अप्रैल 25, 2026

रक्षा मंत्री रक्षा संपदा दिवस समारोह में शामिल होंगे; विभाग ने अपने 100वें वर्ष में प्रवेश किया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 16 दिसंबर, 2025 को दिल्ली छावनी स्थित रक्षा संपदा भवन में रक्षा संपदा दिवस समारोह की अध्यक्षता करेंगे। इस अवसर पर वे देश भर में फैले 61 छावनी बोर्डों के रक्षा भूमि प्रबंधन और नगर प्रशासन के क्षेत्र में सार्वजनिक सेवा में उत्कृष्टता के लिए रक्षा मंत्री पुरस्कार प्रदान करेंगे।

इस वर्ष के समारोह का विशेष महत्व है, क्योंकि विभाग अपने 100वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, जो उस विरासत का स्मरणोत्सव है जिसकी शुरुआत 1765 में हुई थी, जब पश्चिम बंगाल के बैरकपुर में पहली छावनी स्थापित की गई थी। इसके बाद डेढ़ शताब्दी में दानापुर (1766), मेरठ (1803), अंबाला (1843), दिल्ली (1915) आदि जैसी छावनियों की स्थापना हुई, जिन्होंने भारत में रक्षा और भूमि प्रशासन की नींव रखी। बाद में 16 दिसंबर, 1926 को रक्षा मंत्रालय के अधीन भूमि और छावनी विभाग के रूप में इस विभाग को औपचारिक रूप दिया गया।

रक्षा संपदा विभाग आज रक्षा मंत्रालय के अधीन भारत सरकार की सबसे बड़ी भू-संपत्ति का प्रबंधन करता है। इतिहास में अपनी गहरी जड़े जमाए हुए विभाग ने आधुनिकीकरण की एक असाधारण यात्रा तय की है, जिसने स्वयं को डिजिटल एवं प्रौद्योगिकी-आधारित भूमि प्रबंधन में अग्रणी बना लिया है। विभाग ने छावनी के 20 लाख निवासियों को शत-प्रतिशत नगरपालिका सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराकर ई-छावनी परियोजना को सफलतापूर्वक लागू किया है। जल संरक्षण और जल निकायों के पुनरुद्धार के लिए विभाग के प्रयासों को सर्वोच्च स्तर पर मान्यता मिली है और इसे ‘जल संचय जन भागीदारी’ के लिए राष्ट्रीय जल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

विभाग ने पुराने भूमि अभिलेखों का पूर्ण डिजिटलीकरण कर दिया है, जिससे भविष्य में उनका संरक्षण सुनिश्चित हो सके। संपूर्ण फ़ाइल प्रबंधन प्रणाली का आधुनिकीकरण किया गया है और देशव्यापी स्तर पर एक सुरक्षित, प्रौद्योगिकी-समर्थित फ़ाइल प्रबंधन प्रणाली को अपनाया गया है, जिससे निर्बाध रूप से अभिलेखों को पुन: प्राप्त करना और सुरक्षित रूप से संग्रहित करना संभव हो गया है। सुरक्षित सर्वरों पर होस्ट किया गया एक केंद्रीकृत सॉफ़्टवेयर प्लेटफ़ॉर्म ‘रक्षा भूमि’ अब सभी रक्षा भूमि अभिलेखों के एकीकृत भंडार के रूप में कार्य करता है।

विभाग ने निरंतर परिचालन संदर्भ स्टेशनों (सीपीपीएस) पर आधारित विभेदक वैश्विक स्थिति प्रणाली (डीआईएस), भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) आधारित उपकरणों और उच्च-रिज़ॉल्यूशन उपग्रह इमेजरी को व्यापक रूप से अपनाकर भूमि सर्वेक्षण में मुख्य दक्षता विकसित की है, जिससे सटीकता में सुधार हुआ है। विभाग ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता/मशीन लर्निंग और उभरती प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाते हुए उपग्रह और मानवरहित दूरस्थ व्हीकल पहल पर एक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया, जो रक्षा भूमि प्रबंधन के लिए अगली पीढ़ी के समाधान तैयार करेगा।

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