जून 14, 2026

भारत और नेपाल ने द्विपक्षीय वित्तीय संपर्क को मजबूत करने के लिए सीमा पार धन प्रेषण तंत्र की शुरुआत की

भारत के यूपीआई और नेपाल के राष्ट्रीय भुगतान इंटरफेस के प्रत्‍यक्ष एकीकरण से निर्बाध, सुरक्षित और त्वरित पी2पी धन हस्तांतरण संभव हुआ
यह पहल वित्तीय समावेशन को मजबूत करती है, डिजिटल व आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देती है तथा दोनों देशों के यात्रियों और व्यवसायों के लिए सुविधा बढ़ाती है

डिजिटल वित्तीय संपर्क और पड़ोसी देशों के साथ सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में भारत और नेपाल ने 6 जून, 2026 को आधिकारिक तौर पर व्‍यक्ति-से-व्‍यक्ति (पी2पी) सीमा-पार धन प्रेषण तंत्र का शुभारंभ किया।

यह नव-संचालित प्रणाली भारत के एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) और नेपाल के राष्ट्रीय भुगतान इंटरफेस (एनपीआई) के बीच एक सीधा संबंध स्थापित करती है। यह एकीकरण दोनों देशों के नागरिकों को मोबाइल बैंकिंग अनुप्रयोगों और डिजिटल वॉलेट के माध्यम से निर्बाध, वास्तविक समय और सुरक्षित रूप से तत्काल धन हस्तांतरण करने में सक्षम बनाता है।

यूपीआई-एनपीआई जुड़ाव वित्तीय समावेशन में एक बडी प्रगति को दर्शाता है, जो भारत और नेपाल के बीच मजबूत आर्थिक और डिजिटल संबंधों को बढ़ावा देता है। यह सुलभ, सुरक्षित और किफायती सीमा पार भुगतानों के क्षेत्रीय लक्ष्यों के साथ पूरी तरह मेल खाता है, जिससे दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक संबंध मजबूत होते हैं।

आर्थिक और डिजिटल एकीकरण को बढ़ावा:

यह तकनीकी एकीकरण नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया की अंतरराष्ट्रीय शाखा-एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) और नेपाल क्लियरिंग हाउस लिमिटेड (एनसीएचएल) के बीच सहयोग के माध्यम से निष्‍पादित किया गया।

रणनीतिक प्रभाव: यूपीआई-एनपीआई धन प्रेषण लिंकेज की मुख्‍य विशेषताएं:

यह डिजिटल भुगतान गलियारा दोनों देशों के बीच लेन-देन की प्रणाली में महत्‍वपूर्ण परिवर्तन लाएगा और निम्‍नलिखित लाभ प्रदान करेगा:

  • यात्रियों के लिए अधिक सुविधा: मुद्रा विनिमय की जटिलताओं, बड़ी मात्रा में नकदी साथ रखने की आवश्‍यकता तथा अपरिचित विदेशी विनिमय शुल्कों से मुक्ति मिलेगी।
  • स्थानीय व्यापारियों के लिए आर्थिक लाभ: नेपाल के व्यवसायों को बडी संख्‍या में प्रौ‍द्योगिकी-सक्षम भारतीय पर्यटकों और ग्राहकों तक सीधी पहुंच प्राप्त होगी, जिससे लेनदेन की मात्रा बढेगी।
  • परिचालन दक्षता: स्थानीय व्यापारियों को नकदी प्रबंधन में सुविधा होगी, नकदी संभालने से जुडे खर्च कम होंगे तथा सुरक्षित और वास्तविक समय में भुगतान निपटान संभव होगा।
  • वास्‍तविक-समय में प्रत्‍यक्ष हस्‍तांतरण: सीमा-पार नकदी ले जाने या पारंपरिक बैंकिंग माध्‍यमों पर निर्भर रहने की आवश्यकता कम होगी।

विश्वभर में यूपीआई की पहुंच:

वर्तमान में यूपीआई नौ देशों- सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका और कंबोडिया- में स्वीकार किया जाता है। इन देशों में भारतीय यात्री अपने परिचित यूपीआई प्लेटफार्मों के माध्यम से आसानी से डिजिटल भुगतान कर सकते हैं।

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