अप्रैल 22, 2026

प्रधानमंत्री ने दिल्ली स्थित मेजर ध्यान चंद राष्ट्रीय स्टेडियम में आदि महोत्सव का उद्घाटन किया

आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान आदि महोत्सव देश की आदि विरासत की भव्य प्रस्तुति कर रहा है: प्रधानमंत्री
21वीं सदी का भारत ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र पर चल रहा है: प्रधानमंत्री
इस आदि महोत्सव में माननीय प्रधानमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति ने इस उत्सव के वास्तविक मूल तत्‍व को समृद्ध किया है और इस राष्ट्रीय महोत्सव के उद्देश्य को गति दी है: अर्जुन मुंडा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली स्थित मेजर ध्यान चंद राष्ट्रीय स्टेडियम में मेगा राष्ट्रीय जनजातीय उत्सव, आदि महोत्सव का उद्घाटन किया। आदि महोत्सव राष्ट्रीय मंच पर जनजातीय संस्कृति को प्रदर्शित करने का एक प्रयास है। इसके तहत जनजातीय संस्कृति, शिल्प, खान-पान, वाणिज्य और पांरपरिक कला की भावना का उत्सव मनाया जाता है। यह जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन जनजातीय सहकारी विपणन विकास महासंघ लिमिटेड (ट्राइफेड) की वार्षिक पहल है।

आयोजन-स्थल पर पहुंचने पर प्रधानमंत्री ने भगवान बिरसा मुंडा को पुष्पांजलि अर्पित की और प्रदर्शनी में लगे स्टॉलों का अवलोकन किया।

उपस्थितजनों को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान आदि महोत्सव देश की आदि विरासत की भव्य प्रस्तुति कर रहा है। प्रधानमंत्री ने भारत के जनजातीय समाजों की प्रतिष्ठित झांकियों को रेखांकित किया और विभिन्न रसों, रंगों, सजावटों, परंपराओं, कला और कला विधाओं, रसास्वादन और संगीत को जानने-देखने का अवसर मिलने पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आदि महोत्सव कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी होने वाली भारत की विविधता और शान का परिचायक है। प्रधानमंत्री ने कहा, “आदि महोत्सव अनन्त आकाश की तरह है, जहां भारत की विविधता इंद्रधनुष के रंगों की तरह दिखती है।” जिस तरह इंद्रधनुष में विभिन्न रंग मिल जाते हैं, उसकी उपमा देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र की भव्यता उस समय सामने आती है, जब अंतहीन विविधताएं ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की माला में गुंथ जाती हैं और तब भारत पूरे विश्व का मार्गदर्शन करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आदि महोत्सव भारत की विविधता में एकता को शक्ति देता है तथा साथ में विरासत को मद्देनजर रखते हुए विकास के विचार को गति देता है।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का भारत ‘सबका साथ सबका विकास’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिसे पहले दूर-दराज माना जाता था, आज सरकार खुद वहां जा रही है और उस सुदूर स्थित और उपेक्षित को मुख्यधारा में ला रही है। उन्होंने कहा कि आदि महोत्सव जैसे कार्यक्रम देश में अभियान बन गये हैं और वे खुद अनेक कार्यक्रमों में सम्मिलित होते हैं। प्रधानमंत्री ने अपने सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में बिताये गये दिनों में जनजातीय समुदायों के साथ अपने निकट जुड़ाव को याद करते हुए कहा, “जनजातीय समाज का कल्याण मेरे लिए व्यक्तिगत रिश्तों और भावनाओं का विषय भी है।” उमरगाम से अम्बाजी के जनजातीय क्षेत्रों में बिताये अपने जीवन के महत्त्वपूर्ण वर्षों को याद करते हुये प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “मैंने आपकी परंपराओं को निकट से देखा है, उन्हें जिया है और उनसे बहुत कुछ सीखा है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि जनजातीय जीवन ने, “मुझे देश और उसकी परंपराओँ के बारे में बहुत-कुछ सिखाया है।”

प्रधानमंत्री के संबोधन को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

इस अवसर पर केन्‍द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा; जनजातीय कार्य राज्य मंत्री रेणुका सिंह सुरुता और बिश्वेश्वर टुडू; केन्‍द्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, केन्‍द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार, ट्राइफेड के अध्यक्ष रामसिंह राठवा और सचिव, जनजातीय कार्य अनिल कुमार झा भी उपस्थित थे।

मीडिया को संबोधित करते हुए केन्‍द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में अनुसूचित जनजातियों की ताकत, क्षमता और विरासत को अब उचित महत्व मिल रहा है। जनजातीय कार्य मंत्री ने कहा कि इस आदि महोत्सव में प्रधानमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति ने इस उत्सव के वास्तविक मूल तत्‍व को समृद्ध किया है और इस राष्ट्रीय महोत्सव के उद्देश्य को गति दी है।

मंत्री महोदय ने कहा कि आज दुनिया भारत के आदिवासियों को पहचानती है, यह सब हमारे प्रधानमंत्री के आदिवासियों को बढ़ावा देने के ठोस प्रयासों के कारण है। उनके आदर्श वाक्य ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ ने हमें रास्ता दिखाया है। एक पारदर्शी और आदर्श तरीके से जनजातीय लोगों के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए आदिवासियों की इस प्रगति का एक बड़ा प्रमाण हमारी अपनी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु हैं जो आदिवासी पृष्ठभूमि से हैं।

अर्जुन मुंडा ने यह भी कहा कि आदि महोत्सव हमारे आदिवासी पूर्वजों, विभिन्न अद्वितीय आदिवासी समुदायों की संस्कृति, उनकी टिकाऊ जीवनशैली और स्वयं आदिवासियों के योगदान का उत्सव मनाता है, जिन्होंने ग्लोबल वार्मिंग जैसी हमारी आधुनिक समस्याओं का स्वदेशी समाधान प्रदान किया है और हमारे प्राकृतिक पर्यावरण के साथ शांति और सद्भाव में रहने के महत्व पर प्रकाश डाला है।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री को कई उपहार भेंट किए गए, जिनमें लद्दाख की पश्मीना ऊन, पटचित्र पेंटिंग, छत्तीसगढ़ की ढोकरा मूर्तिकला और अन्ना टोकरी शामिल हैं। प्रधानमंत्री का स्वागत त्रिपुरा की पारंपरिक पगड़ी से भी किया गया।

इस अवसर पर, ऊर्जा और जीवंतता से ओतप्रोत कई नृत्य प्रस्तुतियां हुईं। नृत्यांगना रानी खानम द्वारा कोरियोग्राफ की गई, नृत्‍य कला में असम के बागुरूम्बा, छत्तीसगढ़ के पंथी नृत्य, तेलंगाना की गुसाड़ी, मध्य प्रदेश के बैगा परधौनी, सिक्किम के तमांग सेलो, गुजरात का सिद्धि धमाल, पश्चिम बंगाल का पुरुलिया छाऊ और उत्तराखंड का हरुल नृत्य (हरुल नृत्य) शामिल थे।

आयोजन के बाद, जनजातीय कार्य मंत्रालय में सचिव अनिल कुमार झा ने उद्घाटन समारोह में भाग लेने वाले एनसीसी और एनएसएस के 400 उम्मीदवारों के साथ बातचीत की।

आदि महोत्सव ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम, नई दिल्ली में 27 फरवरी, 2023 तक चलेगा।

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