मार्च 8, 2026

भारत-ईएफटीए व्यापार समझौता: 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख रोज़गारों का संकल्प

मुख्य बिंदु
भारत और ईएफटीए ने 10 मार्च 2024 को व्यापार और आर्थिक साझीदारी समझौते (टीईपीए) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता 1 अक्टूबर 2025 से लागू हो गया। यह भारत का 4 विकसित यूरोपीय राष्ट्रों के साथ पहला मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) है।टीईपीए में 15 वर्षों में 100 अरब अमेरिकी डॉलर (यूएसडी) के निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगारों के सृजन की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है। भारत का यह पहला ऐसा एफटीए है जिसमें इस तरह का बाध्यकारी संकल्प जाहिर किया गया है।समझौते के दायरे में ईएफटीए की आधिकारिक सीमा शुल्क सूची की 92.2 प्रतिशत उत्पाद प्रविष्टियां (भारतीय निर्यात का 99 प्रतिशत) शामिल हैं। इसमें भारतीय सीमा शुल्क सूची की 82.7 प्रतिशत उत्पाद प्रविष्टियां (ईएफटीए के निर्यात का 95.3 प्रतिशत) आती हैं जिससे डेयरीसोयाकोयला और कृषि जैसे प्रमुख क्षेत्रों का संरक्षण होगा।इस समझौते से बाजार तक पहुंच का विस्तार होगा, मैनुफैक्चरिंग और नवोन्मेष को बल मिलेगा तथा प्रौद्योगिकी और संवहनीयता में सहयोग मजबूत होगाडिजिटल डिलीवरीवाणिज्यिक उपस्थिति और पेशेवर गतिशीलता तथा नर्सिंगअकाउंटेंसी और वास्तुकला जैसे क्षेत्रों में आपसी मान्यता समझौतों (एमआरए) से सेवा निर्यात को लाभ होगा।

भारत-यूरोप आर्थिक संबंधों में निर्णायक क्षण

भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते (टीईपीए) पर 10 मार्च 2024 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए थे।  अक्टूबर 2025 से लागू यह समझौता भारत की विदेश व्यापार नीति में निर्णायक साबित होगा।

ईएफटीए क्या है?

ईएफटीए आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्ज़रलैंड का एक अंतर-सरकारी संगठन है। इसकी स्थापना 1960 में इसके तत्कालीन 7 सदस्य देशों द्वारा आपसी मुक्त व्यापार और आर्थिक एकीकरण  को प्रोत्साहन देने के लिए की गई थी। ईएफटीए यूरोप के तीन आर्थिक समूहों (अन्य 2 – यूरोपीय संघ और यूके) में से एक महत्वपूर्ण समूह है।

यूरोप के चार विकसित देशों स्विट्ज़रलैंडनॉर्वेआइसलैंड और लिकटेंस्टीन के साथ किया गया यह भारत का पहला मुक्त व्यापार समझौता है और आर्थिक दृष्टि से सबसे महत्वाकांक्षी समझौतों में से एक है। यह परिमाण और उद्देश्य के लिहाज से सबसे महत्वाकांक्षी समझौतों में से एक है। यह आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना और ईएफटीए की मजबूत और विविधीकृत साझेदारीयों की तलाश के  रणनीतिक संमिलन का प्रतीक है

इस समझौते में 14 अध्याय शामिल हैं, जो मुख्य क्षेत्रों जैसे कि वस्तुओं की बाजार तक पहुंच, उत्पत्ति के नियम, व्यापार सुविधा, व्यापार में सुधार, स्वच्छता और पादप-स्वच्छता उपाय, व्यापार की तकनीकी बाधाएँ, निवेश प्रोत्साहन, सेवाएँ, बौद्धिक संपदा अधिकार, व्यापार और संवहनीय विकास और अन्य कानूनी और आपसी प्रतिस्पर्धा घटाने के प्रावधानों पर केंद्रित हैं।

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इस समझौते का मुख्य लक्ष्य अगले पंद्रह वर्षों में भारत में 100 बिलियन डॉलर का निवेश लाना तथा दस लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करना है। यह देश के आर्थिक इतिहास में सबसे अग्रगामी व्यापार साझेदारीयों में से एक है।

टीईपीए की मुख्य विशेषताएँ

उद्देश्यपूर्ण निवेश

टीईपीए क्या है?टीईपीए (व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता) एक आधुनिक और महत्वाकांक्षी समझौता है, जिसमें भारत द्वारा हस्ताक्षरित किसी भी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में पहली बार निवेश और रोज़गार सृजन पर बाध्यकारी संकल्प जाहिर किया गया है।

अनुच्छेद 7.1 के अंतर्गत, ईएफटीए के चार सदस्य देशों ने पहले 10 वर्षों में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को 50 अरब डॉलर तक बढ़ाने और उसके अगले वर्षों में अतिरिक्त 50 अरब डॉलर तक बढ़ाने का संकल्प लिया है।

पोर्टफोलियो आप्रवाह के विपरीत, ये दीर्घकालिक, क्षमता-निर्माण निवेश है जिसमें  विनिर्माण,  नवोन्मेष और अनुसंधान को केंद्र में रखा गया है। समय के साथ, इनसे दस लाख प्रत्यक्ष रोज़गार पैदा होने और भारत के कुशल कार्यबल और यूरोप के प्रौद्योगिकी परिवेश के बीच गहरे संबंध स्थापित होने की संभावना है।

फरवरी 2025 से निवेश सुविधा को सुव्यवस्थित करने के लिए, एक समर्पित भारत-ईएफटीए डेस्क शुरू किया गया है, यह संभावित निवेशकों के लिए सिंगल विंडो प्लेटफार्म के रूप में कार्य करता है। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा, जीवन विज्ञान, इंजीनियरिंग, और डिजिटल बदलाव पर विशेष ध्यान दिया गया है, इसके साथ  ही यह संयुक्त उद्यमों और लघु और मध्यम उद्यमों के सहयोग को भी बढ़ावा देता है।

संतुलित बाज़ार पहुँच

टीईपीए महत्वाकांक्षा और विवेक के बीच संतुलन बनाता है। ईएफटीए ने सीमा  शुल्क की 92.2 प्रतिशत उत्पाद प्रविष्टियों पर रियायत की पेशकश की है, जिसके दायरे में भारत का 99.6 प्रतिशत निर्यात शामिल है। इससे सभी गैर-कृषि वस्तुएं और प्रसंस्करित कृषि उत्पाद रियायत के दायरे में आएंगे।

बदले में, भारत ने कड़े सुरक्षा उपायों के साथ 82.7 प्रतिशत उत्पाद प्रविष्टियां पर पहुँच दे दी है, जो ईएफटीए निर्यात का 95.3 प्रतिशत है। ईएफटीए से 80 प्रतिशत से ज़्यादा आयात सोने का आयात होता है जिसमें प्रभावी शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

डेयरी, सोया, कोयला, फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरण और चुनिंदा खाद्य उत्पादों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस सूची से अलग रखा गया है। मेक इन इंडिया और उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना जैसे प्रमुख कार्यक्रमों के तहत आने वाले उत्पादों के लिए, सीमा शुल्क  में 5-10 वर्षों में चरणबद्ध कटौती की जा रही है। इससे घरेलू उद्योगों को स्पर्धा में उतरने से पहले मज़बूत होने का समय मिल जाता है।

सेवाओं और कुशल प्रतिभाओं के लिए एक प्रवेश द्वार

भारत के सकल मूल्य वर्धन(जीवीए) में सेवाओं का योगदान 55% से अधिक है और टीईपीए ज्ञान और डिजिटल सेवाओं में अगली पीढ़ी के व्यापार के लिए एक मंच प्रदान करता है।

भारत ने 105 उप-क्षेत्रों में अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है, जबकि ईएफटीए के प्रस्तावों में स्विट्ज़रलैंड से 128, नॉर्वे से 114, आइसलैंड से 110 और लिकटेंस्टीन से 107 क्षेत्रों की पेशकश है। इसमें आईटी और व्यावसायिक सेवाएँ, शिक्षा, मीडिया, सांस्कृतिक और व्यावसायिक सेवाओं जैसे प्रमुख भारतीय क्षेत्र शामिल हैं।

टीईपीए का एक निर्णायक प्रावधान पेशेवर गतिशीलता को आसान बनाने की दिशा में एक कदम के रूप में, नर्सिंगचार्टर्ड अकाउंटेंसी और वास्तुकला जैसे व्यवसायों में पारस्परिक मान्यता समझौतों (एमआरए) को शामिल करना है, जो कि सहज व्यावसायिक गतिशीलता की दिशा में एक कदम है।

टीईपीए से आईटी और व्यावसायिक सेवाओंसांस्कृतिक और मनोरंजन,  शिक्षा और दृश्य-श्रव्य सेवाओं जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारत से दी जाने वाली सेवाओं के  निर्यात को बढ़ावा मिलने की भी उम्मीद है।

ईएफटीए की सेवा प्रतिबद्धताएँ इन माध्यमों से बेहतर बाज़ार पहुँच प्रदान करती हैं:

मोड 1: सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी

मोड 3: व्यावसायिक उपस्थिति

मोड 4: कुशल पेशेवरों के प्रवेश और अस्थायी प्रवास के लिए निश्चितता

बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर)नवोन्मेष और भरोसा

टीईपीए के आईपीआर प्रावधान ट्रिप्स (बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार-संबंधित पहलू) के प्रति प्रतिबद्ध हैं, जिससे  सार्वजनिक स्वास्थ्य और जेनेरिक दवाओं पर भारत के लचीलेपन को बनाए रखते हुए उच्च स्तर की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

वैश्विक नवाचार के केंद्र स्विट्ज़रलैंड के लिए, आईपीआर अध्याय भारत की नियामक शक्ति में विश्वास को दिखाता है। वहीं, पेटेंट एवरग्रीनिंग के खिलाफ  भारत के सुरक्षा उपाय दवाओं तक किफ़ायती पहुँच सुनिश्चित करते हैं। यह संतुलन नवोन्मेष और समावेशन के बीच विश्वास-आधारित सहयोग का एक आदर्श मॉडल बनाता है।

संवहनीय एवं समावेशी विकास

टीईपीए संवहनीय विकास, समावेशी विकास, सामाजिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण पर ज़ोर देता है। यह व्यापार प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, दक्षता, सरलीकरण, सामंजस्य और निरंतरता को बढ़ावा देगा।

क्षेत्रीय अवसर: जहां से लाभ होगा

भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते से भारतीय उद्योंगों के लिए कई अवसर खुलते हैं। ईएफटीए में 92 प्रतिशत उत्पाद प्रविष्टियां शामिल होने से, मशीनरीजैविक रसायनकपड़ा और प्रसंस्करित खाद्य पदार्थ जैसे क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों की ईएफटीए के बाजारों तक पहुंच बढ़ेगी। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ने, लागत कम करने और वहाँ के बाजारों में भारतीय उत्पादों के प्रवेश में तेजी आने की संभावना है।

कृषि एवं संबद्ध वस्तुएँ

वित्त वर्ष 2024-25 में ईएफटीए देशों में भारत का निर्यात 72.37 मिलियन डॉलर का होगा, जिसमें ग्वार गम, प्रसंस्करित सब्जियाँ, बासमती चावल, दालें, फल और अंगूर प्रमुख हैं।

टीईपीए ने विशेष रूप से स्विट्जरलैंड और नॉर्वे में इन श्रेणियों में सीमाशुल्क को कम किया है या समाप्त कर दिया है, जिसमें  ईएफटीए के साथ भारत के कृषि-व्यापार का 99% से अधिक हिस्सा है।

प्रत्येक देश को होने वाले लाभ
ईएफटीए देशउत्पाद/एचएस कोडसीमाशुल्क में रियायतें/अवसर
स्विट्ज़रलैंडभोजन सामग्री127.5 सीएचएफ/100 किग्रा तक सीमाशुल्क समाप्तभारतीय निर्यात के लिए गुंजाइश
मिष्ठान्नबिस्कुटशुल्क में कटौती से प्रसंस्करित खाद्य पदार्थों के लिए अवसर पैदा हुए
ताजे अंगूर272 सीएचएफ /100 किग्रा तक के शुल्क समाप्त
मेवे और बीजताज़ी सब्जियाँमुक्त व्यापार समझौते के बाद शून्य टैरिफप्रतिस्पर्धा को बढ़ावा
नॉर्वेखाद्य सामग्रीमसालेसीमाशुल्क वाली चुनिंदा उत्पाद शृंखलाओं पर ड्यूटी फ्री पहुँच
चावलशुल्क में कटौती (भोजन के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए) से नए बाज़ार खुलते हैं
प्रसंस्करित सब्जियां और फलचयनित सूचियों पर शुल्क-मुक्त पहुँच
बिस्कुटमाल्ट एक्सट्रैक्टपेय पदार्थशुल्क राहत से भारतीय ब्रांडों की पहुंच में सुधार
आइसलैंड प्रसंस्करित खाद्य पदार्थउच्च एम्एफएन शुल्क (97 ISK/किग्रा तक) को शून्य कर दिया गया
चॉकलेट और मिष्ठानशुल्क समाप्तप्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यात की प्रबल संभावना
ताज़ी/ठंडी सब्जियाँशुल्क समाप्त

कॉफ़ी और चाय

ईएफटीए देश मिलकर 175 मिलियन डॉलर मूल्य की कॉफ़ी का आयात करते हैंजो वैश्विक व्यापार का लगभग 3% है।

सभी कॉफी श्रेणियों पर शुल्क समाप्त होने से भारतीय उत्पादकों की स्विट्जरलैंड और नॉर्वे के प्रीमियम बाजारों तक पहुंच बढ़ेगी, यह छाया में उगाई गई और हाथ से चुनी गई भारतीय कॉफी के लिए एक आदर्श स्थान है।

चाय के लिए, ईएफटीए के छोटे लेकिन उच्च मूल्य वाले बाजार (लगभग 3 मिलियन किलोग्राम प्रतिवर्ष) में पहले ही लाभ दिखने लगा है, भारत का औसत निर्यात 2024-25 में बढ़कर 6.77 डॉलर प्रति किलोग्राम हो गया जबकि पिछले वर्ष यह 5.93 डॉलर प्रति किलोग्राम था।

समुद्री खाद्य उत्पाद

टीईपीए के अंतर्गत, भारतीय समुद्री उत्पादों को ईएफटीए देशों में शुल्क रियायतों का लाभ मिलेगा:

देश-वार बाजार लाभ
 नॉर्वेमछली और झींगा आहार पर 13.16% तक शुल्क में छूट, जिससे भारतीय उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे तथा आहार और कच्चे माल के निर्यात में वृद्धि होगी।
 आइसलैंडजमे हुए, तैयार और संरक्षित झींगा, प्रॉन्स, स्क्विड और कटलफिश पर 10% तक सीमाशुल्क समाप्त किया जाएगा, साथ ही मछली के चारे पर 55% तक की कटौती की जाएगी।
स्विट्ज़रलैंडमछली के वसा और तेल पर शून्य शुल्क (यकृत तेल को छोड़कर)

औद्योगिक और मैनुफैक्चरिंग लाभ

वित्त वर्ष 2024-25 में ईएफटीए देशों को इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात 315 मिलियन डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 18% अधिक है। इस समझौते से इलेक्ट्रिक मशीनरी, तांबे के उत्पादों, ऊर्जा-कुशल प्रणालियों और इंजीनियरिंग के लिए बाजार पहुँच का विस्तार होगा।

कपड़ा और परिधान, जिनका मूल्य 0.13 बिलियन डॉलर है, तथा चमड़ा और जूते-चप्पल पर शुल्क स्थिर रखने और मानकों के सरलीकरण से लाभ मिलेगा, जबकि खेल के सामान और खिलौनों का ड्यूटी समाप्त करने और अनुरूपता मानकों की आपसी सहमति का लाभ होगा।

रत्न एवं आभूषणों को टीईपीए, सभी ईएफटीए देशों में शुल्क-मुक्त रखा गया है, जिससे हीरे, सोने और रंगीन रत्नों के निर्यातकों के लिए दीर्घकालिक पूर्वानुमान सुनिश्चित किया जा सकता है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर

100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता और उच्च आय वाले यूरोपीय बाजारों तक पहुँचने के साथ, टीईपीए भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के लिए एक रणनीतिक आधार बनाएगा-विशेष रूप से उन एमएसएमई और ओईएम के लिए जो वैश्विक स्तर पर विस्तार करना चाहते हैं।

देशवार बाज़ार क्षमता
   स्विट्ज़रलैंडचिकित्सा इलेक्ट्रॉनिक्स (नैदानिक ​​उपकरण, पहनने योग्य उपकरण), स्मार्ट सेंसर और एम्बेडेड सिस्टम, सुरक्षित संचार मॉड्यूल (फ़िनटेक और बैंकिंग के लिए)।रणनीतिक फायदा: स्वामित्व वाली तकनीक की सुरक्षा के लिए टीइपीए के आईपीआर अध्याय का फायदा
  नॉर्वेइलेक्ट्रिक गाड़ियों के पुर्जे  और बैटरी प्रबंधन प्रणालियाँ, समुद्री इलेक्ट्रॉनिक्स (नेविगेशन, सोनार, उपकरणों), स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा निगरानी उपकरणरणनीतिक फायदा: नॉर्वे के जलवायु-तकनीकी लक्ष्यों और सार्वजनिक खरीद चैनलों के साथ तालमेल बिठाना।.
  आइसलैंडकॉम्पैक्ट चिकित्सा उपकरण और डायग्नोस्टिक्स, स्मार्ट होम और ऊर्जा-कुशल इलेक्ट्रॉनिक्स, शैक्षिक तकनीकी हार्डवेयर (टैबलेट, सेंसर)।रणनीतिक फायदा: विशिष्ट वितरकों और सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों का लक्ष्य
  लिकटेंस्टाइन औद्योगिक नियंत्रण प्रणालियाँ, बैंकिंग के लिए सुरक्षित एम्बेडेड इलेक्ट्रॉनिक्स, ओईएम के लिए उच्च-परिशुद्धता वाले पूर्जेरणनीतिक फायदा: यूरोपीय ओईएम के लिए भारत एक विश्वसनीय ईएमएस भागीदार के रूप में स्थापित होगा

रसायनप्लास्टिक और संबद्ध उत्पाद

ईएफटीए ने भारत के 95% रासायनिक निर्यात पर सीमाशुल्क समाप्त कर दिया है या कम कर दिया है जिससे मुक्त व्यापार समझौते से पहले के शुल्कों में 54% तक की कटौती हुई है।

निर्यात 49 मिलियन डॉलर से बढ़कर 65-70 मिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है, विशेष रूप से पालतू पशुओं के भोजन, रबर, सिरेमिक और कांच के बने पदार्थों में।

प्लास्टिक और से लाख से बने उत्पादों के लिए, टीईपीए उच्च-मूल्य वाले यूरोपीय बाजारों में विविधीकरण को सक्षम बनाता है, जिससे अमेरिका जैसे ज्यादा टैरिफ वाले देशों पर निर्भरता कम होती है।

पारस्परिक विश्वास पर आधारित साझेदारी

टीईपीए भारत के लिए एक व्यापार समझौते से कहीं बढ़कर है, यह समान विचारधारा वाली अर्थव्यवस्थाओं के साथ रणनीतिक विश्वास का एक साधन है जो पारदर्शिता, नियम-आधारित व्यापार और नवोन्मेष को महत्व देते हैं।

यह व्यापार उदारीकरण के प्रति एक परिपक्व दृष्टिकोण को भी दर्शाता है, जो देश के हितों की रक्षा करते हुए भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में प्रस्तुत करता है।

निवेश, रोजगार, प्रौद्योगिकी और संवहनीयता के द्वार खोलकर, टीईपीए एक आधुनिक आर्थिक साझेदारी का उदाहरण प्रस्तुत करता है, जो महत्वाकांक्षी, संतुलित और दूरदर्शी है।

निष्कर्ष

भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता (टीईपीए) एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, जो चार विकसित यूरोपीय देशों के साथ भारत का पहला मुक्त व्यापार समझौता है। इससे अगले 15 वर्षों में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष रोज़गार सृजन की उम्मीदें भी जुड़ी हैं। इस समझौते से वस्तुओं और सेवाओं के लिये बाजार तक पहुंच बढ़ेगी, बौद्धिक संपदा अधिकार मजबूत होंगे। यह समझौता मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों  को आगे बढ़ाते हुए संवहनीय और समावेशी विकास को बढ़ावा देता है।

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