मार्च 8, 2026

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने चौथे राष्ट्रीय जल पुरस्कार प्रदान किए

उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने जल शक्ति मंत्रालय के प्रयासों और जल क्षेत्र में उसके उत्कृष्ट कार्य की सराहना की और सभी से इन प्रयासों का समर्थन करने का आह्वान किया
उप-राष्ट्रपति ने जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय जल मिशन के शुभंकर ‘पीकू’ पर एनिमेटेड फिल्म जारी की
इन पुरस्कारों ने जल क्षेत्र में काम करने वालों के बीच गहरा प्रभाव डाला है और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया है: गजेंद्र सिंह शेखावत

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शनिवार को नयी दिल्ली के विज्ञान भवन में चौथे राष्ट्रीय जल पुरस्कार, 2022 प्रदान किए। ग्यारह श्रेणियों में संयुक्त विजेताओं सहित 41 विजेताओं को जल संरक्षण और प्रबंधन के क्षेत्र में उनके अनुकरणीय कार्य के लिए सम्मानित किया गया। प्रत्येक पुरस्कार विजेता को प्रशस्ति पत्र और ट्रॉफी के साथ-साथ कुछ श्रेणियों में नकद पुरस्कार प्रदान किए गए। उपराष्ट्रपति ने जल संरक्षण के संदेश को दूरदर्शन पर प्रसारित करने के लिए राष्ट्रीय जल मिशन के शुभंकर ‘पीकू’ पर एक एनिमेटेड लघु फिल्म भी जारी की। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक ‘जल कलश’ समारोह से हुई।

Image

समारोह को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति, जगदीप धनखड़ ने पुरस्कार विजेताओं की सराहना करते हुए कहा कि जल संरक्षण और प्रबंधन में उनका योगदान असाधारण है, और यह आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र के विकास के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करेगा। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में हमारे देश ने जो परिवर्तन देखा है, उसका यह सबसे अच्छा उदाहरण है।धनखड़ ने जल जीवन मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जल शक्ति मंत्रालय की सराहना की। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन मात्रा, गुणवत्ता और निरंतरता के उद्देश्यों का उदाहरण है। उन्होंने जल क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए मंत्रालय के अधिकारियों/कर्मचारियों के प्रयासों की भी सराहना की और जनप्रतिनिधियों, मीडिया और नागरिक समाज संगठनों से उनकी योजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में उनका समर्थन करने का आग्रह किया। धनखड़ ने समाज के सभी वर्गों से प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि भारत के गांवों में तालाब उनके फेफड़ों की तरह हैं, जो अतिक्रमण के कारण सिकुड़ रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि मंत्रालय को देश के प्रत्येक गांव में मौजूदा तालाबों के विकास का कार्य अपने हाथ में लेना चाहिए। इन तालाबों का कायाकल्प बड़े पैमाने पर जल निकायों को पुनर्जीवित करने में मदद करेगा और साथ ही पशुपालन को बढ़ाने में सहायता करने के साथ-साथ देश के आर्थिक विकास में अहम योगदान प्रदान करेगा। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि पंचायत से लेकर संसद तक शासन के प्रत्येक स्तर पर जनप्रतिनिधियों को प्रति वर्ष कम से कम 100 पेड़ लगाने चाहिए। उन्होंने सभी नागरिकों से जल संरक्षण को ‘जन आंदोलन’ की भावना से अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने और तीन आर “ रिड्यूस, रियूज और रिसाइकिल” के प्रति प्रतिबद्धता की अपील की।

Image

उपराष्ट्रपति के संबोधन के अंश: https://pib.gov.in/PressReleseDetail.aspx?PRID=1933040

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री, गजेंद्र सिंह शेखावत ने जल प्रबंधन और संरक्षण के क्षेत्र में पुरस्कार विजेताओं के प्रयासों के लिए उनका आभार व्यक्त किया और कहा कि इन पुरस्कारों ने गहरा प्रभाव डाला है और जल क्षेत्र में काम करने वालों के बीच एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धी माहौल को प्रोत्साहन दिया है। शेखावत ने मध्यप्रदेश को सर्वश्रेष्ठ राज्य श्रेणी में प्रथम पुरस्कार के साथ-साथ ओडिशा को दूसरे स्थान और आंध्र प्रदेश और बिहार को संयुक्त रूप से तीसरा स्थान प्राप्त करने के लिए बधाई दी। उन्होंने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी सरकार को जल संरक्षण और जल प्रबंधन की दिशा में किये गये सराहनीय कार्यों के लिये विशेष रूप से बधाई दी। उन्होंने
कहा, “मध्यप्रदेश ने जिस तरह से जल प्रबंधन की दृष्टि से काम किया है, वह निश्चित रूप से कई राज्यों और संस्थानों के लिए प्रेरणा का काम करेगा।”
शेखावत ने जल के महत्व के बारे में कहा, “ जल हमारे जीवन का आधार है। इसके बिना जीवन की किसी भी रूप में कल्पना नहीं की जा सकती है। पानी की प्रति व्यक्ति उपलब्धता दिन-प्रतिदिन घटती जा रही है। पानी की कमी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। पानी भी हम सभी के लिए चिंता का एक सामान्य बिंदु है। ”

उन्होंने कहा, “ हम अपने जल संसाधनों के मामले में बड़ी चुनौतियों का सामना करते हैं क्योंकि भारत दुनिया की आबादी का लगभग 18 प्रतिशत, पशुधन का 18 फीसदी से अधिक का घर है, लेकिन हमारे पास दुनिया के ताजा जल संसाधनों का सिर्फ चार प्रतिशत है। हमारी चुनौती गंभीर है क्योंकि शहरीकरण की गति तेज है और भारत में भौगोलिक भिन्नता भी है। ” शेखावत ने जल शक्ति मंत्रालय की पहलों पर प्रकाश डालते हुए कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में “ जल शक्ति अभियान- कैच द रेन” पंचायती राज मंत्रालय और मंत्रालय के सहयोग से चलाया गया है। ग्रामीण विकास विभाग, वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण के क्षेत्र में एक नई गति लाया है। जल जीवन मिशन, दुनिया का सबसे बड़ा पेयजल आपूर्ति कार्यक्रम लगभग 19.4 करोड़ ग्रामीण परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन प्रदान करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे पेयजल सुरक्षा प्रदान की जा सके। मिशन के तहत, मंत्रालय ने 15 प्रतिशत से थोड़ा अधिक घरों के साथ जो यात्रा शुरू की थी, आज चार साल से भी कम समय में, 15 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 63 प्रतिशत घरों तक पहुंच गई है।”केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश की निर्भरता भूजल पर सबसे अधिक है और जल संसाधनों की पूर्ति करके स्थिरता बनाये रखना, एक बड़ी चुनौती है। अटल भूजल योजना जैसी प्रायोगिक परियोजनाओं ने भूजल के मांग पक्ष प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित किया है और भूजल को सामान्य स्तर तक लाने में उत्साहजनक परिणाम समुदाय के नेतृत्व वाले स्थायी भूजल प्रबंधन को प्रदर्शित करते हैं। शेखावत ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना पर प्रकाश डाला, जिसने एक ओर 30 लाख हेक्टेयर नए सिंचाई क्षेत्र का निर्माण किया है और दूसरी ओर, राज्यों के साथ समन्वित प्रयासों से लगभग 70 लाख हेक्टेयर भूमि को स्मार्ट/लघु सिंचाई के तहत लाया गया है। शेखावत ने बताया कि पूरे देश में 56,000 अमृत सरोवर का निर्माण किया गया है और लगभग इतनी ही संख्या में अमृत सरोवर निर्माणाधीन हैं। उन्होंने देश में एक नए युग की शुरुआत के रूप में केन और बेतवा नदियों को जोड़ने को एक सकारात्मक संदेश करार दिया। उन्होंने कहा कि 30 कड़ियो की पहचान की गई है जो नदियों और लोगों की प्यासबुझाने में मदद करेंगी। इस प्रकार, मंत्रालय जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग और अधिशेष बेसिन से पानी की कमी वाले बेसिन में पानी स्थानांतरित करने की दिशा में काम कर रहा है।इससे पहले स्वागत भाषण देते हुए केंद्रीय जल शक्ति राज्यमंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने पुरस्कार वितरण समारोह में सभी गणमान्य व्यक्तियों, जूरी सदस्यों, मीडिया कर्मियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया और कहा कि “पानी जीवन की मूलभूत आवश्यकता है और पृथ्वी पर मौजूद सभी जीवों के जीवित रहने के लिए महत्वपूर्ण है । ” उन्होंने कहा कि पानी के संरक्षण के लिए समाज के हर वर्ग के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता है और इस दृष्टिकोण से, पानी के महत्व के बारे में लोगों में जागरुकता पैदा करने और लोगों को सर्वोत्तम जल उपयोग विधाओं को अपनाने और प्रेरित करने में मदद करने के लिए वर्ष 2018 में जल संसाधन, आरडी और जीआर विभाग की ओर से राष्ट्रीय जल पुरस्कार शुरू किए गए।केंद्रीय जल शक्ति राज्यमंत्री विश्वेश्वर टुडू ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और कहा कि भारत सरकार द्वारा कई जल अभियान चलाए जा रहे हैं लेकिन ये अभियान सक्रिय जनभागीदारी से ही सफल हो सकते हैं। उन्होंने सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।

सचिव, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग, जल शक्ति मंत्रालय, पंकज कुमार ने कार्यक्रम का उद्घाटन करने और राष्ट्रीय जल पुरस्कार विजेताओं को प्रोत्साहित करने के लिए उप-राष्ट्रपति को धन्यवाद दिया। उन्होंने अन्य गणमान्य व्यक्तियों, जूरी समिति, जूरी समिति, विभाग के अधिकारियों और वैपकोस को धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया।


उन्होंने विशेष रूप से पुरस्कार विजेताओं को जल संरक्षण और उचित जल उपयोग के संदेश को आगे बढ़ाने में उनके अनुकरणीय प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनका प्रेरणादायी कार्य आने वाले वर्षों में जल प्रबंधन और संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रकाश स्तम्भ के रूप में काम करेंगे।

पुरस्कारों और पुरस्कार विजेताओं की सूची के बारे में अधिक पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://pib.gov./PressReleasePage.aspx?PRID=1932505

Leave a Reply

Copyright © All rights reserved. Newsphere द्धारा AF themes.

Discover more from जन किरण

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading