सितम्बर 22, 2026

2025 में सीसीआई ने प्रतिस्पर्धा-विरोधी प्रथाओं/प्रतिरक्षा-विरोधी उपायों के 54 मामले दर्ज किए और विलय (एमएंडए) के 149 आवेदन प्राप्त किए

कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय ने देश में प्रतिस्पर्धा कानून सुधारों और संशोधनों के संबंध में निम्नलिखित कदम उठाए हैं।

वर्ष 2025 के दौरान, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (‘सीसीआई’) ने प्रतिस्पर्धा-विरोधी प्रथाओं/प्रतिरक्षा विरोधी उपायों से संबंधित 54 मामले दर्ज किए और विलय (एमएंडए) के 149 आवेदन प्राप्त किए। आयोग ने 38 प्रतिरक्षा विरोधी मामलों में अंतिम आदेश पारित किए और 146 विलय नोटिसों का निपटारा किया।

हाल ही में हुए प्रतिस्पर्धा कानून सुधारों को लागू करने के लिए, भारत सरकार ने प्रतिस्पर्धा (संशोधन) अधिनियम, 2023 के तहत विभिन्न नियमों और विनियमों को अधिसूचित किया, जिसे 11.04.2023 को पारित किया गया था। जुर्माने के निर्धारण के लिए, प्रतिस्पर्धा (संशोधन) अधिनियम, 2023 में व्यक्ति या उद्यम के वैश्विक कारोबार के आधार पर जुर्माने की गणना का प्रावधान किया गया है।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने सीसीआई (मौद्रिक दंड निर्धारण) दिशानिर्देश, 2024 को अधिसूचित किया है, जिसमें दंड निर्धारण के लिए एक विस्तृत कार्यप्रणाली निर्धारित की गई है।

आयोग के समक्ष कार्यवाही की दक्षता, पारदर्शिता और समयबद्धता में सुधार करने के लिए, प्रतिस्पर्धा (संशोधन) अधिनियम, 2023 ने विलय और अधिग्रहण (कॉम्बिनेशन) की मंजूरी के लिए समय सीमा को 210 दिनों से घटाकर 150 दिन करने के लिए दूरदर्शी सुधार पेश किए और प्रतिस्पर्धा मामलों के तेजी से समाधान के हित में निपटान और प्रतिबद्धता ढांचा भी पेश किया।

इसके अलावा, अधिनियम के अंतर्गत शामिल ग्रीन चैनल मार्ग के माध्यम से नोटिस दाखिल करने पर स्वीकृति मानी जाने के जरिए संयोजनों की त्वरित मंजूरी की सुविधा मिलती है, जिससे प्रतिस्पर्धा मामलों का तेजी से निपटान संभव होता है।

एआई और प्रतिस्पर्धा पर बाजार अध्ययन का उद्देश्य प्रमुख एआई प्रणालियों और बाजारों/पारिस्थितिकी प्रणालियों को समझना था, जिसमें हितधारक, आवश्यक इनपुट/संसाधन, मूल्य श्रृंखलाएं, बाजार संरचनाएं और प्रतिस्पर्धा मापदंड शामिल हैं; उभरते प्रतिस्पर्धा मुद्दों की जांच करना; एआई अनुप्रयोगों, अवसरों, जोखिमों और परिणामों का आकलन करना; भारत और अन्य प्रमुख न्यायक्षेत्रों में नियामक/कानूनी ढांचे को समझना; और आयोग की प्रवर्तन और वकालत प्राथमिकताओं का पता लगाना था।

इस अध्ययन में प्रतिस्पर्धा से जुड़ी प्रमुख चिंताओं की पहचान की गई है, जिनमें उच्च प्रारंभिक लागत और डेटा एवं प्रतिभा तक पहुंच के कारण एआई मूल्य श्रृंखला में एकाग्रता; पारिस्थितिकी तंत्र में फंसे रहना और स्विचिंग लागत, एआई-संचालित मूल्य निर्धारण एल्गोरिदम और स्वचालित व्यावसायिक निर्णयों के माध्यम से एल्गोरिथम मिलीभगत का जोखिम; एआई तकनीक के पूरे स्टैक में स्व-वरीयता और उपभोक्ता डेटा के उपयोग के माध्यम से एआई-सक्षम मूल्य भेदभाव शामिल हैं।

भारत में एक प्रतिस्पर्धी एआई पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने और उपभोक्ता कल्याण की रक्षा के लिए, निष्कर्षों में व्यवसायों द्वारा प्रतिस्पर्धा अनुपालन के लिए एआई प्रणालियों का स्व-ऑडिट; बेहतर पारदर्शिता और सूचना विषमता को कम करना; सीसीआई द्वारा केंद्रित वकालत और क्षमता निर्माण; सरकारी नीतिगत पहलों की निरंतरता; और अंतर-नियामक समन्वय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग शामिल हैं।

यह जानकारी कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री और सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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