सितम्बर 21, 2026

दीक्षा: भारत की डिजिटल शिक्षा प्रणाली को सशक्त बनाना

शिक्षा के लिए एक राष्ट्रीय मंच

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर नॉलेज शेयरिंग (दीक्षा) एक खुला मंच है जिससे देश भर के छात्र और शिक्षक अनेक भाषाओं में अच्छी गुणवत्‍ता वाली पाठ्यक्रम से जुड़ी डिजिटल शिक्षा सामग्री का उपयोग कर सकते हैं। यह शिक्षा मंत्रालय की ‘पीएम ई-विद्या’ पहल का एक अहम हिस्सा है जिसका लक्ष्‍य ऑनलाइन माध्यमों से पढ़ाई को जारी रखना है। दीक्षा को विद्यालयी शिक्षा के लिए देश का वन नेशनवन डिजिटल प्लेटफॉर्म‘ कहा जाता है। इस मंच की शुरूआत 2017 में की गई थी। यह राष्‍ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा केन्‍द्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्‍थान (सीआईईटी) के सहयोग से चलाया जाता है।

दीक्षा को अलग-अलग ज़रूरतों के अनुसार कस्टमाइज़ किया जा सकता है और इसलिए इसे लगभग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विभिन्न बोर्डों ने बड़े पैमाने पर अपनाया है। यह के-12 (किंडरगार्टन से 12वीं कक्षा तक) की पूरी डिजिटल शिक्षा सामग्री उपलब्‍ध कराता है। इसमें बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता (एफएलएन) से लेकर वरिष्‍ठ माध्‍यमिक शिक्षा तक सब कुछ शामिल है।

दीक्षा का लक्ष्‍य प्रौद्योगिकी और नवाचार से चलने वाली एक गतिशील शिक्षा प्रणाली बनाना है। यह अलग-अलग तरह के सीखने वालों की आवश्‍यकताओं के लिए आसान, रोचक और व्‍यक्तिगत अनुभव को बढ़ावा देता है। डिजिटल और संवादात्‍मक संसाधनों के माध्‍यम से शिक्षा पारंपरिक कक्षाओं से आगे बढ़ती है। यह छात्रों में ऐसे कौशल विकसित करता है जो अकादमिक सफलता, व्यक्तिगत विकास और सर्वांगीण विकास में सहायता करते हैं।

इस मंच पर मीडिया-रिचइंटरैक्टिव संसाधन हैं।  इन संसाधनों में 2डी/3डी एनिमेशनएआर अनुभवसिमुलेशनवर्चुअल लैब और साइन लैंग्वेज वीडियो शामिल हैं। इन्हें अवधारणात्‍मक स्पष्टता बढ़ाने और सीखने के अलग-अलग तरीकों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें क्‍यूआरकोड वाली एनर्जाइज़्ड टेक्स्टबुक हैं जो कक्षा में आसानी से जुड़ने के लिए एनसीईआरटी की वास्‍तविक पुस्‍तकों को  वीडियो, संवादात्‍मक और शिक्षकों के मार्गदर्शन से जोड़ती हैं। इसमें दिव्यांगों के लिए डेज़ी (डिजिटल एक्सेसिबल इंफॉर्मेशन सिस्टम) फॉर्मेट, टेक्स्ट-टू-स्पीच और इंडियन साइन लैंग्वेज (आईएसएल) वीडियो जैसी समावेशी सुविधाएं है।

दीक्षा असंख्‍य अभ्‍यास प्रश्‍नोंविस्‍तृत समाधानोंअनुकूल आकलन और योग्यता-आधारित प्रश्न बैंक द्वारा व्‍यक्तिगत शिक्षा को  बढ़ावा देता है। ये कमियों की पहचान करता है और समय पर सुधार करने में सहायता करता है। यह निष्‍ठा और राज्य-विशिष्ट टीपीडी मॉड्यूल के माध्‍यम से शिक्षकों के पेशेवर विकास में सहायता करता है और देश भर के शिक्षकों के कौशल को बढ़ाने के लिए उनकी क्षमता के अनुसार सीखने वाला प्रमाणित प्रशिक्षण देता है। यह एकीकृत प्रणाली विषय वस्‍तु, क्यूरेट करने, उपयोग करने और विश्‍लेषण को एक करके राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप समावेशीडेटा-आधारित और आनंददायक शिक्षा को बढ़ावा देता है।

मंच का रूप और विषय वस्‍तु का सत्यापन

दीक्षा मंच को विकेंद्रीकृत भागीदारी और विषय वस्‍तु के कठोर सत्यापन को सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका रूप समय-समय पर समीक्षा द्वारा गुणवत्ता मानकों को बनाए रखते हुए योगदान को संभव बनाता है।

  • यह मंच एक संघ की तरह काम करता है जिसमें प्रत्‍येक प्रतिभागी विषय वस्‍तु अपलोड कर सकता है और स्वतंत्र रूप से संचालित कर सकता है।
  • प्रतिभागी देश भर से अपनी मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषाओं में इलेक्ट्रॉनिक विषय वस्‍तु और पाठ्यक्रम अपलोड करते हैं।
  • इस तरह से भाषापाठ्यक्रम के तालमेल और पढ़ाने के तरीकों में बदलाव किया जा सकता है जिससे देश भर के अलग-अलग तरह के सीखने वालों की आवश्‍यकताएं पूरी होती हैं।
  • इस मंच पर मौजूद डिजिटल शिक्षा संसाधन संदर्भ के अनुसार सही और लगातार अद्यतन होते रहते हैंऔर सीखने वालों के लिए आसानी से उपलब्ध होते हैं।
  • सीआईईटी निर्धारित दिशा-निर्देशों के आधार पर समय-समय पर प्रतिभागियों की विषय वस्‍तु की जांच और पुष्टि करता है।
  • सभी प्रतिभागियों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी-अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में उम्र और कक्षा के अनुसार सही विषय वस्‍तु उपलब्ध कराएं।

 बिना रुकावट के सीखना: ऑफ़लाइन पहुंच और अनेक भाषाओं में सुविधा

दीक्षा मंच का उपयोग ऑनलाइन और ऑफ़लाइन दोनों तरह से किया जा सकता है। सीखने वाले पहले से ही विषय वस्‍तु डाउनलोड कर सकते हैं और बिना एक्टिव इंटरनेट कनेक्शन के भी आसानी से उसका उपयोग कर सकते हैं।

  • राज्य और केंद्र शासित प्रदेश विश्‍वसनीय ऑफ़लाइन पहुंच सुनिश्चित करने के लिए स्मार्ट क्लास बोर्ड पर पहले से ही विषय वस्‍तु लोड कर देते हैं
  • यह मंच राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसार प्रारंभिक स्तर से ही अनेक भाषाओं में विद्यालयी शिक्षा को बढ़ावा देता है।
  • एनसीईआरटी ने कक्षा 1, 2, 3 और 6 की पाठ्यपुस्तकों का 22 अनुसूचित भाषाओं में अनुवाद किया है।
  • ये अनूदित पाठ्यपुस्तकें एनसीईआरटी के पोर्टल पर भी उपलब्ध हैं, जिससे छात्रों के लिए सीखना आसान हो जाता है।
  • सीखने वाले और शिक्षक दोनों ही इस मंच का उपयोग करते हैं । यह मंच 135 भाषाओं- 128 भारतीय और सात विदेशी भाषाओं में उपलब्‍ध है।

 सफलता दिलाने वाली विशेषताएं

यह मंच उपयोगकर्ताओं के लिए इन माध्‍यमों और क्षमताओं पर आधारित एक अत्याधुनिक शिक्षण प्रणाली उपलब्ध कराता है।

एनर्जाइज़्ड टेक्स्टबुक  टीचर प्रोफेशनल डेवलपमेंटक्वेश्चन बैंक
कंटेंट सोर्सिंग  कंटेंट ऑथरिंगक्विज़
कंटेंट कंजम्पशनडेटा टूल और डैशबोर्डचैटबॉट
डिजिटल क्रेडेंशियलकोलेबोरेशनफिजीटल
सीक्‍यूबसर्वेलैंग्‍वेज ट्रांसलेशन
मेंटोरिंगसनबर्ड रजिस्ट्री और क्रेडेंशियल 
  • सोचने-समझने की क्षमता और छात्रों की रचनात्‍मकता को बढ़ावा देने के लिए 614 से अधिक वर्चुअल लैब बनाई गई हैं और उपलब्ध कराई गई हैं।
  • शिक्षकों के लिए पेशेवर विकास पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए राज्‍य परिषदों और जिला स्‍तरीय संस्‍थाओं के 50 संकाय सदस्यों को प्रशिक्षण दिया गया है।
  • शिक्षकों के लिए ये पाठ्यक्रम शिक्षण प्रबंधन प्रणाली (एलएमएस) के माध्‍यम से उपलब्ध कराए जाते हैं। यह  डिजिटल शिक्षा मंच से जुड़ा हुआ है।

 बड़े पैमाने पर शिक्षा को आगे बढ़ाना: मुख्य आंकड़े (27 जून, 2026 तक)

दीक्षा शिक्षार्थियों और शिक्षकों को सशक्त बनाने से लेकर राष्ट्रव्यापी डिजिटल शिक्षा पहल को बढावा देकर सार्थक बदलाव ला रहा है।

उपयोगकर्ताओं की संख्‍या

सक्रिय उपयोगकर्ताप्रतिदिन लगभग 3 लाख
पंजीकृत उपयोगकर्ता2.25 करोड़

पंजीकृत उपयोगकर्ता – राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश के अनुसार

राज्य / केंद्र शासित प्रदेशपंजीकृत उपयोगकर्ताराज्य / केंद्र शासित प्रदेशपंजीकृत उपयोगकर्ता
अंडमान और निकोबार53,379लक्षद्वीप1,881
आंध्र प्रदेश5.91 लाखमध्य प्रदेश10.35 लाख
अरुणाचल प्रदेश45,389महाराष्ट्र10.86 लाख
असम3.72 लाखमणिपुर55,389
बिहार12.52 लाखमेघालय64,612
चंडीगढ़82,815मिजोरम27,170
छत्तीसगढ4.55 लाखनगालैंड40,707
दादरा और नगर हवेली11,885ओडिशा6.02 लाख
दिल्ली4.79 लाखपुदुचेरी22,897
गोवा36,424पंजाब6.75 लाख
गुजरात14.64 लाखराजस्थान11.41 लाख
हरियाणा5.20 लाखसिक्किम27,220
हिमाचल प्रदेश2.07 लाखतमिलनाडु5.55 लाख
जम्मू और कश्मीर2.97 लाखतेलंगाना3.51 लाख
झारखंड4.07 लाखत्रिपुरा51,833
कर्नाटक9.69 लाखउत्तराखंड2.85 लाख
केरल3.02 लाखउतर प्रदेश26.80 लाख
लद्दाख14,197पश्चिम बंगाल4.93 लाख

उपयोग संख्‍या

शिक्षण सत्र575.25 करोड़
शिक्षण मिनट6,691.82 करोड़

विषय वस्‍तु की संख्‍या

एनर्जाइज़्ड पाठ्यपुस्तकें7,687
इलेक्ट्रॉनिक विषय वस्‍तु3.67 लाख

पाठ्यक्रमों की संख्‍या

नामांकन18.77 करोड़
समापन14.82 करोड़
जारी प्रमाण पत्र12.79 करोड़
पाठ्यक्रम347

 भावी शिक्षण को आकार देना

दीक्षा एक अधिक संबद्ध, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार शिक्षण प्रणाली की दिशा में एक महत्‍वपूर्ण प्रयास है। यह शिक्षार्थी, शिक्षकों, संस्थानों और संसाधनों को एक साथ लाकर भौगोलिक और भाषाई बाधाओं को दूर करने में सहायता करता है। इसका निरंतर विकास प्रत्‍येक छात्र तक अच्छी गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के संकल्प को दर्शाता है। यह मंच अलग-अलग आवश्‍यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों को सार्थक अवसर भी देता है। जैसे-जैसे शिक्षा में डिजिटल नवाचार को अपनाया जा रहा है, दीक्षा शिक्षण, अधिगम और आपसी सहयोग को मज़बूत कर रहा है। यह पूरे देश में लगातार निरंतर प्रगति और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने में एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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