अप्रैल 26, 2026

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्‍यम से स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं की डिलीवरी में बदलाव

परिचय

भारत में एआई आधारित निदान, टेलीमेडिसिन और निगरानी उपकरणों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की क्रांति सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में अब तेजी से आगे बढ़ रही है। इन अत्याधुनिक तकनीकों को एकीकृत करते हुए भारत सरकार सेवाएँ प्रदान करने की राह में मौजूद खामियों को दूर करते हुए, चिकित्सा सेवाओं और उत्पादों के मानकों को ऊँचा उठाते हुए और प्रत्येक नागरिक के लिए किफायती स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करते हुए ‘सबके लिए स्वास्थ्य कवरेज’ की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा कर रही है।

केंद्र सरकार ने ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के विजन से प्रेरित होकर मार्च 2024 में इंडियाएआई मिशन की शुरुआत की। इसका उद्देश्य समावेशी विकास को बढ़ावा देना, शासन को मजबूत बनाना और स्वास्थ्य सेवाओं सहित सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी में सुधार लाना है। यह मिशन दो मुख्य सिद्धांतों पर आधारित है:

  1. ग्रामीण और अल्पसेवा प्राप्त लोगों सहित समाज के सभी वर्गों तक एआई उपकरणों की पहुँच सुनिश्चित करते हुए प्रौद्योगिकी को सर्वसुलभ बनाना   
  2. मानवता के लिए प्रौद्योगिकी, केवल प्रौद्योगिकी के विकास के लिए नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण सामाजिक चुनौतियों को हल करने, जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने और सार्वजनिक कल्याण को बढ़ाने के लिए एआई का उपयोग करना  

इस समग्र दृष्टिकोण का उद्देश्‍य 2047 तक विकसित भारत बनने की भारत की यात्रा के तहत स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं की  डिलीवरी में आमूल-चूल बदलाव लाना है।

केंद्र सरकार ने वर्षों पहले ही स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने में एआई की परिवर्तनकारी क्षमता को पहचान लिया था। 2018 मेंनीति आयोग ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए राष्ट्रीय रणनीति प्रकाशित की थीजिसमें विभिन्न क्षेत्रों में इसके अनगिनत अनुप्रयोगों के बीच एआई,रोबोटिक्स और इंटरनेट ऑफ़ मेडिकल थिंग्स को “स्वास्थ्य सेवाओं के लिए केंद्रीय प्रणाली” के तौर पर देखा गया

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रमों में अपनाए गए एआई-सक्षम उपकरण भारत भर में स्वास्थ्य विशेषज्ञता को सर्वसुलभ बना रहे हैं।  उदाहरण के लिए, ये उपकरण पूरे देश में 282 मिलियन टेलीमेडिसिन परामर्शों में सहायता करते हुए फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को टीबी और डायबिटिक रेटिनोपैथी की स्क्रीनिंग करने में सक्षम बनाते हैं। कुल मिलाकर, इन कोशिशों के ठोस नतीजे सामने आए, जिनमें टीबी के प्रतिकूल परिणामों में 27% की कमी आना और मामलों की पहचान में 12–16% की बढ़ोतरी होना शामिल हैं।

इंडिया एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन 2026

भारत 16 से 20 फरवरी तक नई दिल्ली में ग्लोबल साउथ का पहला अंतरराष्ट्रीय एआई शिखर सम्मेलन आयोजित कर रहा है, जिसमें वैश्विक नेतानीति निर्माताप्रौद्योगिकी कंपनियांनवप्रवर्तक और विशेषज्ञ एकत्रित होंगे। इस शिखर सम्मेलन में एआई-केंद्रित नीतिअनुसंधानउद्योग और सार्वजनिक सहभागिता पर चर्चा की जाएगी।

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स्वास्थ्य सेवाओं प्रदान करने में एआई की भूमिका

एआई ने विभिन्न सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों के बेहतर कार्यान्वयन को संभव बनाया है, जिससे प्रौद्योगिकी का उपयोग जन स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालने में किया जा रहा है। यह दिखाता है कि प्रौद्योगिकी-संचालित समाधान किस प्रकार लगातार बनी रहने वाली विकास संबंधी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं तथा समावेशी और समग्र सामाजिक विकास को बढ़ावा दे सकते हैं।5 यह आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत की भावना को भी प्रतिबिंबित करता है।

2022 से 2025 तकभारत ने एआई को एकीकृत रणनीति में शामिल करते हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की डिलीवरी में मौलिक बदलाव किया है, जिसने विशेषज्ञों की कमी को दूर किया और सक्रिय, अग्र सक्रियता से  देखभाल करने को बढ़ावा दिया। राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम, राष्ट्रीय डायबिटिक रेटिनोपैथी स्क्रीनिंग कार्यक्रम और मीडिया डिजीज सर्विलांस सिस्टम में एआई-सक्षम उपकरणों का उपयोग करके, सरकार ने गैर-विशेषज्ञों को उच्च-स्तरीय स्क्रीनिंग करने में सक्षम बनाया है। इसके परिणामस्वरूप टीबी के प्रतिकूल परिणामों में 27% की कमी आई है और रोग फैलने से संबंधित 4,500 से अधिक चेतावनियाँ जारी की गईं । यह परिवर्तन ई-संजीवनी के माध्यम से और मजबूत हुआ, जिसने 282 मिलियन परामर्शों में एआई सहायता प्राप्‍त संभावित निदान से सहायता प्रदान की, और उद्योगयंत्र एआई सिस्टम के माध्यम से कुपोषण निगरानी को पुख्‍ता किया। इस प्रकार, एक ऐसा समग्र स्वास्थ्य इकोसिस्‍टम तैयार हुआ, जो संक्रामक रोग प्रबंधन और कैंसर देखभाल से लेकर पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा के आधुनिकीकरण और राष्ट्रीय वन हेल्थ कार्यक्रम तक व्‍याप्‍त है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की डिलीवरी को बेहतर बनाने के  लिए भारत सरकार द्वारा 2022–2025 में की गईं एआई-सक्षम पहलें:  

स्वास्थ्य फोकसएआई समाधान/ पहलप्रक्रियाप्रौद्योगिकी  “उपचार” अनुभवनैदानिक ​​/ परिचालन प्रभाव
टीबी प्रबंधनप्रतिकूल परिणाम पूर्वानुमानपूर्वानुमानात्मक विश्लेषण:  एआई उपचार शुरू होते ही रोगियों में उपचार की विफलता के उच्च जोखिम पहले ही पहचान लेती है।देशव्यापी स्‍तर पर लागू होने के बाद प्रतिकूल परिणामों में 27% की कमी दर्ज की गई6
टीबी ट्राइएजडीप सीएक्सआर (चेस्‍ट एक्स-रे)रेडियोलॉजी एआई: टीबी के संभावित मामलों के लिए गांठों और केविटीज की पहचान हेतु डिजिटल एक्स-रे की ऑटोमेटेड रीडिंग।8 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में लागू; विशेषज्ञों की कमी को पूरा करने के लिए सरकार के लिए निशुल्‍क उपलब्ध
मधुमेह (डीआर)मधुनेत्रएआईरेटिनल ट्रायज: गैर-विशेषज्ञों द्वारा रेटिना की तस्वीरें लेना; एआई द्वारा उनकी ग्रेडिंग करके जरूरी विशेषज्ञ रेफरल को प्राथमिकता देना838 सुविधाओं में 7,100 रोगियों को लाभ मिला; भारत का पहला एआई-सक्षम सामुदायिक स्क्रीनिंग कार्यक्रम दिसंबर 2025 में लॉन्च किया गया9
टेलीमेडिसिनई-संजीवनी सीडीएसएससंभावित निदान : रोगी की शिकायतों को व्यवस्थित करना और एआई-आधारित संभावित निदान सुझानाअप्रैल 2023 से नवंबर 2025 तक 282 मिलियन परामर्श; विशेष रूप से एआई- अनुशंसित निदानों से 12 मिलियन रोगियों को लाभ मिला। 10
पारंपरिक चिकित्साआयुर्जेनोमिक्स और आयुष ग्रिडजीनोमिक-आयुर्वेद हाइब्रिड:  प्रकृति (बनावट के प्रकार) और प्राचीन ग्रंथों के आधार पर रोग के संकेत पहचानने के लिए एआई का उपयोगपारंपरिक ज्ञान के साथ एआई को एकीकृत करने के लिए डब्ल्यूएचओ ने इसे एक ग्लोबल मॉडल के तौर पर मान्यता (जुलाई 2025) दी।11
कैंसर देखभालइमेजिंग बायोबैंकडेटाबेस आर एंड डी: नीति आयोग 20,000+ कैंसर रोगियों  की प्रोफ़ाइल (रेडियोलॉजी/पैथोलॉजी इमेज) का डेटाबेस बना रहा है।12यह शोधकर्ताओं को कैंसर का जल्दी पता लगाने और प्रबंधन के लिए उच्च सटीकता वाले एआई  टूल्स विकसित करने में मदद करता है।
स्वास्थ्य धोखाधड़ीएबी-पीएमजेएवाई धोखाधड़ी विरोधीइंटेग्रिटी प्रबंधन: एआई/एमएल पीएम-जेएवाई योजना में संदिग्ध लेन-देन का पता लगाता है और वास्तविक समय में धोखाधड़ी को रोकने में मदद करता है।  स्वास्थ्य योजना की निगरानी को प्रतिक्रियात्मक पहचान से सक्रिय अखंडता प्रबंधन की ओर स्थानांतरित करता है।13 
निगरानीमीडिया डिजीज सर्विलांस (एमडीएस)प्रारंभिक चेतावनी: एआई राष्ट्रीय डिजिटल समाचार स्रोतों में लक्षणों के समूह (जैसे रहस्यमय बुखार) को स्कैन करता है।अप्रैल 2022 से अब तक 4,500+ रोगों की चेतावनी जारी की गई, ताकि क्षेत्रीय प्रकोप रोके जा सकें।14  

इन उपकरणों को सुरक्षित और मानकीकृत बनाया जाना सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एक आधारभूत ढांचा तैयार किया है:

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उत्कृष्टता केंद्र: मार्च 2025 में नामित,एम्‍स दिल्ली, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़, और एम्‍स ऋषिकेश ने स्‍वदेशी एआई समाधान विकसित करने का नेतृत्व संभाला।15 इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई संबंधित विकास का नेतृत्व करने के लिए एनएचए ने आईआईएससी बेंगलुरु में शिक्षा मंत्रालय के स्‍वास्‍थ्‍य सेवा से संबंधित उत्कृष्टता केंद्र, टीएएनयूएच के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर  किए हैं।
  • नेशनल फेडरेटेड लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म: आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन16 के तहत इकोसिस्टम साझेदारों के डेटा का इस्तेमाल करने वाले एआई स्वास्थ्य मॉडलों को प्रमाणित करने हेतु एक ओपन बेंचमार्किंग प्लेटफ़ॉर्म बनाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) और आईआईटी कानपुर ने 14 अक्टूबर, 2024 को एक समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर  किए।
  • नैतिक निगरानी:  शुरू से ही डेटा की गोपनीयता और सुरक्षित डेटा आदान-प्रदान सुनिश्चित करने के लिए समस्‍त एआई उपयोग आईसीएमआर नैतिक दिशानिर्देश (2023)17 और इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय एआई गवर्नेंस दिशानिर्देश18 का पालन करते हैं।
  • भारत के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में एआई हेतु रणनीति (एसएएचआई): स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए विशेष एआई रणनीति तैयार कर रहा है। यह रणनीति विभिन्न सार्वजनिक और निजी हितधारकों के साथ परामर्श के बाद बनाई गई है।

महाराष्ट्र के एटापल्ली जिले में एकीकृत जनजातीय विकास कार्यक्रम की निगरानी कर रहे भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के एक अधिकारी ने इस बात पर गौर किया कि सरकारी भोजन के बावजूद छात्रों में कुपोषण के स्‍पष्‍ट लक्षण थे।  टोडसा आश्रम स्कूल  का ऑडिट करने पर उसके 27% छात्र कुपोषित पाए गए। श्री गुप्ता ने बच्चों को दिए जाने वाले भोजन में सुधार लाने का निर्णय लिया। सरकार के बताए मेन्यू के हिसाब से परोसे जाने वाले खाने को जांचने के लिए एक एआई-सक्षम मशीन लाई गई। यह मशीन भोजन के तापमान और स्‍वरूप  समेत  2,100 से अधिक डेटा पॉइंट्स का विश्लेषण करने के लिए उन्नत इमेज रिकग्निशन तकनीक से लैस थी।

मशीन लगने के बाद, विश्लेषण से पता चला कि कई भोजन निर्धारित मेन्यू से मेल नहीं खाते थे। विश्लेषण से पता चला कि छात्र अक्सर फलों या प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों से वंचित रहते थे।  ठीक से तैयारी न करने, ज़्यादा पकी हुई सब्ज़ियों और खराब चीज़ों की वजह से पोषक तत्वों की कमी और भी बढ़ गई थी। इस एआई-सक्षम मशीन ने अधिकारियों को सख्त अनुपालन प्रोटोकॉल लागू करने और विक्रेताओं की जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद की। इससे बच्चों के पोषण में स्‍पष्‍ट सुधार हुआ। इस सफल मॉडल को ज़िले के कई स्कूलों में दोहराया गया।

क्षेत्रीय मुक्त डिजिटल स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन 2025

क्षेत्रीय मुक्त डिजिटल स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन 2025 19-20 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इस शिखर सम्मेलन का आयोजन राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए), स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय  द्वारा इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीज़न (एनईजीडी), डब्‍ल्‍यूएचओ दक्षिण -पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय (एसईएआरओ) और यूनिसेफ के सहयोग से किया गया। इस शिखर सम्‍मेलन में डब्‍ल्‍यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र (एसईएआर) के नीति निर्माताओं, प्रौद्योगिकीविदों, सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े अग्रणी लोगों और वैश्विक विशेषज्ञ शामिल हुए। चर्चाओं में मजबूत शासन,  खुले मानकों और  उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के जरिए  डिजिटल स्वास्थ्य ढाँचे को सशक्त बनाने की भारत की यात्रा को रेखांकित किया गया ।  स्वास्थ्य सेवाओं में जेनएआई का उपयोग, जिसमें अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों में एआई के एकीकरण के साथ –साथ एआई-सक्षम निगरानी और निदान, बीमारी की तेजी से पहचान, बीमारी के फैलने का जल्द अनुमान और फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए सहायता शामिल है। इस शिखर सम्मेलन में श्रीलंका, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और तिमोर-लेस्ते के प्रतिनिधि भी शामिल हुए; और डब्‍ल्‍यूएचओ- एसईएआरओ, यूनिसेफ  के वरिष्‍ठ अधिकारी तथा एसईएआर सदस्य देशों के डिजिटल हेल्थ लीडर भी शामिल हुए।

इंडियाएआई मिशन की स्वास्थ्य सेवा से संबंधित पहल

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में मार्च 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एआई का इस्तेमाल कर भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए 10,371.92 करोड़ रुपये के बजट परिव्‍यय के साथ व्‍यापक  राष्ट्रीय स्तर पर इंडियाएआई मिशन को मंज़ूरी दी।

इंडियाएआई मिशन की पहलें एआई-सक्षम स्वास्थ्य अनुप्रयोगों में नवाचार को सहायता दे रही है। इंडियाएआई अनुप्रयोग विकास पहल इस मिशन के स्‍तंभों में से एक है। इस योजना का उद्देश्‍य देश की बड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए डिज़ाइन किए गए प्रभावशाली एआई समाधानों के विकास, विस्तार और उन्‍हें अपनाने को बढ़ावा देना है।23 उन्नत और दक्ष एआई सक्षम स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं की डिलीवरी इस पहल के कई नतीजों में से एक है।

इंडियाएआई अनुप्रयोग विकास पहल के तहत मार्च 2025 तक चुने गए स्वास्थ्य संबंधी एआई समाधान निम्नलिखित हैं:

समाधान का नामसमाधान का विवरणचरण  
निदान (एआई सक्षम फेफड़े स्वास्थ्य जांच और टीबी पहचान के लिए राष्ट्रीय स्तरीय एकीकृत प्रणाली )   क्यूएक्सआर, चेस्ट एक्स रे (सीएक्सआर) को समझने के लिए एक उन्‍नत एआई उपकरण है, जो 30+ निष्‍कर्षों का पता लगाता है और उनके स्थान को दर्शाता है।समाधान
रेडियोलॉजी निदान के लिए एन्ड-टू-एन्ड एआई क्लाउड प्लेटफ़ॉर्म  रेडियोलॉजी निदान के लिए एआई क्लाउड प्लेटफॉर्म, जो कंप्यूटर विज़न (सीवी), जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग, डिकॉम, मोबाइल और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी नई टेक्नोलॉजी को जोड़ता है।समाधान
प्रभावशाली एआई समाधानसामाजिक-आर्थिक परिवर्तन के लिए रोके जा सकने वाली दृष्टि बाधितता की रोकथाम हेतुदृष्टि को खतरे में डालने वाली रेटिनल असामान्यताओं का शीघ्र पता लगानासमाधान
मांसपेशियों और जोड़ों से संबंधित दर्द का पता लगाने और निदान के लिए एआई-सक्षम पहनने योग्‍य या वेयरेबल तकनीकजोड़ों के दर्द के निदान और पुनर्वास से संबंधित स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के इस खंड के लिए एआई-सक्षम हार्डवेयर प्लेटफ़ॉर्मसमाधान
वोक्सेलबॉक्समानव मस्तिष्‍क के कार्यात्‍मक आकलन /कनेक्टोमिक्स के आकलन की सुविधा देने वाला न्यूरो-इंफॉर्मेटिक्स प्लेटफॉर्मप्रोटोटाइप
ओसेलक्स का विकास: बेहतर प्रारंभिक डायबिटिक नेत्र स्क्रीनिंग के लिए एआई-आधारित समाधान डायबिटिक रेटिनोपैथी, उम्र से जुड़ी मैकुलर डिजनरेशन और ग्लूकोमा जैसी आँखों की बीमारियों का जल्दी पता लगाने के लिए एआई संचालित पोर्टेबल, किफायती और आसानी से सुलभ रेटिना इमेजिंग डिवाइसप्रोटोटाइप
डॉक्टर-लेड एआई का इस्तेमाल करके स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के क्षेत्र में क्रांति लाना बीमारी में लोगों की मदद करने, पहनने योग्‍य उपकरण या वियरेबल्स के ज़रिए उनकी सेहत पर नज़र रखने और बीमारियों की रोकथाम के लिए हेल्थ कोच के तौर पर काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया एआई संचालित पर्सनल डॉक्टर 24×7 और निशुल्‍क उपलब्ध है।प्रोटोटाइप
कैंसर स्टेजिंगजगह के निर्धारण और मार्जिन के लिए एआई/एमएल सक्षम  माफ़प्रो डिवाइस प्लेटफॉर्ममाफ़प्रो हैंडहेल्ड डिटेक्टर रेडिएशन-फ्री, नॉन-इनवेसिव, सुरक्षित और किफायती समाधान है, एआई/एमएल आधारित एल्गोरिदम का इस्तेमाल करके लिम्फ नोड्स में मेटास्टेसिस का भरोसेमंद तरीके से पता लगा सकता है और सही तरीके से जांच कर सकता है।प्रोटोटाइप

एआईसहायता प्राप्त स्वास्थ्य सेवा डिलीवरी में निजी क्षेत्र का योगदान 

सरकार के प्रमुख सार्वजनिक नीतिगत थिंक टैंक, नीति आयोग ने निजी क्षेत्र के महत्वपूर्ण नवाचारों को मान्यता दी है। एआई-संचालित इन पहलों में से कुछ इस प्रकार हैं:

स्वास्थ्य फोकसएआई समाधान / पहलप्रौद्योगिकी और “उपचार” अनुभवनैदानिक ​​/ परिचालन प्रभाव
व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकॉर्डमाईडिजिरिकॉर्ड्स (एमडीआर)रोगी के स्‍वामित्‍व वाला प्लेटफ़ॉर्म : टीकाकरण  और दवा सेवन की याद दिलाने सहित जीवन भर के स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी रिकॉर्ड का प्रबंधन करने के लिए सुरक्षित मोबाइल ऐप। इसमें हृदय गति, श्‍वसन दर और रक्‍तचाप अनुमान लगाने के लिए फेशियल वीडियो एनालिसिस वाले  स्‍मार्ट वाइटल्‍स शामिल है40,000+ उपयोगकर्ता; 20+ अस्पताल/क्लीनिक तेज़ और बेहतर क्लिनिकल संदर्भ के लिए इसकी सलाह देते हैं। देखभाल की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए एबीडीएम/एबीएचए आईडी से लिंक किया गया है।24
मातृ देखभालकेयरएनएक्सएकीकृत इकोसिस्टम: पोर्टेबल एंटीनेटल केयर किट और वायरलेस फीटल मॉनिटरिंग (फ़ेटोसेंस) जिसका इस्तेमाल फ्रंटलाइन वर्कर गर्भवती  महिलाओं की घर-घर स्क्रीनिंग (बीपी, हीमोग्लोबिन, भ्रूण की हृदय गति) के लिए करते हैं।20+ राज्यों में 500,000+ माताओं को मदद की। मरीज द्वारा सीधे तौर पर किए गए खर्च और परिचालन लागत में कमी आई। 25
नवजात शिशु की निगरानीनिमोकेयर रक्षापहनने योग्‍य आईओटी/एआई  : नवजात शिशुओं के लिए वायरलेस मोज़े जैसा पहनने योग्य उपकरण और यह हृदय गति, श्वसन दर, रक्त में ऑक्सीजन संतृप्ति और शरीर के तापमान पर लगातार नजर रखता है। वायरलेस डेटा ट्रांसमिशन से एक नर्स 40-50 बच्चों पर एक साथ नज़र रख सकती है।2022 से 20,000+ नवजात शिशुओं को मदद दी गई 26
गहन देखभालक्लाउडफिजिशियनस्मार्ट आईसीयू-इन-ए-बॉक्स: 24/7 निगरानी  के लिए रिमोट आईसीयू को जोड़ने वाला कमांड सेंटर। वर्कफ़्लो को आसान बनाने के लिए एआईआरए (एमएल-पावर्ड नोट असिस्टेंट) और नेत्रा (कंप्यूटर विज़न टूल) का इस्तेमाल करता है।280 अस्पतालों में 130,000+ रोगियों पर असर पड़ा। दस्‍तावेजीकरण का समय 40% कम हुआ। 27
आँखों की देखभाल3नेत्रापोर्टेबल एआई स्क्रीनिंग: कम लागत वाला, नॉन-मायड्रियाटिक इमेजिंग डिवाइस जो डायबिटिक रेटिनोपैथी, मोतियाबिंद और ग्लूकोमा जैसी बीमारियों की ऑटोमेटेड स्क्रीनिंग के लिए आँख के आगे और पीछे के हिस्से को कैप्चर करता है।इसे 75+ देशों में अपनाया गया, इसने 3 मिलियन + लोगों की स्क्रीनिंग की है, और अनावश्यक विशेषज्ञ रेफरल को 70% तक कम किया है।28
हृदय और श्वसनएआईस्टेथएआई-पावर्ड स्टेथोस्कोप: यह एआई का इस्तेमाल करके दिल और फेफड़ों की वेवफ़ॉर्म को स्मार्टफोन पर दिखाने के लिए  शरीर की आवाज़ों को कैप्चर और डिजिटाइज़ करता है।हृदय और श्वसन समस्याओं की पहचान करने में गैर – विशेषज्ञ स्वास्थ्य कर्मियों की मदद करता हैरिमोट डायग्नोस्टिक्स और टेली-परामर्श  के लिए उपयोगी।29
उन्नत रेडियोलॉजीQure.aiस्मार्ट स्कैन: डीप लर्निंग एल्गोरिदम छाती के एक्स-रे और सीटी स्कैन का विश्‍लेषण करके टीबी, फेफड़ों के कैंसर और हार्ट फेल होने जैसे 35+ निष्‍कर्षों  का सेकंडों में पता लगाता है।1,000+ स्‍थानों पर इस्तेमाल होने और हर साल 15 मिलियन रोगियों को सेवाएं देने वाली Qure.ai ने टीबी का पता लगाने में 30% सुधार किया है, दुनिया भर में लागत में कमी लाई है, 125 मिलियन डॉलर का वित्‍तपोषण हासिल किया है, और स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं को त्‍वरित और ज़्यादा आसान बनाने के लिए डब्‍ल्‍यूएचओ और एस्ट्राजेनेका के साथ साझेदारी की है।
स्‍तन कैंसरथर्मलीटिक्सएआई-थर्मल इमेजिंग: तापमान में बदलाव के आधार पर स्‍तन कैंसर का जल्दी पता लगाने के लिए हाई-रिज़ॉल्यूशन थर्मल सेंसर और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करता है।इसने 29 भारतीय शहरों और विदेशों में 75,000+ महिलाओं की स्क्रीनिंग की है। यह नॉन-कॉन्टैक्ट, रेडिएशन-फ्री और प्राइवेसी-फ्रेंडली है।31
शहरी जल स्वास्थ्यबोसॉन व्हाइटवाटरएआई/आईओटी से निगरानी की जाने वाली 11-चरणों वाली निस्पंदन प्रणाली, जो सीवेज के उपचारित पानी को पीने लायक बनाती  है।65+ करोड़ लीटर पानी रिकवर किया गया; इससे ई. कोलाई, कोलीफॉर्म, कीटनाशक, शाकनाशी, हेवी मेटल्स और वायरस हट गए।32
साफ सफाई  एवं स्वच्छताएआई अपशिष्ट प्रबंधनवीडियो एनालिटिक्स और स्मार्ट बिन्स: एआई मॉडल शहर के मौजूदा सीसीटीवी फ़ीड का इस्तेमाल करके सार्वजनिक स्‍थानों पर ओवरफ़्लो हो रहे कूड़ेदान और कूड़ा-करकट का पता लगाते हैं। वाराणसी और विशाखापत्तनम जैसे शहरों में सफाई की क्षमता में 20-30% सुधार; डेंगू जैसी बीमारियों के वाहक कम हुए 33

भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई आधारित परिवर्तन मौजूदा डिजिटल अवसंरचना की वजह से भी संभव हुआ है यह अवसंरचना आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) द्वारा तैयार की गई है।  799 मिलियन डिजिटल हेल्थ आईडी (अगस्त 2025 तक) जारी की जा चुकी हैं।34 इसके अलावा, 410,000 से अधिक पंजीकृत स्वास्थ्य सुविधाएँ और 670,000 से अधिक स्वास्थ्य पेशेवर डिजिटल रिपॉजिटरीज में पंजीकृत हैं। अब तक 671 मिलियन से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड्स को आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (एबीएचए)के साथ लिंक किया जा चुका है।

एबीडीएम के तहत, स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने में बदलाव लाने के लिए निजी क्षेत्र को नवोन्मेषी तरीकों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। निजी क्षेत्र द्वारा विकसित किए गए एबीडीएम -सक्षम अनुप्रयोगों द्वारा संचालित कुछ एआईसक्षम पहलें निम्नलिखित हैं:

स्वास्थ्य फोकसएआई समाधान / पहलप्रौद्योगिकी  और “उपचार” अनुभवनैदानिक ​​/ परिचालन प्रभाव
रोगी की स्थिति की गंभीरता के आधार पर प्राथमिकता का निर्धारण और रोगी  के रिकॉर्ड का सारांश तैयार करना ईका डॉकक्लिनिक प्रबंधन प्रणाली: रोगियों  के स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी रिकॉर्ड का प्रबंधन करने के लिए सुरक्षित ऐप, जिसमें रोगी की स्थिति की गंभीरता के आधार पर प्राथमिकता का निर्धारण, प्रोटोकॉल सर्चिंग, डॉक्टरों के लिए रोगी  के रिकॉर्ड का सारांश तैयार करना  आदि  शामिल है।एबीडीएम -सक्षम अनुप्रयोग  – ने देखभाल की निरंतरता को मजबूत किया है, 10 लाख से ज़्यादा रोगियों  की स्थिति की गंभीरता के आधार पर प्राथमिकता के निर्धारण में मदद की और 17 लाख से ज़्यादा रिकॉर्ड का सारांश तैयार किया।
नैदानिक ​​दस्तावेज़ीकरणईक्लिनिकलवर्क्स द्वारा Sunoh.Aiवॉइस तकनीक के माध्यम से डॉक्टरों को ई-प्रिस्क्रिप्शन तैयार करने में सक्षम बनाने वाला एआई सक्षम स्राइबिंग टूलएआई का इस्तेमाल करके लाखों ई-प्रिस्क्रिप्शन तैयार करने में डॉक्टरों की मदद करता है
नैदानिक ​​दस्तावेज़ीकरणईका स्क्राइबवॉइस तकनीक के माध्यम से डॉक्टरों को ई-प्रिस्क्रिप्शन तैयार करने में सक्षम बनाने वाला एआई सक्षम स्राइबिंग टूल एआई का इस्तेमाल करके 5 लाख ई-प्रिस्क्रिप्शन तैयार करने में सहायता की 
एआई संचालित एचएमआईएसईक्लिनिकलवर्क्सएआई ऑटोमेशन के माध्यम से इमेज रीडिंग में संचालन दक्षता बढ़ाने, क्‍लीनिकल  और नैदानिक  वर्कफ़्लो में सहायता के लिए एआई और एमएल  युक्‍त एचएमआईएस प्रणाली 219 अस्पतालों में 34 लाख एबीएचए लिंक्‍ड स्‍वास्‍थ्‍य रिकॉर्ड बनाए गए
स्मार्ट रिपोर्टईका केयरएआई/एनएलपी  क्षमता युक्‍त एबीडीएम सक्षम व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकॉर्ड अनुप्रयोग रोगी के स्‍वास्‍थ्‍य  रिकॉर्ड को व्‍य‍वस्थित करने और साराँश तैयार करने तथा जीवन भर के स्‍वास्‍थ्‍य इतिहास का प्रबंधन करता है  1.3 करोड़ से ज़्यादा एबीडीएम लिंक्ड हेल्थ रिकॉर्ड के लिए स्मार्ट रिपोर्ट दी गईं  
एआई सक्षम एचएमआईएसप्लस91रिपोर्ट को व्‍य‍वस्थित करने, डॉक्टर रोगी नोट्स को व्‍य‍वस्थित करने और विशेषज्ञ नैदानिक सहायता के ज़रिए परिचालन दक्षता  बढ़ाने के लिए एआई और एमएल  युक्‍त एचएमआईएस प्रणाली 6613 अस्पतालों में 4.24 करोड़ एबीएचए से लिंक्ड हेल्थ रिकॉर्ड बनाए गए।


चित्र 1 – निमोकेयर रक्षा

चित्र 2 – केयर एनएक्‍स एक भारत में विकसित डिजिटल स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी प्लेटफ़ॉर्म है जो अच्छी मातृ और महिला स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच को बेहतर बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्‍ता (एआई) , मोबाइल डायग्नोस्टिक्स और क्लाउड-आधारित निर्णय समर्थन प्रणालियों का उपयोग करता है।

चित्र 3 – माईडिजिरिकॉर्ड्स (एमडीआर)रोगी-केंद्रित डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और केयर मैनेजमेंट प्लेटफ़ॉर्म है

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