मार्च 7, 2026

करगिल विजय दिवस: देश 1999 में भारत की विजय सुनिश्चित करने वाले सैनिकों के अदम्य साहस और बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है

रक्षा मंत्री ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की; देश के सम्मान की रक्षा में वीरों द्वारा प्रदर्शित वीरता, धैर्य और दृढ़ संकल्प को नमन किया
करगिल युद्ध के दौरान दिया गया सर्वोच्च बलिदान हमारे सशस्त्र बलों के अटूट संकल्प की शाश्वत याद दिलाता है: श्री राजनाथ सिंह
केंद्रीय युवा कार्य एवं खेल मंत्री और रक्षा राज्य मंत्री ने द्रास में करगिल विजय दिवस पदयात्रा का नेतृत्व किया; 1,000 युवा, सेवारत व सेवानिवृत्त सशस्त्र बल कर्मी तथा शहीद नायकों के परिवार शामिल हुए

राष्ट्र आज करगिल विजय दिवस के अवसर पर भारतीय सशस्त्र बलों के उन बहादुरों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है, जिन्होंने मातृभूमि की सेवा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। यह दिवस वर्ष 1999 में भारत की ऐतिहासिक जीत के उपलक्ष्य में हर साल 26 जुलाई को मनाया जाता है। इस अवसर पर रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 26 जुलाई, 2025 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक (एनडब्ल्यूएम) पर शहीद नायकों को पुष्पांजलि अर्पित की।

रक्षा मंत्री ने आगंतुक पुस्तिका में अपने संदेश में राष्ट्र की ओर से बहादुरों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि करगिल विजय आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव वीरता का एक अनूठा उदाहरण बनी रहेगी। उन्होंने राष्ट्रीय समर स्मारक को वीरों के बलिदान का जीवंत प्रतीक बताया।

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श्री राजनाथ सिंह ने सबसे कठिन इलाकों में राष्ट्र के सम्मान की रक्षा करने में बहादुरों द्वारा दिखाए गए असाधारण साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प को स्मरण किया। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से कहा कि करगिल युद्ध के दौरान उनका सर्वोच्च बलिदान हमारे सशस्त्र बलों के अटूट संकल्प की चिरस्थायी याद दिलाता है। भारत उनकी सेवा का सदैव ऋणी रहेगा।

केंद्रीय युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय के तत्वावधान में मेरा युवा भारत ने द्रास में ‘करगिल विजय दिवस पदयात्रा’ का आयोजन किया, जिसका नेतृत्व केंद्रीय युवा कार्य एवं खेल मंत्री तथा श्रम और रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया व रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने किया। पदयात्रा में 1,000 से अधिक युवाओं, सेवारत और सेवानिवृत्त सशस्त्र बलों के कर्मियों, शहीद नायकों के परिवारों तथा नागरिक समिति के सदस्यों ने भाग लिया। यह पदयात्रा द्रास के हिमाबास पब्लिक हाई स्कूल से शुरू हुई और 1.5 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल, भीमबेट में संपन्न हुई।

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बाद में, दोनों मंत्रीगण 100 युवा स्वयंसेवकों के साथ करगिल युद्ध स्मारक के लिए रवाना हुए। रक्षा राज्य मंत्री ने 1999 में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को पुष्पांजलि देकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

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रक्षा राज्य मंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में विश्वास व्यक्त किया कि बहादुर सैनिकों की वीरता और बलिदान की कहानियां भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेंगी। उन्होंने कहा कि देश के बहादुरों का बलिदान हर भारतीय के दिल में देशभक्ति का दीपक हमेशा जलाए रखेगा।थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने करगिल युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और शहीद नायकों को श्रद्धांजलि दी।

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चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि और रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह ने भी नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक पर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने सशस्त्र बलों के सभी रैंकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि करगिल विजय दिवस हर भारतीय को हमारे उन बहादुर सैनिकों की अद्वितीय बहादुरी, दृढ़ता एवं देशभक्ति की याद दिलाता है, जिन्होंने देश की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए निडर होकर लड़ाई लड़ी और यह पाकिस्तान के विश्वासघात की कड़वी सच्चाई भी हमारे सामने रखता है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने कहा कि हमारे विरोधी हमेषा देश के धैर्य की परीक्षा लेते रहेंगे, लेकिन करगिल की विरासत हमें यह स्मरण कराती है कि एकजुटता, तैयारी और अटूट साहस हमेशा दुश्मन के धोखे तथा आक्रामकता पर विजय प्राप्त करेगा क्योंकि यह एक बार फिर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता से सिद्ध हो चुका है।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने राष्ट्रीय समर स्मारक में रखी आगंतुक पुस्तिका में अपने संदेश में शहीद नायकों के अदम्य साहस और साहस को नमन किया। उन्होंने राष्ट्र के प्रति समर्पण, संकल्प और स्थायी प्रतिबद्धता के लिए सेवारत कार्मिकों, भूतपूर्व सैनिकों तथा वीर नारियों की भी सराहना की।

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नौसेना प्रमुख ने कहा कि देश के वीरों द्वारा छोड़ी गई विरासत ‘स्वयं से पहले सेवा’ की भावना और राष्ट्र की सेवा के प्रति अटूट समर्पण का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि वीरों का बलिदान न केवल हमारे देश के भावी नागरिकों के लिए, बल्कि उन लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा, जो ‘कर्तव्य-सम्मान-साहस’ के साथ रक्षा बलों में सेवा करना चुनते हैं।

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थल सेनाध्यक्ष ने करगिल विजय दिवस को भारतीय सेना के अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प का प्रतीक बताया। उन्होंने राष्ट्र की संप्रभुता एवं स्वाभिमान की रक्षा के लिए भारतीय सेना की प्रतिबद्धता दोहराई।वायु सेना प्रमुख ने राष्ट्रीय समर स्मारक को राष्ट्रीय स्मृति और कृतज्ञता का एक पवित्र प्रतीक बताया, जो शहीद नायकों की विरासत को अमर बनाता है, जिनकी वीरता भारतीय सशस्त्र बलों के सभी रैंकों को प्रेरित करती रहती है। उन्होंने कहा कि भारतीय वायु सेना हमारे राष्ट्र की संप्रभुता की रक्षा करने और बहादुरों द्वारा प्रदर्शित साहस, सम्मान व कर्तव्य की गौरवशाली परंपराओं को सतत बनाये रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

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रक्षा सचिव ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि करगिल विजय दिवस राष्ट्र को सशस्त्र बलों के जवानों की वीरता और बलिदान की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय समर स्मारक के माध्यम से शहीद नायकों का अदम्य साहस हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगा।

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उप-सेना प्रमुख ने कहा कि देश के वीरों की निस्वार्थ सेवा हमेशा राष्ट्र की स्मृतियों में अंकित रहेगी और भावी पीढ़ियों को हमारे सशस्त्र बलों की सर्वोच्च परंपराओं को बनाए रखने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने कहा कि हम उसी वीरता और समर्पण के साथ राष्ट्र की सेवा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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