नीति आयोग ने भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग का रोडमैप जारी किया
रिपोर्ट में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आयात पर अत्यधिक निर्भरता समाप्त कर वर्ष 2035 तक भारत को अहम वैश्विक विनिर्माणकर्ता बनाने की योजना
सेमीकंडक्टर केवल औद्योगिक युक्तिकरण नहीं बल्कि अब यह राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक सुदृढ़ता डिजिटल संप्रभुता और भविष्य की प्रतिस्पर्धात्मकता की नींव है। यह रक्षा प्रणालियों, दूरसंचार नेटवर्क और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अवसंरचना से लेकर वाहन, स्वास्थ्य देखभाल उपकरणों, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और उन्नत विनिर्माण तक प्रत्येक क्षेत्र में सबलता प्रदान करता है।
भू-राजनीति, प्रौद्योगिकी में बदलाव और विश्वसनीय क्षमता प्रतिस्पर्धा से वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखलाओं के व्यापक होते स्वरूप के बीच भारत के लिए बड़े सेमीकंडक्टर बाजार से बदलकर वैश्विक मूल्य श्रृंखला का महत्वपूर्ण केंद्र बनने का यह ऐतिहासिक अवसर है।
नीति आयोग के फ्रंटियर टेक हब ने इसी पृष्ठभूमि में, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आज भारत का पहला व्यापक 10-वर्षीय रोडमैप भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग का भविष्य जारी किया। इस रोडमैप को वित्त एवं कॉरपोरेट मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी, रेल तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री अशोक लाहिड़ी, नीति आयोग की विशिष्ट फेलो सुश्री देबजानी घोष, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अमितेश कुमार सिन्हा, विशेषज्ञ परिषद के सदस्यों, उद्योग जगत के दिग्गजों और सरकार, शिक्षा जगत तथा सेमीकंडक्टर पारितंत्र के अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में जारी किया।
उद्योग और सरकार के कुशल विशेषज्ञों के साथ गहन परामर्श के बाद विकसित सेमीकंडक्टर क्षेत्र की इस भविष्य योजना में भारत के लिए वर्ष 2035 तक 120 से 150 अरब डॉलर की सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला के विनिर्माण हेतु स्पष्ट और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है।
डिजाइन प्रतिभा, नवाचार क्षमता, बढ़ती घरेलू मांग, इलेक्ट्रॉनिकी वस्तुओं के विनिर्माण और सामग्री के क्षेत्र में भारत की मजबूत स्थितियों पर आधारित यह भविष्य योजना पांच परस्पर सुदृढ़ स्तंभों पर निर्मित है। इनमें अग्रणी सीमांत अनुसंधान एवं विकास तथा डिजाइन बौद्धिक संपदा; दीर्घकालिक पूंजी जुटाने हेतु नीति और निवेश, उन्नत पैकेजिंग और कंपाउंड सेमीकंडक्टर (दो या दो से अधिक तत्वों को मिलाकर बनाई जाने वाली उन्नत अर्धचालक सामग्री जो पारंपरिक सिलिकॉन की तुलना में बेहद तेज गति, उच्च दक्षता और अधिक तापमान सहने की क्षमता रखते हैं) पर केंद्रित उत्पादन, सेमीकंडक्टर प्रतिभा के संपूर्ण दायरे के कुशलकर्मियों को साथ लाना और भरोसेमंद देशों और वैश्विक उद्योग के साथ साझेदारी शामिल हैं।
इन सभी स्तंभों द्वारा स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें भारत को उन्नत पैकेजिंग और आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट के प्रमुख वैश्विक गंतव्य के रूप में स्थापित करना, वाइड-बैंडगैप सेमीकंडक्टर्स (ऐसे उन्नत अर्धचालक पदार्थ जिनमें इलेक्ट्रॉन को वैलेंस बैंड से कंडक्शन बैंड में पहुंचने के लिए पारंपरिक सिलिकॉन की तुलना में बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है) के एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरना, कंपाउंड सेमीकंडक्टर विनिर्माण में नेतृत्व क्षमता स्थापित करना, अग्रणी डिजाइन क्षमता मजबूत बनाना और 100 से अधिक उन्नत सेमीकंडक्टर डिजाइन आईपी (किसी उत्पाद के बाहरी, दृश्य और बनावट संबंधी पहलुओं का कानूनी संरक्षण)
यह रोडमैप केंद्रीय बजट 2026 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन द्वितीय चरण के तहत घोषित प्राथमिकताओं को सुदृढ़ बनाता है और भारत में इसके विनिर्माण संबंधी पारितंत्र को सघन बनाने की दिशा में बदलाव दर्शाता है। इसमें निवेश आकर्षित करने और मूलभूत क्षमता निर्माण से लेकर डिजाइन, सामग्री, विनिर्माण, पैकेजिंग, प्रतिभा, अनुसंधान एवं विकास और विश्वसनीय वैश्विक साझेदारी में गहरी क्षमता विकसित करना शामिल है।
संपूर्ण रोडमैप नीति आयोग के फ्रंटियर टेक हब (भारत को ‘विकसित राष्ट्र के रूप में बदलने के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों और नवाचारों को अपनाने और उनका विस्तार करने हेतु नीति आयोग द्वारा स्थापित एक विशेष एक्शन टैंक) की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
संपूर्ण रोडमैप यहां प्रस्तुत है- https://niti.gov.in/sites/default/files/2026-05/Future-of-India-Semiconductor-Industry.pdf
वित्त एवं कॉर्पोरेट मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा:
नीति फ्रंटियर टेक हब का रोडमैप, ‘भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग का भविष्य’, चिप्स के प्रमुख उपभोक्ता होने से और आगे बढ़ते हुए वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला का अनिवार्य हिस्सा बनने के भारत की दृढ़ संकल्पता की स्पष्ट घोषणा है। सेमीकंडक्टर 21वीं सदी की आधारभूत संरचना हैं। ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विद्युत वाहित आवागमन साधन, दूरसंचार, रक्षा प्रणालियों, स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकी, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और उन्नत विनिर्माण को शक्ति प्रदान करते हैं। आज जारी रोडमैप उन्नत पैकेजिंग, कंपाउंड सेमीकंडक्टर, वाइड-बैंडगैप सामग्री और एआई-आधारित चिप डिजाइन संबंधी उन क्षेत्रों पर केंद्रित है जिनमें भारत मजबूत स्थिति बना सकता है। इस केंद्रित रणनीति, दीर्घकालिक दृष्टिकोण और निरंतर प्रतिबद्धता के साथ, भारत इस ऐतिहासिक अवसर के साथ अपने हित को पूरा करने के लिए पूर्णतया तैयार है।
इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी, रेल तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा:
“सेमीकंडक्टर आर्थिक और तकनीकी नेतृत्व के आगामी युग को परिभाषित करेंगे। भारत इस यात्रा में भरोसेमंद भागीदार के तौर पर अपनी स्थिति सुदृढ बना रहा है। हमारा ध्यान इसके डिजाइन, प्रतिभा, सामग्री, उपकरण, फैब्स और उन्नत पैकेजिंग सहित संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र निर्मित करने पर है, ताकि वैश्विक कंपनियां और साझेदार देश भारत को सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला के एक भरोसेमंद, दीर्घकालिक स्तंभ के रूप में देखें।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन द्वितीय चरण में डिज़ाइन हमारी सर्वोपरि प्राथमिकता है। हम भारतीय डिज़ाइन कंपनियों को पूर्ण समर्थन दे रहे हैं जिससे उनके नवाचार भारत में ही निर्मित और विस्तारित हो सकें। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में यह 20 वर्ष की यात्रा है। विकसित भारत 2047 की ओर बढ़ते हुए इसका हमारी तकनीकी संप्रभुता और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए अहम महत्व है।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री अशोक लाहिड़ी ने कहा:
भारत के सामने आज सबसे बड़ा खतरा दूसरों द्वारा नियंत्रित प्रौद्योगिकी पर निर्भरता है। इस सदी में संप्रभुता की शुरुआत बुनियादी अवसंरचना से होगी, और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में नेतृत्व उस नींव का हिस्सा है। नीति फ्रंटियर टेक हब का रोडमैप अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के लिए स्पष्ट लक्ष्य और उसकी प्राप्ति का व्यावहारिक मार्ग निर्धारित करता है।
नीति आयोग की प्रतिष्ठित फेलो सुश्री देबजानी घोष ने कहा:
सेमीकंडक्टर एक दीर्घकालिक उद्योग है। वर्ष 2035 में इस दिशा में नेतृत्व को परिभाषित करने वाली क्षमताओं का पूर्वानुमान, योजना और निर्माण आज ही करना होगा। इसलिए यह भविष्य योजना केवल मौजूदा मांग पूरी करने तक ही सीमित नहीं यह इस बात की पहचान करने हेतु अहम है प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता किस दिशा में बढ़ रही है और भारत किन क्षेत्रों में स्थायी अग्रणी स्थिति हासिल कर सकता है। इस पर सोच-समझकर निर्णय लेना है। हमारा ध्यान एक व्यावहारिक दस-वर्षीय मार्ग तैयार करने पर रहा है जो भारत को भागीदारी से आगे बढ़ाकर रणनीतिक गहराई हासिल कराने में सहायक हो और डिजाइन, उन्नत पैकेजिंग, कंपाउंड सेमीकंडक्टर, प्रतिभा, अनुसंधान एवं विकास और पारिस्थितिकी तंत्र की तैयारी के क्षेत्र में कुशलता प्रदान करे। अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में समय का अत्याधिक महत्व है। जो देश पहले योजना बनाते हैं, इस दिशा में लगातार प्रयासरत रहते हैं और धैर्यपूर्वक क्षमताएं विकसित करते हैं, वही अग्रणी बनते हैं।
नीति फ्रंटियर टेक हब : https://www.niti.gov.in/frontier-tech-hub
नीति फ्रंटियर टेक हब की स्थापना विकसित भारत के एक सक्रिय टैंक के रूप में की गई है, जिसका उद्देश्य उभरते हुए वृहद-टेक्नोलॉजी बदलावों का पूर्वानुमान लगाना और भारत को तीव्र आर्थिक विकास, समावेशी सामाजिक उद्देश्यों और कुशल स्थिति अनुरूपन के लिए उनकी क्षमता के उपयोग के लिए तैयार करना है, ताकि देश को अग्रणी तकनीकी राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके। सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत के 100 से अधिक विशेषज्ञों के सहयोग से, यह हब आर्थिक विकास, सामाजिक सुपरिणामों और रणनीतिक स्थिति अनुकूलता के लिए अग्रणी प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में 10-वर्षीय रोडमैप तैयार कर रहा है।