डिजिटल व्यापार भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण घटक
सरकार विश्व के विभिन्न संभावित देशों के साथ डिजिटल व्यापार साझेदारियों को प्रोत्साहित करने और उनके विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है
इन समझौतों में बाज़ार तक पहुँच सुनिश्चित करते हुए भारत के हितों को सुरक्षित रखा गया है
भारत के पास एक सशक्त आईटी पारितंत्र है, जिसका राजस्व वित्त वर्ष 2024–25 में 280 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक तथा निर्यात 225 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा है। इस क्षेत्र में 60 लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त है। अतः डिजिटल व्यापार भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण घटक है।
भारत के मुक्त व्यापार समझौते:
भारत सरकार विश्व के विभिन्न संभावित देशों के साथ डिजिटल व्यापार साझेदारियों को प्रोत्साहित करने और उनके विस्तार के लिए दृढ़तापूर्वक प्रतिबद्ध है। भारत ने संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय संघ के साथ तीन मुक्त व्यापार समझौते संपन्न किए हैं, जिनमें से प्रत्येक में डिजिटल व्यापार अध्याय एक प्रमुख घटक के रूप में सम्मिलित है।
इन समझौतों में भारत ने बाज़ार तक पहुँच हासिल करते हुए अपने हितों की प्रभावी रूप से रक्षा सुनिश्चित की है।
भारत–अमेरिका व्यापार वार्ताएँ:
भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता (बीटीए), जो वर्तमान में वार्ताओं के अधीन है, एक मुक्त, निष्पक्ष और गतिशील डिजिटल वातावरण को बढ़ावा देने का उद्देश्य रखता है, जिससे डिजिटल व्यापार के क्षेत्र में गहन सहयोग को सक्षम बनाया जा सके।
भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक अंतरिम समझौते के लिए रूपरेखा स्थापित की है, जो खुले और न्यायसंगत डिजिटल व्यापार वातावरण को बढ़ावा देने के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
यह अंतरिम रूपरेखा भारत–अमेरिका बीटीए के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में पारस्परिक तथा परस्पर लाभकारी डिजिटल व्यापार दिशानिर्देश प्राप्त करने की दिशा में मार्ग प्रशस्त करती है।
भारत ने डेटा गवर्नेंस के क्षेत्र में अपनी नियामकीय स्वायत्तता को सुरक्षित रखते हुए उभरती प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने और सीमा-पार सहयोग को प्रोत्साहित करने के बीच संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है।
ऐसे समझौते किसी भी प्रकार से भारत की स्थापित विधिक रूपरेखा के अंतर्गत अपने डेटा के प्रबंधन हेतु उपाय करने की क्षमता को सीमित नहीं करते हैं।
भारत का सुदृढ़ विधिक ढांचा:
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 एक सुदृढ़ डेटा गोपनीयता ढांचा स्थापित करता है। यह डेटा न्यासियों पर वैध प्रसंस्करण तथा व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु उपयुक्त दायित्व निर्धारित करता है। यह अधिनियम नागरिकों को सशक्त बनाता है और उन्हें ऐसे अधिकार प्रदान करता है जिन्हें वे डेटा न्यासियों के विरुद्ध प्रवर्तित कर सकते है।
भारत सरकार ने व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण, जिसमें सीमा-पार अंतरण भी सम्मिलित है, के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रदान करने हेतु डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) नियम, 2025 अधिसूचित किए।
यह रूपरेखा आवश्यकता होने पर सीमित परिस्थितियों में कुछ श्रेणियों के व्यक्तिगत डेटा के अंतरण पर प्रतिबंध सहित अतिरिक्त शर्तें निर्धारित करने हेतु केन्द्रीय सरकार को सक्षम बनाती है।
इसी प्रकार, क्षेत्रीय विनियामक संबंधित क्षेत्र की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए आवश्यक प्रावधान निर्धारित करते हैं। उदाहरणार्थ, भारतीय रिज़र्व बैंक यह अनिवार्य करता है कि सभी भुगतान प्रणाली संबंधी डेटा केवल भारत में स्थित सिस्टम्स पर ही संग्रहीत किया जाए।
सरकार भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर दृढ़ बनी हुई है, साथ ही यह सुनिश्चित कर रही है कि देश की नियामकीय स्वायत्तता संरक्षित और सुदृढ़ बनी रहे।
यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद द्वारा 01.04.2026 को लोकसभा में प्रस्तुत की गई।