मार्च 29, 2026

कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान में आईओएनएस समुद्री अभ्यास (आईएमईएक्स) टीटीएक्स 2026 का आयोजन किया गया

भारतीय नौसेना ने 27 मार्च 2026 को दक्षिणी नौसेना कमान, कोच्चि स्थित समुद्री युद्ध पद्धति केंद्र में आईओएनएस समुद्री अभ्यास (आईएमईएक्‍स) टीटीएक्‍स 2026 की मेजबानी की। इस उच्च स्तरीय अभ्यास में हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (आईओएनएस) के सदस्य नौसेनाओं के विशिष्ट प्रतिनिधि, आईओएस सागर के अंतर्राष्ट्रीय अधिकारी और भारतीय नौसेना के अधिकारी हिंद महासागर क्षेत्र में उभरती गैर-पारंपरिक समुद्री सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ आए।

इस अभ्यास में बांग्लादेशफ्रांसइंडोनेशियाकेन्यामालदीवमॉरीशसम्यांमारसेशेल्ससिंगापुरश्रीलंकातंजानिया और तिमोर-लेस्ते के देशों ने भाग लिया। यह विविध बहुराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व आपसी विश्वास को बढ़ावा देने और पूरे क्षेत्र में सहयोगात्मक समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सोलह वर्षों के अंतराल के बाद भारत को 2026-2028 के लिए आईओएनएस की अध्यक्षता मिली है। आईएमईएक्‍स टीटीएक्‍स 2026 क्षेत्रीय समुद्री नेतृत्व को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

अत्याधुनिक कृत्रिम वातावरण में आयोजित इस अभ्यास में हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में जटिल समुद्री सुरक्षा चुनौतियों का समाधान किया गया। यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार, ऊर्जा प्रवाह और संपर्क के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके प्रमुख उद्देश्यों में भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच परिचालन दृष्टिकोण और बाधाओं की साझा समझ को बढ़ाना, सूचनाएं साझा करना और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं जैसे समन्वय तंत्रों की जांच करना और व्यावहारिक अनुप्रयोग के माध्यम से समुद्री सुरक्षा दिशानिर्देशों के सत्यापन सहित आईओएनएस ढांचे के निरंतर परिष्करण का समर्थन करना शामिल था।

वास्तविक तैनाती की बाधाओं के बिना बहु-परिदृश्यीय आकस्मिकताओं का अनुकरण करके, इस अभ्यास ने प्रतिभागियों को पेशेवर आदान-प्रदान के नए रास्ते तलाशने और आपसी विश्वास को गहरा किया है। आईएमईएक्‍स टीटीएक्‍स 26 ने रचनात्मक संवाद, सामूहिक जिम्मेदारी और समुद्री चुनौतियों के क्षेत्रीय समाधानों के माध्यम से सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में आईओएनएस की भूमिका को पुनः स्थापित किया।

इस अभ्यास से प्राप्त जानकारियों से आईओएनएस ढांचे को और मजबूत करने की उम्मीद है जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में एक सुसंगत, उत्तरदायी और स्थिर समुद्री व्यवस्था सुनिश्चित हो सकेगी।

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