अप्रैल 22, 2026

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) महत्वपूर्ण सुधार है जिससे देश को लाभ हुआ है

‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण के लिए, केंद्र सरकार जीएसटी में महत्वपूर्ण सुधारों का प्रस्ताव कर रही है, जो तीन स्तंभों पर केंद्रित हैं: संरचनात्मक सुधार, दरों का युक्तिकरण और रहन – सहन की सुगमता
अगली पीढ़ी के सुधारों के लिए पहचाने गए प्रमुख क्षेत्रों में कर दरों का युक्तिकरण शामिल है ताकि समाज के सभी वर्गों, विशेष रूप से आम आदमी, महिलाओं, विद्यार्थियों, मध्यम वर्ग और किसानों को लाभ हो।
सुधारों का उद्देश्य वर्गीकरण संबंधी विवादों को कम करना, विशिष्ट क्षेत्रों में शुल्क ढांचे को ठीक करना, दरों में अधिक स्थिरता सुनिश्चित करना और व्यापार करने में आसानी को और बढ़ाना है
जीएसटी सुधार प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों को मजबूत करेंगे, आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करेंगे और क्षेत्रीय विस्तार को सक्षम करेंगे

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कहा  कि  2017 में लागू किया गया वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) महत्वपूर्ण सुधार है जिससे देश को लाभ हुआ है।

प्रधानमंत्री ने जीएसटी के तहत अगली पीढ़ी के सुधारों के महत्व पर बल दियाजिससे आम आदमीकिसानोंमध्यम वर्ग और एमएसएमई को राहत मिलेगी।

‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण के लिए, केंद्र सरकार जीएसटी में महत्वपूर्ण सुधारों का प्रस्ताव कर रही है। यह तीन स्तंभों पर केंद्रित होगा, अर्थात्

  • संरचनात्मक सुधार
  • दरों का युक्तिकरण, और
  • रहन – सहन की सुगमता

केंद्र सरकार ने जीएसटी दरों के युक्तिकरण और सुधारों का प्रस्ताव जीएसटी परिषद द्वारा गठित मंत्रिसमूह (जीओएम) को भेज दिया है ताकि इस मुद्दे पर विचार किया जा सके।

अगली पीढ़ी के सुधारों के लिए पहचाने गए प्रमुख क्षेत्रों में समाज के सभी वर्गों, विशेष रूप से आम आदमी, महिलाओं, विद्यार्थियों, मध्यम वर्ग और किसानों को लाभ पहुँचाने के लिए कर दरों को युक्तिसंगत बनाना शामिल है।

इन सुधारों का उद्देश्य वर्गीकरण संबंधी विवादों को कम करना, विशिष्ट क्षेत्रों में शुल्क (इनवर्टेड ड्यूटी ) ढाँचों को ठीक करना, दरों में अधिक स्थिरता सुनिश्चित करना और व्यापार सुगमता को और बढ़ाना है। ये उपाय प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों को मज़बूत करेंगे, आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करेंगे और क्षेत्रीय विस्तार को सक्षम करेंगे।

केंद्र के प्रस्तावित सुधारों के प्रमुख स्तंभ:

स्तंभ 1: संरचनात्मक सुधार:

1.उलटे शुल्क (इनवर्टेड ड्यूटीढाँचे में सुधार: इनपुट और आउटपुट कर दरों को संरेखित करने के लिए उलटे शुल्क ढाँचों में सुधार ताकि इनपुट टैक्स क्रेडिट के संचय में कमी आए। इससे घरेलू मूल्यवर्धन को बढ़ावा मिलेगा।

2. वर्गीकरण संबंधी मुद्दों का समाधान: दर ढाँचों को सुव्यवस्थित करने, विवादों को कम करने, अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाने और सभी क्षेत्रों में अधिक समानता एवं एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए वर्गीकरण संबंधी मुद्दों का समाधान करना।

3. स्थिरता और पूर्वानुमान: उद्योग का विश्वास बढ़ाने और बेहतर व्यावसायिक योजना बनाने में सहायता के लिए दरों और नीतिगत दिशा पर दीर्घकालिक स्पष्टता प्रदान करना।

 स्तंभ 2: दरों का युक्तिकरण:

1.आम आदमी से संबंधित वस्तुओं और महत्त्वाकांक्षी वस्तुओं पर करों में कमी: इससे सामर्थ्य बढ़ेगा, उपभोग को बढ़ावा मिलेगा और आवश्यक एवं महत्त्वाकांक्षी वस्तुएँ व्यापक जनसंख्या के लिए अधिक सुलभ होंगी।

2. स्लैब में कमीमूलतः दो स्लैब – मानक और योग्यता – के साथ सरल कर की ओर बढ़ना। केवल कुछ चुनिंदा वस्तुओं के लिए विशेष दरें।

3. क्षतिपूर्ति उपकर: क्षतिपूर्ति उपकर की समाप्ति ने राजकोषीय गुंजाइश पैदा की है, जिससे दीर्घकालिक स्थिरता के लिए जीएसटी ढांचे के भीतर कर दरों को युक्तिसंगत और संरेखित करने के लिए अधिक लचीलापन प्रदान हुआ है।

स्तंभ 3: रहनसहन में आसानी:

1.पंजीकरण: निर्बाध, तकनीक-संचालित और समयबद्ध, विशेष रूप से छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स के लिए।

2.वापसी: पहले से भरे हुए रिटर्न लागू करें, जिससे मैन्युअल हस्तक्षेप कम हो और विसंगतियाँ दूर हों।

3.वापसी: निर्यातकों और उल्टे शुल्क (इनवर्टेड ड्यूटी) ढांचे वाले लोगों के लिए रिफंड की तेज़ और स्वचालित प्रक्रिया।

उपर्युक्त तीन आधारभूत स्तंभों पर आधारित केंद्र का प्रस्ताव, विचार-विमर्श के लिए मंत्रिसमूह के साथ साझा किया गया है। केंद्र ने सभी संबंधित पक्षों के बीच रचनात्मक, समावेशी और आम सहमति पर आधारित संवाद बनाने के उद्देश्य से यह पहल की है।

सहकारी संघवाद की सच्ची भावना में, केंद्र राज्यों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। वह आने वाले हफ्तों में राज्यों के साथ व्यापक सहमति बनाएगा, ताकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित अगली पीढ़ी के सुधारों को लागू किया जा सके।

जीएसटी परिषद अगली बैठक में मंत्री समूह की सिफारिशों पर विचार-विमर्श करेगी और शीघ्र कार्यान्वयन के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा ताकि चालू वित्त वर्ष में ही अपेक्षित लाभ पर्याप्त रूप से प्राप्त हो सकें।

सरकार जीएसटी को सरल, स्थिर और पारदर्शी कर प्रणाली के रूप में विकसित करने की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करती है। ताकि यह ऐसी प्रणाली बने जो #समावेशीविकास का समर्थन करे, औपचारिक अर्थव्यवस्था को मजबूत करे और देश भर में व्यापार करने में आसानी (ईओडीबी) को बढ़ाए।

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