अप्रैल 25, 2026

आतंकवाद-रोधी उपायों पर आसियान के रक्षा मंत्रियों और आंतकवाद से निपटने की अंतिम योजना पर विशेषज्ञ कार्य समूह की 16 वीं बैठक नई दिल्ली में

आतंकवाद-रोधी उपायों पर दक्षिण-पूर्व एशियाई देशो के संगठन-आसियान के रक्षा मंत्रियों और आंतकवाद से निपटने की तैयारी संबंधी अंतिम कार्य योजना पर विशेषज्ञ कार्य समूह-एडीएमएम प्लस की 16 वीं बैठक 14 से 16 जनवरी, 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित होगी। भारत और मलेशिया आतंकवाद-रोधी उपायों पर 16वीं विशेषज्ञ कार्य समूह बैठक की सह-अध्यक्षता करेंगे। इसमें आसियान सचिवालय के प्रतिनिधियों सहित 11 आसियान सदस्य देश-ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, वियतनाम, सिंगापुर, थाईलैंड और तिमोर लेस्ते और 7 संवाद साझेदार देश ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया, जापान, चीन, अमेरिका और रूस के प्रतिनिधि भाग लेंगे। यह 2024 से 2027 के मौजूदा चक्र की तीसरी बैठक होगी।

यह सम्मेलन पिछले सत्र के बाद की प्रगति की समीक्षा और भारत के आसियान रक्षा मंत्रियों और विशेषज्ञ कार्य समूह ढांचे के तहत तीन वर्षीय योजना के अंतर्गत चल रही तथा नियोजित गतिविधियों में आतंकवाद रोधी बहुपक्षीय सहयोग मजबूत करने के विमर्श का मंच प्रदान करेगा।

आपात स्थिति या संकट का सामना संबंधी -टेबल टॉप एक्सरसाइज का अंतिम संवादात्मक सत्र 14 जनवरी को आयोजित होगा। मलेशिया 2026 में विशेषज्ञ कार्य समूह की अगली बैठक के दौरान टेबल टॉप एक्सरसाइज की मेजबानी करेगा। इसके बाद भारत 2027 में फील्ड प्रशिक्षण अभ्यास आयोजित करेगा।

एडीएमएम प्लस सहभागी देशों के रक्षा प्रतिष्ठानों के बीच व्यावहारिक सहयोग मंच है। अभी यह सहयोग के सात क्षेत्रों पर केंद्रित है, जिनमें समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद रोधी अभियान, मानवीय सहायता और आपदा राहत, शांतिरक्षा अभियान, सैन्य चिकित्सा, मानवीय बारूदी सुरंग कार्रवाई और साइबर सुरक्षा शामिल हैं। इन सात क्षेत्रों में सहयोग सुगम बनाने के लिए विशेषज्ञ कार्य समूह की स्थापना की गई है।

सह-अध्यक्षों का कार्य अध्यक्षता के आरंभ में तीन वर्षीय चक्र के लिए विशेषज्ञ कार्य समूह के उद्देश्यों, नीतिगत दिशा-निर्देशों और निर्देशों को निर्धारित करना, कार्य समूह की नियमित बैठकें (वर्ष में कम से कम दो) संचालित करना और तीसरे वर्ष सभी सदस्य देशों के लिए कोई भी अभ्यास (टीटीएक्स/एफटीएक्स/स्टाफएक्स/कॉमेक्स आदि) आयोजित करना है ताकि तीन वर्षीय चक्र के दौरान व्यावहारिक सहयोग में हुई प्रगति का आकलन किया जा सके।

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