मार्च 9, 2026

खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2021 के मौके पर आयोजित खेल विज्ञान से जुड़े सत्र जागरूकता पैदा करने में मदद कर  रहे हैं

पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी अदिति मुटाटकर ने जहां मासिक धर्म और प्रदर्शन पर उसके प्रभाव के बारे में एक सत्र आयोजित की,  वहीं ताकत और कंडीशनिंग के बारे में विशेषज्ञों द्वारा आयोजित एक सत्र ने प्रशिक्षकों में रुचि जगाई

खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2021 के आयोजकों ने पोषण पर बहुत जोर दिया है, वहीं उन्होंने एथलीटों और कोचों के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम के मौके पर खेल विज्ञान से जुड़े सत्र भी आयोजित किए हैं।

शनिवार को, पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी अदिति मुटाटकर को मासिक धर्म पर एक सत्र आयोजित करने के लिए पुणे से बेंगलुरु बुलाया गया। राष्ट्रमंडल खेलों की रजत पदक विजेता मुटाटकर ने कहा, “अक्सर, महिला एथलीट अपने मासिक धर्म के बारे में खुलकर बात करने में हिचकिचाती हैं और अभी भी इसको लेकर एक कलंक का भाव जुड़ा हुआ है। हमारा प्रयास एथलीटों और कोचों को मासिक धर्म और प्रदर्शन पर पड़ने वाले उसके प्रभाव के बारे में शिक्षित करने में मदद करना है। उन्हें लंबे समय तक, विशेष रूप से अपने मासिक चक्र के दौरान, अपने शरीर की देखभाल न करने के दीर्घकालिक एवं अल्पकालिक प्रभाव के बारे में समझने में मदद करना भी बेहद जरूरी है। इससे चोटों से बचने में बहुत मदद मिलेगी।” अदिति मुटाटकर अभी सिंपली स्पोर्ट फाउंडेशन नाम के एक गैर सरकारी संगठन से जुड़ी हैं जो देश भर में जमीनी स्तर पर खेलों विकास के लिए काम कर रहा है।

अदिति के अनुसार, सबसे पहले ध्यान दिए जाने वाले अहम मुद्दों में से एक कोचों के बीच जागरूकता पैदा करना है और उन्हें अपने एथलीटों को उनके मासिक चक्र के दौरान आने वाली समस्याओं के बारे में बात करने के लिए प्रेरित करना है ताकि प्रशिक्षण का भार उसी के अनुसार निर्धारित किया जा सके। मासिक धर्म के दौरान आमतौर पर एथलीटों को होने वाली समस्याओं का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा, “यहां तक ​​कि अपने प्रशिक्षण के दिनों में, मैं भी अपने कोचों के साथ इस बारे में कभी नहीं बोल पाई। न ही मैं यह जाहिर करना चाहती थी कि मैं प्रशिक्षण नहीं ले सकती क्योंकि इसका मतलब होता कि मैं कमजोर हूं।”

उनके सत्र में जिन प्रमुख पहलुओं को शामिल किया गया, उनमें मासिक धर्म पर नजर रखने का महत्व शामिल था ताकि एथलीटों के भार और पोषण संबंधित योजना उसी के अनुसार बनाई जा सके। उदाहरण के लिए, भारी वजन से जुड़े प्रशिक्षण को कम किया जाए, विशेष रूप से वैसे व्यायाम जो पीठ या घुटनों पर प्रभाव डालते हैं। अदिति ने कहा, “मासिक धर्म पर नजर रखने से एथलीटों के मूड को भी समझने में मदद मिलेगी। लेकिन सबसे पहली और अहम बात यह है कि इस बारे में दोतरफा संवाद किया जाए।”

इस सत्र में भाग लेने वाले पंजाब विश्वविद्यालय के टेनिस कोच बीरबल वढेरा ने प्रतिष्ठित खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स के मौके इस सत्र के आयोजन की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा, “यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है, फिर भी हम इसके बारे में कभी बात नहीं करते हैं क्योंकि एक कोच के रूप में हम इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं है कि एक एथलीट की इस पर कैसी प्रतिक्रिया होगी। अदिति, जोकि खुद उच्चतम स्तर की एक एथलीट रही हैं, द्वारा मासिक धर्म के दौरान एक एथलीट को किन चीजों से गुजरना पड़ता है के बारे में दी गई जानकारी बेहद सूचनाप्रद थी और निश्चित रूप से हमें इस तरह के सत्रों का आयोजन करना चाहिए क्योंकि मुझे लगता है कि यह निश्चित रूप से एथलीटों के प्रदर्शन को बेहतर करने में मदद करेगा।”

प्रशिक्षक सोलकुमार राजेंद्रन द्वारा आयोजित एक अन्य सत्र, जो शक्ति और कंडीशनिंग के बारे में एक बातचीत थी, में कई प्रतिभागियों ने भाग लिया। उन्होंने एथलीटों के लिए ताकत और कंडीशनिंग के महत्व का उल्लेख किया और यह मांसपेशियों के फाइबर के निर्माण में कैसे योगदान देता है के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैसे पराक्रमी एथलीटों में सहन-शक्ति वाले एथलीटों की तुलना में फास्ट-ट्विच फाइबर का उच्च अनुपात होता है। इस सत्र में अधिक भार से बचने और लचीलेपन के महत्व से जुड़े पहलुओं को भी शामिल किया गया।

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