह
डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक नए मील के पत्थर स्काईरूट के विक्रम-1 रॉकेट का अनावरण किया
“स्काईरूट की सफलता, विशेषकर अंतरिक्ष सहित नए और उभरते क्षेत्रों में स्टार्टअप उद्यम स्थापित करने के इच्छुक युवाओं के लिए प्रेरणा”: डॉ. जितेंद्र सिंह
“अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन वैज्ञानिक अनुसंधान में सार्वजनिक-निजी भागीदारी का मार्ग प्रशस्त करेगा और हमें चुनिंदा विकसित देशों की पंक्ति में खड़ा कर देगा”: डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने हैदराबाद में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र को “मुक्त” करने से स्टार्टअप में तेजी आई है। इसके परिणामस्वरूप, बहुत ही कम समय में लगभग चार वर्षों में, स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या मात्र एक अंक से बढ़कर 150 से अधिक हो गई है, जिसमें “स्काईरूट” जैसे स्टार्टअप प्रमुख उद्यमियों के रूप में परिवर्तित हो चुके हैं।

हैदराबाद में 60,000 वर्ग फुट के परिसर में स्काईरूट की सबसे बड़ी रॉकेट फैक्ट्री का दौरा करने के बाद डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्काईरूट न केवल भारत की उत्कृष्ट प्रतिभा और वैज्ञानिक कौशल का बेहतरीन उदाहरण है, बल्कि यह हम सभी के लिए यह संदेश भी है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सत्ता में आने से पहले भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के लिए खोलने की संभावनाएं निष्क्रिय पड़ी थीं।

“स्काईरूट एयरोस्पेस” पहला अंतरिक्ष स्टार्टअप था जिसने तीन साल पहले अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी उद्यमियों के लिए खोल दिए जाने के बाद पिछले साल श्रीहरिकोटा में इसरो स्टेशन से एक निजी रॉकेट लॉन्च किया था। आईआईटी से उत्तीर्ण दो प्रमुख विशेषज्ञों पवन और भरत के नेतृत्व में अत्याधुनिक तकनीक के साथ भारत की सबसे बड़ी रॉकेट विकास सुविधा स्थापित की गयी है। यह मांग पर आधारित लागत के अनुरूप रॉकेट विकसित करने की क्षमता रखता है।

अमृतकाल और प्रधानमंत्री के “इंडिया@2047” के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में अंतरिक्ष क्षेत्र के साथ कुछ ऐसे क्षेत्रों से आने वाले है जिनकी संभावनाएं अभी नहीं खोजी गई हैं, उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था देश की अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण योगदान देने जा रही है। जब स्वतंत्र भारत अपना 100वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा तो वह दुनिया का अग्रणी राष्ट्र होगा।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व के कारण पिछले 9 वर्षों में देश ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के हर क्षेत्र में तेजी से उन्नति की है।”

स्काईरूट एक ही छत के नीचे भारत की सबसे बड़ी निजी रॉकेट विकास सुविधा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्काईरूट के विक्रम-1 कक्षीय रॉकेट का भी अनावरण किया। भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक और मील का पत्थर है। आशा है कि विक्रम-1 भारत के लिए महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि देश ने 2020 में एक ऐतिहासिक सुधार के अंतर्गत अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी उद्यमियों के लिए खोल दिया था।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्काईरूट की सफलता भारत की उन विशाल युवा प्रतिभाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो विशेष रूप से अंतरिक्ष, बायोटेक, कृषि और ऊर्जा सहित नए और उभरते क्षेत्रों में अपने स्टार्टअप उद्यम स्थापित करने की इच्छुक हैं।”

मंत्री महोदय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को देश की विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार क्षमताओं के लिए वैश्विक पहचान बनाने में सक्षम किया है और आज हमारे स्टार्टअप की बहुत मांग है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इसरो के पहले अध्यक्ष और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के संस्थापक जनक डॉ. विक्रम साराभाई ने इसरो को “राष्ट्रीय स्तर पर” सार्थक भूमिका निभाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकार के नौ वर्षों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की युवा प्रतिभाओं को नये आयाम और संभावनाओं को नये पंख दिये। यह इसरो की राष्ट्रीय स्तर पर सार्थक भूमिका निभाने की पुष्टि भी करता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के अंतरिक्ष मिशन मानव संसाधन और कौशल पर आधारित लागत के अनुरूप डिज़ाइन किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि “अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन” वैज्ञानिक अनुसंधान में एक बड़े सार्वजनिक निजी भागीदारी प्रारूप के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा और हमें नये क्षेत्रों में नवीन अनुसंधान का नेतृत्व करने वाले चुनिंदा विकसित देशों की श्रेणी में शामिल कर देगा।

उन्होंने कहा कि नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एनआरएफ) बजट में पांच वर्षों में 50,000 करोड़, रुपये के खर्च का अनुमान लगाया गया है। इसमें से एक बड़ा हिस्सा 70 प्रतिशत से अधिक यानी 36,000 करोड़ रुपये गैर-सरकारी स्रोतों, उद्योगों, जनहितैषियों और घरेलू तथा बाहरी स्रोतों से आने का अनुमान है।

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