मार्च 8, 2026

रक्षा मंत्री ने कंबोडिया में आसियान देशों के रक्षा मंत्रियों की नौवीं बैठक में भाग लिया; अंतर्राष्ट्रीय और सीमा पार आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए तत्काल दृढ़ वैश्विक प्रयास करने का आह्वान किया

“भारत एक स्वतंत्र, खुले एवं समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र की वकालत करता है, सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करते हुए विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का आह्वान करता है”
भावी पीढ़ियों के लिए एक स्थिर, सुरक्षित एवं अधिक सुरक्षित दुनिया की दिशा में सकारात्मक इरादे के साथ मिलकर काम करना चाहिए: राजनाथ सिंह

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 23 नवंबर, 2022 को सिएम रीप, कंबोडिया में 9वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (एडीएमएम प्लस) में भाग लिया। रक्षा सचिव गिरिधर अरामाने, चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ टू द चेयरमैन चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (सीआईएससी) एयर मार्शल बी आर कृष्णा और रक्षा एवं विदेश मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मंत्री के साथ थे।

एडीएमएम प्लस दस आसियान देशों और इसके आठ संवाद सहयोगी देशों, भारत, अमेरिका, रूस, चीन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड एवं दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रियों की एक वार्षिक बैठक है। वर्ष 2022 भारत-आसियान संबंधों की 30वीं वर्षगांठ भी है।

एडीएमएम प्लस फोरम में अपने संबोधन के दौरान राजनाथ सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय एवं सीमा पार आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए तत्काल और दृढ़ वैश्विक प्रयासों का आह्वान किया तथा इसे क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक सुरक्षा वातावरण पिछले कुछ दशकों में मौलिक रूप से बदल गया है, जिसमें आतंकवादी समूह नये दौर की तकनीकों की मदद से विचारधाराओं का प्रचार करने, धन हस्तांतरण और समर्थकों की भर्ती करने के लिए महाद्वीपों में अंतर्संबंध बना रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों सहित वैश्विक महामारी कोविड-19 के बाद सामने आई अन्य सुरक्षा चिंताओं की ओर भी फोरम का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के एक जिम्मेदार सदस्य के रूप में भारत ने बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता, दवाओं, टीकों और खाद्यान्न का वितरण करने में अपने सहयोगियों के साथ काम किया है।

राजनाथ सिंह ने क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा बढ़ाने और वैश्विक कॉमन्स की सुरक्षा के लिए भारत और एडीएमएम प्लस देशों के बीच व्यावहारिक, दूरंदेशी और परिणामोन्मुखी सहयोग को बढ़ावा देने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत एक मुक्त, खुले एवं समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र की वकालत करता है और सभी देशों की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करते हुए विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का आह्वान करता है। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि दक्षिण चीन सागर में आचार संहिता पर चल रही आसियान-चीन वार्ता अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से युनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सीज़ (यूएनसीएलओएस) के साथ पूरी तरह से संगत होनी चाहिए और उन राष्ट्रों के वैध अधिकारों एवं हितों के प्रति पक्षपातपूर्ण नहीं होनी चाहिए जो इन चर्चाओं में शामिल नहीं हैं।

रक्षा मंत्री ने सभी सदस्य देशों से हमारी भावी पीढ़ियों के लिए एक स्थिर, संरक्षित एवं अधिक सुरक्षित दुनिया की दिशा में सकारात्मक इरादे के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया।

Leave a Reply

Copyright © All rights reserved. Newsphere द्धारा AF themes.

Discover more from जन किरण

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading