सितम्बर 19, 2026

सकल घरेलू उत्पाद में भारत का प्रभावशाली प्रदर्शन

7.8 प्रतिशत वास्तविक जीडीपी वृद्धि के साथ 2026-27 की मजबूत शुरुआत

2026-27 के लिए भारत की अर्थव्यवस्था की शुरुआत मजबूती के साथ हुई जिसमें विनिर्माण और सेवाओं के अच्छे प्रदर्शन के साथ पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी में 7.8 प्रतिशत तक वृद्धि हुई जबकि वास्तविक सकल मूल्य वृद्धि में  8.2 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई। निवेश 11.9प्रतिशत तक बढ़ गयाघरेलू खपत 7.1 प्रतिशत बढ़ गई और निर्यात 12.0 प्रतिशत बढ़ गया। यह गति जुलाई में भी जारी रही। औद्योगिक उत्पादन में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि अप्रैल-जुलाई के दौरान संचयी व्यापारिक और सेवाओं के निर्यात में वर्ष-दर-वर्ष 13.16 प्रतिशत की वृद्धि हुई। जुलाई में उद्योग और सेवाओं के लिए ऋण क्रमशः 20.0 प्रतिशत और 22.9 प्रतिशत बढ़ा।

भारत की समग्र आर्थिक स्थिति

भारत ने लगातार भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार को लेकर अनिश्चितता के बीच 2026-27 में प्रवेश किया। इन बाहरी दबावों के बावजूद 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी 7.8 प्रतिशत बढ़ी। यह परिणाम 2023-24 से 2026-27 तक चार वर्षों की अवधि के दौरान पहली तिमाही में दर्ज वास्तविक जीडीपी की उच्चतम वृद्धि को रेखांकित करता है। घरेलू मांग में तेजी तथा विनिर्माण और सेवाओं में लाभ से इसे समर्थन मिला है।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका का उल्लेख किया है। जुलाई 2026 में इसने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक और वैश्विक विकास का प्रमुख इंजन बताया।

भारत की ऋण संबंधी साख के मूल्यांकन में भी इसकी झलक मिलती है कि विश्व को भारत की अर्थव्यवस्था पर पूरा भरोसा है। अगस्त 2026 में एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने स्थिर दृष्टिकोण के साथ भारत की ‘बीबीबी/-2′ सॉवरेन रेटिंग की पुष्टि की। इससे पहले, 18 वर्षों के अंतराल के बाद 2025 में इसकी दीर्घकालिक रेटिंग को ‘बीबीबी’ में अपग्रेड किया गया था।

2026-27 की मजबूत शुरुआत

पहली तिमाही में विकास की गति तेज़

2026-27 की पहली तिमाही (क्यू1) में आर्थिक विकास मजबूत हुआ। यह परिणाम इस तिमाही के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के 7.0 प्रतिशत के अनुमान को पार कर गया है।

  • वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी या स्थिर कीमतों पर जीडीपी 81.36 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। इसने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही के 6.9 प्रतिशत की तुलना में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।
  • नॉमिनल जीडीपी या वर्तमान कीमतों पर जीडीपी 88.27 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। इसने विगत वर्ष के 8.1 प्रतिशत की तुलना में 10.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।
सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) एक लेखांकन अवधि में घरेलू अर्थव्यवस्था में उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य है।
  • वास्तविक सकल मूल्य वृद्धि (जीवीए) 73.82 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है जिसमें विगत वर्ष के 7.0 प्रतिशत की तुलना में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
  • नॉमिनल जीवीए 80.53 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है जिसमें विगत वर्ष के 8.1 प्रतिशत की तुलना में 11.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है
सकल मूल्य वृद्धि (जीवीए) अर्थव्यवस्था में उत्पादकों, उद्योगों या क्षेत्रों के व्यक्तिगत योगदान को मापता है।

संशोधित अनुमान से सुदृढ़ हुई विकास की तस्वीर

विगत तीन वित्त वर्षों के लिए वास्तविक जीडीपी को बढ़ाकर संशोधित किया गया है। संशोधनों से पता चलता है कि पहली तिमाही का प्रदर्शन पूर्ववर्ती अनुमान की तुलना में मजबूत विकास पथ का अनुसरण करता है।

तालिका-1: संशोधित वास्तविक जीडीपी वृद्धि अनुमान
वित्त वर्षपूर्ववर्ती अनुमानसंशोधित अनुमान
2023-247.2 प्रतिशत7.3 प्रतिशत
2024-257.1 प्रतिशत7.2 प्रतिशत
2025-267.7 प्रतिशत7.8 प्रतिशत
स्रोत: सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई)
संशोधित अनुमानों का आधारवार्षिक संशोधित अनुमान आधार वर्ष 2022-23 के साथ नए मूल्य और उत्पादन सूचकांकों के उपयोग को दर्शाते हैं। इसमें आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (पीपीआईऔर बैंकिंग सर्विसेज प्राइस इंडेक्स (बीकेएसपीआईशामिल हैं। इसमें विभिन्न स्रोतों से अद्यतन प्रशासनिक आंकड़े भी शामिल किए गए हैं।राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी संशोधनों के बारे में अधिक पढ़ने के लिए, कृपया देखें: Counting What Counts: Strengthening India’s National Accounts and Core Economic Statistics

विकास के कारकों की संरचना

प्रमुख व्यय घटकों में रुझान

पहली तिमाही में आर्थिक गतिविधियों को निवेश में तीव्र वृद्धि, घरेलू खपत में मजबूती और निर्यात में बढ़ोतरी का समर्थन मिला।

तालिका-2: वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद के प्रमुख व्यय घटक
घटकव्‍याख्‍या 2025-26 पहली तिमाही2026-27 पहली तिमाही
सकल स्थिर पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ)निवेश का घरेलू वित्त पोषण5.8 प्रतिशत11.9 प्रतिशत
अंतिम निजी उपभोग व्यय (पीएफसीई)वस्तुओं और सेवाओं पर परिवारों द्वारा खर्च6.8 प्रतिशत7.1 प्रतिशत
निर्यातदुनिया के बाकी हिस्सों को आपूर्ति की जाने वाली वस्तुएं और सेवाएं6.0 प्रतिशत12.0 प्रतिशत
स्रोत: सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई)

प्रमुख क्षेत्रों में विकास का विस्तार

व्यय में मजबूती उत्पादन पक्ष पर भी परिलक्षित हुई जिसमें तृतीयक और द्वितीयक क्षेत्रों का तेजी से विस्तार हो रहा है।

  • वास्तविक जीवीए के संदर्भ में तृतीयक क्षेत्र में 2026-27 की पहली तिमाही में 10.0 प्रतिशत की वृद्धि हुई जो 2025-26 की पहली तिमाही में हुई 8.0 प्रतिशत की वृद्धि से अधिक है। इस क्षेत्र में वित्तीयरियल एस्टेटआईटी और पेशेवर सेवाओं में 12.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई
  • द्वितीयक क्षेत्र में 2026-27 की पहली तिमाही में 8.6 प्रतिशत का विस्तार हुआ जबकि विगत वर्ष की इसी तिमाही में यह 6.1 प्रतिशत था।
    • प्रमुख क्षेत्रों में मजबूत उत्पादन के समर्थन से विनिर्माण में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। कई विनिर्माण श्रेणियों ने भी इस तिमाही के दौरान अच्छा प्रदर्शन किया:
तालिका-3: प्रमुख विनिर्माण श्रेणियों में उल्लेखनीय लाभ दर्ज(सालदरसाल आईआईपी वृद्धि (प्रतिशत))
विनिर्माण श्रेणी2025-26पहली तिमाही2026-27पहली तिमाही
विद्युत उपकरण9.727.0
अन्य परिवहन उपकरण3.819.5
कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक और ऑप्टिकल उत्पाद8.812.4
मशीनरी और उपकरण6.69.1
स्रोत: सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई)
    • आईआईपी के अंतर्ग 2026-27 की पहली तिमाही में पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन भी 15.2 प्रतिशत बढ़ा जबकि एक साल पहले यह 8.8 प्रतिशत था। बुनियादी ढांचे/निर्माण संबंधी सामग्रियों में भी 7.2 प्रतिशत की उच्च वृद्धि दर्ज की गई जो विगत वर्ष के 6.1 प्रतिशत से अधिक है।


हाल के संकेतक निरंतर जारी प्रगति के सूचक

मजबूत और स्थिर औद्योगिक गतिविधि

  • जुलाई 2026 में औद्योगिक उत्पादन में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि विगत वर्ष यह 5.4 प्रतिशत थी। अप्रैलजुलाई 2026-27 में इसमें विगत वर्ष की समान अवधि के 4.0 प्रतिशत की तुलना में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि की गई
  • जुलाई 2025 की तुलना में जुलाई 2026 में पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन 16.1 प्रतिशत बढ़ गया। कच्चे माल और मध्यवर्ती वस्तुओं में 10.0 प्रतिशत और बुनियादी ढांचे और निर्माण सामग्रियों में 6.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
  • प्रमुख उद्योगों के सूचकांक (आईसीआईने जुलाई 2025 की तुलना में जुलाई 2026 में 5.4 प्रतिशत की वर्षदरवर्ष वृद्धि दर्ज की। अप्रैलजुलाई 2026-27 के दौरानआईसीआई में 4.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई जो विगत वर्ष की इसी अवधि में 1.5 प्रतिशत थी।

निर्यात का मजबूत प्रदर्शन

  • भारत से वस्तुओं और सेवाओं का कुल मिलाकर किया जानेवाला निर्यात जुलाई 2026 में अनुमानित 80.14 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया जो जुलाई 2025 की तुलना में 13.31 प्रतिशत अधिक है।
  • अप्रैल-जुलाई 2026-27 के दौरान संचयी निर्यात का अनुमान 316.42 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। यह अप्रैलजुलाई 2025-26 के दौरान दर्ज 279.63 बिलियन अमेरिकी डॉलर से 13.16 प्रतिशत अधिक है।

प्रमुख क्षेत्रों में ऋण का विस्तार

जुलाई 2026 में प्रमुख क्षेत्रों में बैंक ऋण वृद्धि मजबूत हुई।

  • कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए ऋण में जुलाई 2025 के 7.3 प्रतिशत की तुलना में वर्ष-दर-वर्ष 17.0 प्रतिशत वृद्धि हुई।
  • उद्योग को ऋण में 20.0 प्रतिशत की वृद्धि हुई जो जुलाई 2025 के 6.5 प्रतिशत से अधिक है।
  • सेवा क्षेत्र को ऋण जुलाई 2025 के 10.2 प्रतिशत की तुलना में 22.9 प्रतिशत बढ़ गया।

विकास को बढ़ावा देने वाले हालिया नीतिगत उपाय

विनिर्माण, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और निवेश तथा कृषि के क्षेत्रों तक 2026 के दौरान शुरू किए गए नीतिगत उपायों ने इन आर्थिक रुझानों को और मजबूत किया है।

विनिर्माण और उद्योग

  • मोबाइल फोन निर्माण योजना (जुलाई 2026) का परिव्यय 2030-31 तक 62,500 करोड़ रुपये है। इसका उद्देश्य उत्पादन का और विस्तार करना, बेहतर मूल्यवर्धन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करना है।
  • जुलाई 2026 में स्वीकृत सेमीकॉन 2.0 का बजट परिव्यय 1,27,500 करोड़ रुपये है। यह चिप डिजाइन और विनिर्माण, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान, सामग्री, उपकरण और प्रतिभा विकास का समर्थन करता है।
  • जुलाई 2026 में स्वीकृत, भव्य रसायन योजना का परिव्यय वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक 5 वर्षों की अवधि के लिए 3,030 करोड़ रुपये है। यह देश भर में तीन समर्पित रासायनिक पार्कों की स्थापना में सहायता करेगा।
  • आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना 5.0 (ईसीएलजीएस 5.0) से पश्चिम एशिया की स्थिति को देखते हुए 2.55 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त ऋण प्रवाह का लक्ष्य रखा गया है। यह लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्यमों के लिए 100 प्रतिशत और गैर-एमएसएमई के लिए 90 प्रतिशत गारंटी कवरेज प्रदान करता है।  
  • अगस्त 2026 में संसद में पारित एमएसएमई विकास (संशोधनविधेयक, 2026 अनुपालन को सरल बनाता है तथा एमएसएमई के विकास और प्रतिस्पर्धात्मकता का समर्थन करता है।

ऊर्जा सुरक्षा

  • राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजनासमुद्र मंथन का वित्त वर्ष 2030-31 तक 84,084 करोड़ रुपये का परिव्यय है। यह योजना भारत की अपतटीय ऊर्जा क्षमता को सामने लाने के लिए अन्वेषण में सहयोग करेगी।  
  • सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना को मई 2026 में 37,500 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ स्वीकृति दी गई थी। इससे 2030 तक 100 मीट्रिक टन कोयला गैसीकरण के लक्ष्य को सहयोग मिलेगा और आयात निर्भरता को कम करने का लक्ष्य है।
  • राष्ट्रीय सर्कुलर जैव ऊर्जा योजना गोबरधन को अगस्त 2026 में 23,731 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ अनुमोदित किया गया था। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2035-36 तक लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य कृषि, पशु और नगरपालिका के जैविक कचरे से संपीड़ित बायोगैस उत्पादन को बढ़ाना है।
  • जुलाई 2026 में स्वीकृत प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (पीएम-एसएसवाई) का परिव्यय 5,070 करोड़ रुपये है। यह वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 के दौरान स्वीकृत परियोजनाओं के के ही साथ 5,000 मेगावाट की फ्लोटिंग सौर परियोजनाओं का समर्थन करती है जिनके साथ ऊर्जा भंडारण की सुविधा होगी

व्यापार और निवेश

  • भारत-यूके सीईटीए और सामाजिक सुरक्षा पर समझौता 15 जुलाई 2026 को लागू हुआ। यह यूके को बिना किसी शुल्क के भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात के लिए पहुंच प्रदान करता है।
  • भारत-इज़राइल द्विपक्षीय निवेश समझौता (बीआईए) 4 जुलाई 2026 को लागू हुआ। इसका उद्देश्य द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करना और निवेश के लिए अधिक सुरक्षित और पूर्वानुमानित ढांचा प्रदान करना है।
  • सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआईकी भागीदारी का विस्तार करने के लिए जून 2026 में सुधारों की घोषणा की गई। इससे जुड़े प्रमुख कदमों में कर छूट, पूरी तरह से सुलभ मार्ग के तहत व्यापक कवरेज और सुव्यवस्थित निवेश मानदंड शामिल हैं। सुधारों का उद्देश्य दीर्घकालिक विदेशी पूंजी को आकर्षित करना और भारत के ऋण बाजार का दायरा और उसमें निवेशकों की भागीदारी को बढ़ाना है।
  • मई 2026 में लॉन्च किया गया भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल (बीएमआईपी) में 12,980 करोड़ रुपये की सॉवरेन गारंटी है। यह वैश्विक अस्थिरता के बीच विदेशी बीमाकर्ताओं पर निर्भरता को कम करते हुए समुद्री जोखिम कवर प्रदान करता है।

कृषि: कृषि आय और उत्पादन सहायता

  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) को वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने के लिए 3.15 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ स्वीकृति दी गई है। यह योजना प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से पात्र किसान परिवारों को आय सहायता प्रदान करती है।
  • सरकार ने विपणन सीजन 2026-27 के लिए किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 14 खरीफ फसलों के लिए एमएसपी में वृद्धि की। सबसे अधिक पूर्ण वृद्धि सूरजमुखी के बीजकपासनाइजरसीड और तिल के लिए की गई
  • मई 2026 में स्वीकृत कपास उत्पादकता मिशन (कपास कांतिका परिव्यय 2026-27 से 2030-31 के लिए 5,659.22 करोड़ रुपये है। यह कपास किसानों को आधुनिक अनुसंधान और प्रौद्योगिकियों से जोड़ता है, कीट जोखिम को कम करता है और उत्पादन प्रणालियों और कृषि व्यापार को मजबूत करता है।  
  • यूरिया-2026 के लिए राष्ट्रीय निवेश नीति (एनआईपीयू-2026) का उद्देश्य गैस आधारित यूरिया विनिर्माण इकाइयों में नए निवेश को बढ़ावा देना है। यह उच्च घरेलू उत्पादन और यूरिया में आत्मनिर्भरता के भारत के लक्ष्य का समर्थन करता है।

ये कदम मेक इन इंडिया, उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं, पीएम-किसान, निर्यात संवर्धन मिशन और अन्य सहित एक दशक की नीतिगत पहलों पर आधारित हैं।

उपसंहार

2026-27 की शुरुआत में भारत का आर्थिक प्रदर्शन अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में व्यापक आधार वाली गति को दर्शाता है। निवेश में तेजी आई है, घरेलू खपत मजबूत बनी हुई है, जबकि विनिर्माण, सेवाओं और निर्यात ने अतिरिक्त सहायता प्रदान की है।

हाल के संकेतक बताते हैं कि यह ताकत पहली तिमाही से आगे बढ़ गई है। विभिन्न नीतिगत उपायों के माध्यम से निरंतर सरकारी समर्थन ने भी आर्थिक गतिविधियों की गति को बनाए रखने में मदद की है।

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