अप्रैल 28, 2026

डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट परियोजना के चौथे जहाज़ डीएससी ए 23 (यार्ड 328) को नौसेना में शामिल किया गया

बंदरगाहों और तटीय जल में गोताखोरी (डाइविंग) अभियान के लिए डिज़ाइन किए गए पांच डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट-डीएससी परियोजना के चौथे जहाज़, डीएससी ए 23, 19 अप्रैल, 2026 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित टीटागढ़ में नौसेना में श‍ामिल किया गया। नौसेना के जहाजों/पनडुब्बियों के इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल, हथियार प्रणालियों के रखरखाव और तकनीकी बुनियादी ढांचे का दायित्‍व संभाल रहे चीफ ऑफ मैटेरियल – वाइस एडमिरल बी शिवकुमार, की उपस्थिति में श्रीमती दीपा शिवकुमार ने इसे बेड़े में शामिल किया।

भारतीय नौसेना और मेसर्स टीटागढ़ नेवल सिस्टम्स लिमिटेड (टीएनएसएल) के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में पूर्ण नौसैनिक परंपराओं और औपचारिक भव्यता के साथ यह कार्यक्रम आयोजित हुआ।

इन डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट जहाजों का निर्माण मेसर्स टीटागढ़ नेवल सिस्टम्स लिमिटेड (टीएनएसएल), कोलकाता द्वारा स्वदेशी रूप से किया जा रहा है। 30 मीटर लंबे कैटामरान-पतवार आकार और लगभग 380 टन के विस्थापन क्षमता वाले ये जहाज बेहतर स्थिरता, विस्तारित डेक क्षेत्र और उन्नत समुद्री संचालन सुविधा प्रदान करते हैं, जो इन्हें तटीय जल और बंदरगाहों में गोताखोरी के लिए उपयुक्त बनाते हैं।

इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (आईआरएस) के नौसेना नियमों और विनियमों के अनुसार डिजाइन और निर्मित इस जहाज़ परियोजना का विशाखापत्तनम स्थित नौसेना विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला – एनएसटीएल में व्यापक मॉडल परीक्षण और हाइड्रोडायनामिक विश्लेषण (दबाव-वेग संबंधी टर्बाइन, पंप, जहाज का प्रतिरोध, प्रणोदन, समुद्री स्थिरता इत्‍यादि) किया गया।

इन जहाजों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की गोताखोरी सहायता, जलमग्न निरीक्षण, बचाव सहायता और तटीय परिचालन तैनाती क्षमता में बढ़ोत्‍तरी होगी। इन जहाजों में मुख्य और सहायक उपकरणों का 70 प्रतिशत स्वदेशी तौर पर निर्मित होने से ये गोताखोरी सहायता पोत भारत सरकार और रक्षा मंत्रालय की आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल के गौरवशाली प्रतीक हैं।

Leave a Reply

हो सकता है आप चूक गए हों

Copyright © All rights reserved. Newsphere द्धारा AF themes.

Discover more from जन किरण

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading