सितम्बर 19, 2026

इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र का मजबूत आधार तैयार करना

इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ईसीएमएस

इलेक्ट्रॉनिक्स आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं और रोजमर्रा के जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है। यह संचारस्वास्थ्य सेवापरिवहनवित्तमैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्च को संचालित करता है। स्मार्टफोन और ऑटोमोबाइल से लेकर दूरसंचार नेटवर्क और औद्योगिक प्रणालियों तकइलेक्ट्रॉनिक्स तकनीकी प्रगति और आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देता है। इसलिएतकनीकी मजबूतीआर्थिक सुरक्षा और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता के लिए एक मजबूत घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम का होना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने पिछले एक दशक में उल्लेखनीय विस्तार देखा है। इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 के ₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹13.11 लाख करोड़ हो गया। इसी अवधि के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात ₹38,000 करोड़ से बढ़कर ₹4.24 लाख करोड़ हो गया। इस निरंतर वृद्धि ने भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लक्ष्यों के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है। अब अगली प्राथमिकता घरेलू स्तर पर कंपोनेंट बनाने, ज़्यादा वैल्यू एडिशन करने और सप्लाई-चेन को और अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाकर इस इकोसिस्टम को और बेहतर बनाना है।

इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) इसी बदलाव को गति देने के लिए तैयार की गई है। कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट और मटीरियल अभी भी आयात पर निर्भर हैं; इनमें प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी)कैमरा और डिस्प्ले मॉड्यूलकनेक्टरकैपेसिटरलीथियम-आयन सेल और रेयर-अर्थ मैग्नेट शामिल हैं। ईसीएमएस कंपोनेंटसब-असेंबलीसप्लाई-चेन उत्पादों और संबंधित कैपिटल गुड्स में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देती है। इसका उद्देश्य घरेलू  स्तर पर वैल्यू एडिशन को बढ़ाना और आयात पर निर्भरता को कम करना है। यह योजना भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में स्थिरता और सुरक्षा को मजबूत करने का भी लक्ष्य रखती है। इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन में गहराई से क्षमताएं विकसित करके, ईसीएमएस का उद्देश्य भारत की मैन्युफैक्चरिंग गति को एक आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम में बदलना है।

सेमीकॉन 2026 : भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को बढ़ावा देनासेमीकंडक्टर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों का आधार हैं। इसलिए तकनीकी मजबूती, आर्थिक सुरक्षा और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता के लिए एक मजबूत सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण आवश्यक है। इस रणनीतिक महत्व को देखते हुए, भारत सरकार नीतिगत सहयोग, बुनियादी ढांचे और वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर रही है।इसी दिशा में, सिलिकॉन से सिस्टम तक: पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण” विषय पर आयोजित SEMICON India 2026 का उद्घाटन 17 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के यशोभूमि में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने किया। 17 से 19 सितंबर 2026 तक आयोजित यह कार्यक्रम वैश्विक उद्योग जगत के प्रमुखों, नीति-निर्माताओं, निवेशकों, शिक्षाविदों और स्टार्टअप्स को एक मंच पर ला रहा है। यह भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने और पूरी मूल्य श्रृंखला में पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।कार्यक्रम की रूपरेखा देखें

ईसीएमएस की अब तक की प्रगति: नीति से लेकर उत्पादन तक

इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम असेंबली से आगे बढ़कर महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स और आवश्यक कच्चे माल की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में एक मजबूत और गहरे स्तर पर जुड़ी ‘स्वदेशी’ इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन के विकास को गति दे रही है।

  • ईसीएमएस को अप्रैल 2025 को अधिसूचित किया गया था। इसे ₹22,919 करोड़ के शुरुआती वित्तीय परिव्यय के साथ लॉन्च किया गया था।
  • इस योजना की कुल अवधि छह वर्ष हैजिसमें एक वर्ष की वैकल्पिक स्थापना अवधि (गेस्टेशन पीरियड) का प्रावधान है।
  • पूंजीगत व्यय प्रोत्साहन पांच (5) वर्षों के लिए उपलब्ध है।
  • केंद्रीय बजट 2026-27 में ईसीएमएस के वित्तीय परिव्यय को बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया गया है। यह बढ़ा हुआ आवंटन घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट के निर्माण को और अधिक सुदृढ़ और गहरा बनाएगा।
  • अगस्त 2026 तक, 15 राज्यों में कुल 106 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है।
  • ये परियोजनाएं 30 इलेक्ट्रॉनिक डोमेन उत्पादों को कवर करती हैं और इनमें ₹69,548 करोड़ के स्वीकृत निवेश का समावेश है।
  • 38 स्वीकृत प्लांट्स में उत्पादन पहले से ही चल रहा है। इसके अलावाअन्य 16 परियोजनाएं निर्माण या मशीनरी स्थापना के उन्नत चरणों में हैं।
  • इन स्वीकृत परियोजनाओं से ₹5.34 लाख करोड़ के उत्पादन का अनुमान है।
  • इनसे 74,628 प्रत्यक्ष रोजगार और 2.5 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार के सृजन का भी अनुमान है।
  • ईसीएमएस महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और मटीरियल्स के क्षेत्र में घरेलू क्षमताओं को मजबूत कर रहा है। अब कई उत्पाद श्रेणियों में उत्पादन क्षमता घरेलू मांग को पूरा करती है या उससे अधिक है।

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार की रणनीतिक पहल

  • राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति 2019 (एनपीई 2019): इसने भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग (ईएसडीएम) के लिए एक ग्लोबल हब के रूप में स्थापित करने का सर्वोपरि उद्देश्य निर्धारित किया। इसमें मुख्य कंपोनेंट्स का विकास करना और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण के लिए एक अनुकूल माहौल तैयार करना शामिल है।
  • बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना: इसके तहत पात्र टारगेट सेगमेंट के लिए वृद्धिशील बिक्री पर 4 प्रतिशत से 6 प्रतिशत तक के  परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव शुरू किए गए हैं। इसका मुख्य फोकस घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बड़े पैमाने पर बढ़ाना है।
  • इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और सेमीकंडक्टर्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की योजना (SPECS) और मॉडिफाइड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स (EMC 2.0): SPECS ने इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, सेमीकंडक्टर/डिस्प्ले फैब्रिकेशन, ATMP (असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग) यूनिट्स, खास सब-असेंबली और कैपिटल गुड्स के लिए 25 प्रतिशत कैपिटल-एक्सपेंडिचर इंसेंटिव दिया। EMC 2.0 ने  विश्व स्तरीय मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, कॉमन फैसिलिटीज और प्लग-एंड-प्ले क्षमता को सपोर्ट किया।
  • आईटी हार्डवेयर के लिए पीएलआई: यह घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षित करने के लिए उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन प्रदान करती है। पीएलआई 2.0 मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने, आयात पर निर्भरता कम करने और भारत को एक भरोसेमंद ग्लोबल सप्लाई-चेन हब के रूप में स्थापित करने के लिए इसी आधार को आगे बढ़ाती है।
  • सेमीकंडक्टर इंडिया प्रोग्राम: ₹76,000 करोड़ के सेमीकंडक्टर 1.0 प्रोग्राम ने एक व्यापक सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम का निर्माण किया। यह फैब, पैकेजिंग, टेस्टिंग, डिजाइन और संबंधित क्षमताओं के लिए सपोर्ट देकर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देता है। सेमीकंडक्टर 2.0 को जुलाई 2026 में ₹1,27,500 करोड़ के वित्तीय परिव्यय के साथ मंजूरी दी गई थी। इसका उद्देश्य भारत को एक ग्लोबल सेमीकंडक्टर हब के रूप में स्थापित करना है।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (ईएमसी) स्कीम: यह ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के लिए प्रत्येक 100 एकड़ भूमि पर ₹50 करोड़ की अधिकतम सीमा के साथ, परियोजना लागत के 50 प्रतिशत तक की वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
  • फेज्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम (पीएमपी – चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम): यह सेल्युलर मोबाइल फोन और उनके प्रमुख सब-असेंबली में घरेलू वैल्यू एडिशन को बढ़ाने के लिए टैरिफ पर आधारित एक व्यवस्थित तरीका बनाता है।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (ईडीएफ): यह ईएसडीएम और आईटी क्षेत्र में रिस्क कैपिटल उपलब्ध कराने तथा मार्केट-बेस्ड इनोवेशन, प्रोडक्ट डिजाइन और स्टार्टअप विकास को बढ़ावा देने के लिए वेंचर फंड्स (डॉटर फंड्स या सहायक फंड्स) में निवेश करने वाले’फंड ऑफ फंड्स’ के रूप में कार्य करता है।

ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में अग्रसर

इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग महत्वाकांक्षाओं को निवेश, उत्पादन और रोजगार में बदलने में मदद कर रही है। जैसे-जैसे परियोजनाएं स्वीकृतियों से निकलकर निर्माण और व्यावसायिक उत्पादन की ओर बढ़ रही हैं, ईसीएमएस देश के मैन्युफैक्चरिंग आधार को व्यापक बना रही है, घरेलू स्तर पर वैल्यू एडिशन को गहरा कर रही है और ग्लोबल वैल्यू चेन के साथ एकीकरण को मजबूत कर रही है। चूंकि इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात पहले ही एक प्रमुख निर्यात श्रेणी के रूप में उभर रहा है, इसलिए भारत 2030 तक $500 बिलियन (₹47.75 लाख करोड़) के घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स  मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम और $150 बिलियन (₹14.33 लाख करोड़) के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का लक्ष्य रख रहा है, जो एक विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात केंद्र बनने के लक्ष्य  को मजबूत करता है।

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