मार्च 29, 2026

गट माइक्रोबायोटा एंड प्रोबायोटिक साइंस फाउंडेशन ने नई दिल्ली में 16वें इंडिया प्रोबायोटिक सिम्पोजियम का आयोजन किया

गट माइक्रोबायोटा एंड प्रोबायोटिक साइंस फाउंडेशन ने 27-28 मार्च, 2026 को नई दिल्ली में “गट माइक्रोबायोम एंड प्रोबायोटिक्स: इम्‍पैक्‍ट फ्रॉम क्रेडल सेंटेनेरियन” विषय पर 16वें इंडिया प्रोबायोटिक सिम्पोजियम का आयोजन किया।

नीति आयोग के सदस्य श्री राजीव गौबा ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में प्रतिरक्षा, चयापचय और निवारक स्वास्थ्य देखभाल में गट माइक्रोबायोम की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

श्री गौबा ने भारत में खान-पान की आदतों में हो रहे तेज बदलाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शहरीकरण, जीवनशैली में परिवर्तन और सोशल मीडिया तथा त्वरित व्यापार प्लेटफार्मों द्वारा संचालित अति-प्रसंस्कृत और परिष्कृत खाद्य पदार्थों की बढ़ती खपत लोगों को पारंपरिक, पोषक तत्वों से भरपूर आहार से दूर कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि इन प्रवृत्तियों के गट के स्वास्थ्य पर गंभीर दीर्घकालिक परिणाम हो सकते हैं और बताया कि भारत में 56.4% बीमारियों का अनुमानित कारण अस्वास्थ्यकर या असंतुलित आहार है। उन्होंने आगे चेतावनी दी कि यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो “सूक्ष्मजीव व्यापक परिणाम उत्पन्न कर सकते हैं।”

श्री गौबा ने गट के स्वास्थ्य को व्यापक विकास संदर्भ में रखते हुए स्वास्थ्य सेवा को व्यक्तिगत कल्याण और आर्थिक विकास दोनों के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि भारत को जनसांख्यिकीय लाभ तभी प्राप्‍त हो सकता है जब कार्यबल स्वस्थ हो और बढ़ती बुजुर्ग आबादी के लिए सक्रिय और स्वस्थ वृद्धावस्था की समयबद्ध तैयारी की जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य में निवेश विकसित भारत में निवेश है और आयुष्मान भारत, पीएम-जेएवाई, पीएम भारतीय जनऔषधि परियोजना और आयुष्मान आरोग्य मंदिर जैसी पहलों का उल्‍लेख करते हुए कहा कि इनसे प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा और वित्तीय सुरक्षा को काफी मजबूती मिली है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2015 और वित्त वर्ष 2022 के बीच स्वास्थ्य पर जेब से होने वाला खर्च 62.6% से घटकर 39.4% हो गया है, जिसके परिणामस्वरूप परिवारों को 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है।

साथ ही, श्री गौबा ने स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, समानता, किफायत, गुणवत्ता, रोगी सुरक्षा और कुशल स्वास्थ्य पेशेवरों की कमी से संबंधित लगातार चुनौतियों को स्वीकार किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सामाजिक-आर्थिक कारकों से प्रभावित होती रहती है। स्वास्थ्य पेशेवरों से अग्रणी भूमिका निभाने का आग्रह करते हुए, उन्होंने कम कीमत वाली जेनेरिक दवाओं के अधिक उपयोग और डिजिटल स्वास्थ्य उपकरणों, टेलीमेडिसिन, डेटा एनालिटिक्स और एआई के अधिक उपयोग की अपील की ताकि वंचित समुदायों तक विशेषज्ञ देखभाल पहुंचाई जा सके और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं से वंचित लोगों के लिए आवाज़ उठाई जा सके।

श्री गौबा ने प्रोबायोटिक्स के विकसित होते क्षेत्र पर बोलते हुए कहा कि माइक्रोबायोम विज्ञान वर्णनात्मक अध्ययनों से आगे बढ़कर क्रियाविधि संबंधी और व्यावहारिक अनुसंधान की ओर बढ़ चुका है। उन्होंने अगली पीढ़ी के माइक्रोबायोम-आधारित उपचार, सिंथेटिक बायोलॉजी और सीआरआईएसपीआर-सक्षम इंजीनियरिंग द्वारा लक्षित सूजनरोधी और चयापचय कार्यों वाले प्रोबायोटिक उपभेदों के निर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों के बारे में बताया। यह उचित चिकित्सा के लिए उपयोगी है। हालांकि, उन्होंने प्रोबायोटिक्स और सप्लीमेंट्स के बाज़ार में गलत सूचनाओं और भ्रामक विज्ञापनों के बढ़ते प्रसार के प्रति आगाह किया और चिकित्सकों एवं शोधकर्ताओं से आग्रह किया कि वे अपनी विश्वसनीयता और मीडिया तक पहुंच का उपयोग करके सटीक जानकारी का प्रसार करें, स्वस्थ आहार संबंधी आदतों को बढ़ावा दें और निवारक जीवनशैली को प्रोत्साहित करें जिससे महंगे निदान और प्रक्रियाओं की आवश्यकता कम हो।

श्री गौबा ने भारत की किण्वित खाद्य पदार्थों और पारंपरिक आहार पद्धतियों की समृद्ध विरासत का उल्‍लेख करते हुए कहा कि देश पारंपरिक ज्ञान को जीनोमिक और माइक्रोबायोम अनुसंधान के साथ मिलाकर चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित प्रोबायोटिक्स विकसित करने के लिए वैश्विक प्रोबायोटिक आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए विशिष्ट रूप से सक्षम है। उन्होंने संक्रामक और दीर्घकालिक रोगों को कम करने, पोषण में सुधार करने और जनसंख्या की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए प्रोबायोटिक्स की व्यापक जन स्वास्थ्य क्षमता का उल्‍लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि वैज्ञानिक प्रगति को सुरक्षित, प्रभावी और सुलभ उत्पादों में बदलने के लिए शिक्षा जगत, उद्योग और नियामकों के बीच मजबूत सहयोग आवश्यक है।

श्री गौबा ने युवा शोधकर्ताओं और नवप्रवर्तकों की भागीदारी की सराहना करते हुए उन्हें जटिल स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए बहुविषयक और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सिम्पोजियम नए सहयोगों को बढ़ावा देगा और माइक्रोबायोम और प्रोबायोटिक विज्ञान के क्षेत्र में भारत के नेतृत्व को सुदृढ़ करेगा।

Leave a Reply

Copyright © All rights reserved. Newsphere द्धारा AF themes.

Discover more from जन किरण

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading