मार्च 10, 2026

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने दिल्‍ली के पुराना किला में चल रही खुदाई का निरीक्षण किया

पुराना किला में उत्खनन स्थल को ओपन एयर साइट संग्रहालय के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा ताकि आगंतुक दिल्ली की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत का अनुभव कर सकें: जी. के. रेड्डी

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने दिल्ली के ऐतिहासिक स्थल पुराना किला में चल रहे उत्खनन कार्यों का निरीक्षण करने के लिए वहां का दौरा किया।

प्राचीन शहर इंद्रप्रस्थ के रूप में पहचाना गया यह स्थल दशकों से पुरातात्विक रुचि का विषय रहा है। उत्खनन से कई महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं जो दिल्ली के 2500 वर्षों से अधिक के निरंतर इतिहास के बारे में अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं।

केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने पुराना किला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, ‘यह दिल्ली एनसीआर में एकमात्र ऐसा स्‍थल है जहां खुदाई के अवशेषों के जरिये पूर्व-मौर्य काल से लेकर मुगल काल तक दिल्ली के निरंतर इतिहास को देखा जा सकता है। उत्‍खनन के निष्‍कर्ष हमारे देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।’

जनवरी 2023 में दोबारा शुरू की गई खुदाई का उद्देश्य इस स्‍थल का पूरा कालक्रम स्थापित करना है। फिलहाल प्रारंभिक कुषाण स्तर की संरचनाएं उजागर हुई हैं, जिनकी गहराई अब तक 5.50 मीटर तक पहुंच चुकी है। इस खुदाई से प्राचीन शहर इंद्रप्रस्थ के बारे में और जानकारी मिलने की उम्मीद है।

इस उत्खनन से कलाकृतियों का एक उल्लेखनीय संग्रह प्राप्त हुआ है। यहां से प्राप्‍त प्रमुख वस्‍तुओं में वैकुंठ विष्णु की एक पत्थर की मूर्ति, गज लक्ष्मी की एक टेराकोटा पट्टिका, गणेश की एक पत्थर की मूर्ति, मुहरें, सिक्के, मनुष्यों एवं जानवरों की टेराकोटा मूर्तियां, विभिन्न पत्थरों के मनके, टी.सी. और हड्डी की सुई शामिल हैं। मिट्टी के बर्तनों एवं अन्य पुरावशेषों के साथ ये कलाकृतियां इस स्‍थल पर प्राचीन सभ्यता और व्यापारिक गतिविधियों के बारे में महत्‍वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं।

उत्खनन से यहां 2,500 वर्षों तक मानव आवास और उनकी निरंतर गतिविधियों के अस्तित्व का पता चला है जो पुराना किला के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करता है। एक छोटे से उत्खनित क्षेत्र से 136 से अधिक सिक्के और 35 मुहरें मिली हैं। इसी से पता चलता है कि व्यापार गतिविधियों के केंद्र के रूप में यह स्‍थल कितना महत्वपूर्ण रहा होगा।

इस दौरे के दौरान की गई एक घोषणा में संस्कृति एवं पर्यटन और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा, ‘खुदाई से प्राप्‍त अवशेषों को सुरक्षित एवं संरक्षित किया जाएगा और उसके लिए एक स्थल की व्‍यवस्‍था की जाएगी। इस स्‍थल को एक ओपन एयर साइट संग्रहालय के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा ताकि आगंतुक दिल्ली की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत का अनुभव कर सकें।’

इसके अलावा, पुराना किला में खुदाई का अवशेष जी20 शिखर सम्मेलन के प्रतिनिधियों के लिए आकर्षण का एक प्रमुख केंद्र भी होगा। यह शिखर सम्‍मेलन सितंबर 2023 में दिल्ली में आयोजित होगा और उसमें विभिन्‍न देशों के प्रमुख शामिल होंगे।

पुराना किला भारत की समृद्ध विरासत एवं सांस्कृतिक विविधता का एक वसीयतनामा है और उत्खनन कार्य से इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व के बारे में हमारी समझ काफी बेहतर होगी। ओपन एयर साइट संग्रहालय की स्थापना के साथ-साथ इसे सुरक्षित एवं संरक्षित करने के प्रयासों से यह सुनिश्चित होगा कि इस ऐतिहासिक खजाने को वर्तमान और भावी पीढ़ियों द्वारा सराहा जा सके।

पुराना किला अतीत में भी कई खुदाई का साक्षी रहा है। पद्म श्री प्रो. बी. बी. लाल ने 1955 और 1969-73 में यहां खुदाई की थी। उसके बाद 2013-14 और 2017-18 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के डॉ. वसंत कुमार स्वर्णकार के नेतृत्व में खुदाई की गई। इन प्रयासों से नौ सांस्कृतिक स्तरों का खुलासा हुआ है जो पूर्व-मौर्य, मौर्य, सुंग, कुषाण, गुप्त, उत्तर गुप्त, राजपूत, सल्तनत और मुगल सहित विभिन्न ऐतिहासिक काल का प्रतिनिधित्व करते हैं।

गज लक्ष्‍मी

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उत्खनन खाइयों का सामान्य दृश्य

मौर्यकालीन रिंग वेल

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वैकुंठ विष्णु

माननीय मंत्रीजी के दौरे की तस्वीरें

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