अप्रैल 21, 2026

प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली में सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1 और 2 के उद्घाटन कार्यक्रम की झलकियाँ साझा कीं

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1 एवं 2 के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि आज सभी एक नया इतिहास रचे जाने के साक्षी बन रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय की टीम, कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ तथा नए भवनों के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों सहित, सभी को बधाई दी। उन्होंने इनके निर्माण से जुड़े सभी इंजीनियरों और श्रमिक साथियों का धन्यवाद व्यक्त किया।

X पर पोस्‍ट की एक श्रृंखला में श्री मोदी ने कहा:

“भारत के नागरिकों की सेवा के प्रति अडिग संकल्प और ‘नागरिक देवो भव’ की पवित्र भावना से प्रेरित होकर, सेवा तीर्थ को नम्रतापूर्वक राष्ट्र को समर्पित किया गया है।

सेवा तीर्थ हमेशा कर्तव्य, करुणा और ‘भारत प्रथम’ के सिद्धांत के प्रति वचनबद्धता का एक उज्ज्वल प्रतीक बना रहे। यह पीढ़ियों को निःस्वार्थ सेवा और सभी के कल्याण हेतु अथक समर्पण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे।”

“आज सेवा तीर्थ में, हमने उन फाइलों पर हस्ताक्षर किए जो गरीबों, वंचितों, हमारे मेहनती किसानों, युवा शक्ति और नारी शक्ति के सशक्तिकरण से जुड़ी हैं। मुख्य निर्णयों में शामिल हैं:

प्रधानमंत्री राहत (PM RAHAT) योजना के शुभारंभ के लिए स्वीकृति, जिसके अंतर्गत दुर्घटना के पीड़ितों को 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि प्रभावित किसी भी व्यक्ति को तुरंत चिकित्सा सहायता प्राप्त हो।”

लखपती दीदी योजना के लक्ष्य को दोगुना कर 6 करोड़ कर दिया गया है। इससे महिलाओं के सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

कृषि अवसंरचना कोष का लक्ष्य 1 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2 लाख करोड़ रुपये किया गया है। इससे हमारे किसानों को अत्यधिक सहायता मिलेगी और उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को 10,000 करोड़ रुपये के कोष के साथ स्वीकृति दी गई है। इससे प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप और गहन तकनीकी (डीप-टैक) अनुसंधान को प्रोत्साहन मिलेगा।

“देशवासियों की सेवा के अटूट संकल्प और ‘नागरिक देवो भव’ की पावन भावना को साथ लेकर, आज ‘सेवा तीर्थ’ को राष्ट्र को समर्पित करने का सौभाग्य मिला।

‘सेवा तीर्थ’ कर्तव्य, करुणा और ‘राष्ट्र प्रथम’ के लिए हमारी प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है।

मेरी कामना है कि यह आने वाली पीढ़ियों को निःस्वार्थ सेवा और जन-जन के कल्याण के लिए समर्पित होकर आगे बढ़ने को प्रेरित करता रहे।”

“दिल्ली में आज ‘सेवा तीर्थ’ और कर्तव्य भवन के लोकार्पण के अवसर पर सेवा तीर्थ स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी कर गौरवान्वित हूं।”

“आज मैंने जिस अमृत भावना के साथ ‘सेवा तीर्थ’ और कर्तव्य भवन को राष्ट्र को समर्पित किया है, वो 140 करोड़ देशवासियों की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं को पूरा करने का सशक्त आधार बनेंगे।”

“बीते 11 वर्षों से हम गुलामी की मानसिकता को बदलने के अभियान में जुटे हैं। हमारा मंत्र है- स्वतंत्र भारत की स्वतंत्र पहचान, गुलामी से मुक्त निशान!”

“‘सेवा तीर्थ’ के नाम में ही एक बड़ा संदेश है- देशवासियों की सेवा के संकल्प को सिद्धि तक ले जाने का एक पावन स्थल!”

“कर्तव्य इस जीवंत राष्ट्र की प्राण वायु है। यह कोटि-कोटि देशवासियों के सपनों को साकार करने के हमारे संकल्प को नई ऊर्जा दे रहा है।”

“‘नागरिकदेवो भव’ हमारी कार्य-संस्कृति है। ‘सेवा तीर्थ’ में लिया गया हर निर्णय 140 करोड़ देशवासियों के जीवन को और बेहतर बनाएगा।”

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