मार्च 8, 2026

केंद्रीय मंत्री तोमर की वियतनाम, ओमान, कनाडा के मंत्रियों के साथ हुई बैठकें

श्री अन्न को देश-दुनिया में बढ़ावा देने का नेतृत्व कर रहा हैं भारत- तोमर
भारत सरकार के लिए कृषि फोकस क्षेत्र, कृषि को टिकाऊ बनाने के साथ कई प्रमुख पहलें की हैं

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की हैदराबाद में जी-20 की मीटिंग के दौरान वियतनाम, ओमान व कनाडा के मंत्रियों तथा खाद्य व कृषि संगठन (एफएओ) एवं इंटरनेशनल फंड फार एग्रीकल्चर डेवलपमेंट (आईएफएडी) से द्विपक्षीय बैठकें हुईं। इस दौरान श्री तोमर ने कहा कि जी-20 की अध्यक्षता के साथ भारत अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष-2023 के हिस्से के रूप में देश-दुनिया में श्री अन्न को बढ़ावा देने का नेतृत्व भी कर रहा है। उन्होंने जी-20 अध्यक्षता के तहत “अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स व अन्य प्राचीन अनाज अनुसंधान पहल (महर्षि)” का समर्थन करने के लिए धन्यवाद देते हुए इन्हें कहा कि यह पहल अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के तहत किए संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों की गति तेज करेगी। महर्षि, श्री अन्न व जलवायु-सह्य एवं पौष्टिक अनाज पर अनुसंधान में सहयोग प्रदान करेगा।

वियतनाम के कृषि मंत्री ले मिन्ह होन के साथ बैठक में तोमर ने कहा कि भारत के पास कृषि पर संयुक्त कार्य समूह के रूप में कृषि व सम्बद्ध क्षेत्रों में सहयोग के लिए सुस्थापित संस्थागत व्यवस्था है। दोनों देशों के बीच सुचारू संबंध चले आ रहे हैं और वर्ष 2016 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वियतनाम यात्रा के दौरान, द्विपक्षीय संबंधों को ‘व्यापक कार्यनीतिक साझेदारी’ के रूप में आगे बढ़ाया गया था। तोमर ने कहा कि दोनों देश राजनयिक संबंधों की स्थापना की 50वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, जो भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ “आजादी का अमृत महोत्सव” के साथ मेल खाता है।

ओमान के कृषि मंत्री डॉ. सऊद हामूद अल-हब्सी के साथ बैठक में तोमर ने कहा कि भारत व ओमान के बीच काफी पुराने व ऐतिहासिक संबंध है, जो समय के साथ सुदृढ़ हुए हैं। भारत सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और कृषि एक ऐसा क्षेत्र है, जहां हमारे दोनों देशों के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। दोनों देशों में कृषि उत्पादकता व स्थिरता को बढ़ावा देने हेतु संयुक्त पहल, अनुसंधान परियोजनाओं, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के अवसरों का पता लगाना चाहिए तथा उन्नत सिंचाई तकनीकों, जल संरक्षण विधियों और नवीन तकनीकों सहित सटीक जल उपयोग के लिए सफल रणनीति तैयार करने में सहयोग करना चाहिए। ओमान व भारत दोनों को लाभान्वित करते हुए पशुधन, फलों, सब्जियों, प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों जैसी कृषि वस्तुओं के लिए बाजार पहुंच बढ़ाने के अवसरों का पता लगाने सहित कृषि अवसंरचना में निवेश के अवसरों पर ध्यान केंद्रित करने की बात भी तोमर ने कही।

कनाडा की मंत्री मैरी क्लाउड बिब्यू के साथ बैठक में तोमर ने कहा कि दीर्घकालिक व मैत्रीपूर्ण संबंधों को हम महत्व देते हैं, जो लोकतंत्र, विस्तारित आर्थिक जुड़ाव, नियमित उच्चस्तरीय चर्चा व लोगों के बीच दीर्घकालिक संबंधों के साझा मूल्यों द्वारा चिन्हित हैं। आर्थिक संबंध भी लगातार बढ़ रहे हैं। कनाडा में विशाल कृषि उत्पादन व कृषि-प्रौद्योगिकी उन्नति है, जो भारत के साथ सहयोग की संभावना प्रदान करते हैं। दोनों पक्ष समय-समय पर कृषि व कृषि-प्रौद्योगिकी साझेदारी पर तथा तकनीकी बैठकों के माध्यम से बाजार पहुंच के मुद्दों को हल करने के लिए विचार-विमर्श कर रहे हैं। तोमर ने भारत से बेबी कॉर्न, मक्का व केले के लिए बाजार पहुंच प्रदान करने के लिए कनाडा को धन्यवाद दिया, साथ ही कहा कि भारत घरेलू के साथ ही वैश्विक स्तर पर भी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

खाद्य व कृषि संगठन (एफएओ) के महानिदेशक क्यू डोंग्यू के साथ बैठक में तोमर ने कहा कि देश में वर्ष 1948 में अपना कार्य शुरू करने के बाद से भारत की एफएओ के साथ लंबी व मूल्यवान साझेदारी रही हैं। जलवायु परिवर्तन के उभरते प्रभाव व कीटों के नए प्रकारों के प्रकोप के साथ एफएओ का कार्य और भी जटिल हो गया है, जिससे यह पूर्व सूचित निर्णय लेने में देश की सहायता करने वाला एक महत्वपूर्ण ज्ञान भागीदार बन गया है। भारत एफएओ के कार्य को और अधिक मूल्‍यवान बनाता है, अन्य देशों को तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करता है, साथ ही विकास अनुभवों के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में भी कार्य करता है। भारत अभिष्‍ट परिणाम प्राप्त करने के लिए एफएओ के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा और खाद्य सुरक्षा व सतत कृषि को प्राप्त करने के साझा लक्ष्य की दिशा में कार्य करेगा।

इंटरनेशनल फंड फार एग्रीकल्चर डेवलपमेंट (आईएफएडी) के अध्यक्ष अल्वारो लारियो के साथ चर्चा में तोमर ने कहा कि भारत, आईएफएडी के साथ सहयोग करने के लिए अपने केंद्रित कार्यनीतिक उद्देश्य के लिए प्रतिबद्ध है, जो सुनिश्चित करता है कि छोटे किसानों की उपज, कृषि उत्पादन प्रणालियां लाभकारी, सतत व अनुकूल हों।

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