रक्षा मंत्री ने सीमा सड़क संगठन पर विचार-विमर्श के लिए रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की
बीआरओ सीमाओं के साथ-साथ एक ऐसा इकोसिस्टम विकसित कर रहा है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, विकास और सड़क संपर्क सुविधाएं शामिल हैं: राजनाथ सिंह
“सीमा सड़क विकास कार्यक्रम 2023-28 के अंतर्गत, दूरदराज और ऊंचे पहाड़ी वाले इलाकों में हर मौसम के दौरान सड़क संपर्क सुनिश्चित हो रहा है, जिससे परिचालन गतिशीलता एवं रक्षा तैयारियों को सुदृढ़ किया जा रहा है”
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 25 मार्च, 2026 को नई दिल्ली में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) से संबंधित विचार-विमर्श के लिए रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की एक बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान रक्षा, बुनियादी ढांचे के विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा परिचालन तत्परता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से चल रही रणनीतिक गतिविधियों से जुड़े मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

रक्षा मंत्री ने सीमाओं पर सशक्त आधारभूत ढांचे की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि बीआरओ राष्ट्रीय सुरक्षा, विकास और सड़क संपर्क सुविधा के समन्वय से एक सशक्त वातावरण तैयार कर रहा है, जो इन तीनों क्षेत्रों को समान रूप से गति देता है। उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्र और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित इलाकों में सड़क संपर्क सुविधा बढ़ाने के लिए बीआरओ द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। श्री सिंह ने कहा कि इससे न केवल सुरक्षा तंत्र सुदृढ़ हुआ है, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी नई दिशा मिली है। उन्होंने कहा, “बीआरओ ने रक्षा बलों की आवाजाही को सुगम बनाया है और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।” रक्षा मंत्री ने बताया कि बीआरओ को भारत-म्यांमार सीमा पर लगभग 1,600 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास का दायित्व सौंपा गया है। यह पहल सीमा प्रबंधन क्षमताओं को और अधिक सुदृढ़ करने के साथ-साथ सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।
बैठक के दौरान ‘सीमा सड़क विकास कार्यक्रम 2023-28’ के अंतर्गत हुई प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की गई। इस कार्यक्रम के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क संबंधी ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से 1,000 से अधिक सड़क एवं बुनियादी ढांचा परियोजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। इनमें नई सड़कों का निर्माण, मौजूदा मार्गों का उन्नयन और उनके रखरखाव से जुड़े कार्य शामिल हैं। रक्षा मंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि इस विस्तृत नेटवर्क के माध्यम से दूरदराज और दुर्गम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी हर मौसम में निर्बाध आवागमन सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को सुविधा मिल रही है, बल्कि देश की सैन्य संचालन क्षमता और समग्र रक्षा तैयारियों को भी नई मजबूती मिल रही है।
श्री राजनाथ सिंह ने ‘तकनीक के इस्तेमाल’ के अहम पहलू की ओर सदस्यों का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि बीआरओ, हाई एल्टीट्यूड इक्विपमेंट, मॉड्यूलर ब्रिज और प्रीकास्ट टेक्नोलॉजी जैसी तकनीकों का बेहतरीन इस्तेमाल करके, तेजी से आधुनिक निर्माण तकनीकों को अपना रहा है। उन्होंने कहा, “बीआरओ ने अपने काम की गुणवत्ता और गति को काफी बढ़ाया है। इससे यह साबित होता है कि हम भविष्य के लिए तैयार बुनियादी ढांचा बना रहे हैं।” रक्षा मंत्री ने बीआरओ को बजट सहायता, आधुनिक उपकरणों और अपने कर्मचारियों के कल्याण के लिए शुरू की गई पहलों के मामले में सशक्त बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
डायरेक्टर जनरल बॉर्डर रोड्स (डीजीबीआर) लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने बैठक के दौरान सदस्यों के समक्ष बीआरओ का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इसमें संगठन की भूमिका, प्रमुख उपलब्धियों, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों एवं अत्यंत प्रतिकूल मौसम में कार्य करते समय आने वाली चुनौतियों के साथ-साथ आपदा प्रबंधन में उसके महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि 1960 में स्थापित बीआरओ ने अब तक 64,000 किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण किया है, साथ ही 1,179 पुल, 22 हवाई अड्डे और 7 सुरंगें विकसित की हैं। इन प्रयासों से सीमावर्ती क्षेत्रों में न केवल सैन्य ऑपरेशनल तैयारी को मजबूती मिली है, बल्कि सामाजिक एवं आर्थिक विकास को भी गति प्राप्त हुई है। प्रस्तुतीकरण में बीआरओ द्वारा पूर्ण की गईं प्रमुख प्रमुख परियोजनाओं और उत्तरी सीमाओं पर सड़कों के विकास में उसकी निर्णायक भूमिका को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
समिति को अवगत कराया गया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ विकास से देश की ऑपरेशनल तैयारियों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। साथ ही, इन प्रयासों ने सीमावर्ती इलाकों के सामाजिक-आर्थिक विकास को गति प्रदान की है, जिससे ‘विकसित भारत @2047’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान मिल रहा है। बैठक में यह भी बताया गया कि बीआरओ ने न केवल देश के भीतर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशेषज्ञता का प्रदर्शन किया है। अफगानिस्तान, भूटान, म्यांमार तथा ताजिकिस्तान जैसे मित्र देशों में विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा करने में बीआरओ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिससे भारत की वैश्विक साख व सहयोग को और मजबूती मिली है।
डीजीबीआर ने सीमित कार्य-अवधि, भूमि अधिग्रहण की जटिलताओं एवं पर्यावरणीय स्वीकृति जैसी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए बीआरओ की क्षमता-विस्तार और आधुनिक निर्माण तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि त्वरित, प्रभावी व अधिक टिकाऊ बुनियादी ढांचे का निर्माण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने मानव संसाधन गतिविधियों के अंतर्गत बीआरओ कर्मियों, विशेष रूप से दिहाड़ी मजदूरों के लिए किए जा रहे कल्याणकारी उपायों को भी प्रमुखता से रेखांकित किया और कहा कि इन प्रयासों से कार्यबल की दक्षता एवं मनोबल में वृद्धि हुई है। डीजीबीआर ने एक विशिष्ट संगठन के रूप में बीआरओ की अनूठी क्षमता को भी दोहराया, जो सैन्य मूल्यों और इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का संगम है। इसी विशेषता के कारण बीआरओ दुर्गम, ऊंचाई वाले इलाकों और दूरदराज के क्षेत्रों में भी परियोजनाओं को शीघ्रता से प्रारंभ करने तथा निर्धारित समय में पूरा करने में सक्षम है।
बैठक में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत, सचिव (रक्षा उत्पादन) संजीव कुमार, सचिव (पूर्व सैनिक कल्याण) सुकृति लिखी, वित्तीय सलाहकार (रक्षा सेवाएं) राज कुमार अरोड़ा सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।