मार्च 7, 2026

भारत का निवेश और बाहरी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) परिदृश्य: एसबीआई रिपोर्ट

भारत के निवेश इकोसिस्टम और बाहरी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) में बीते कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण उन्नति देखी गई है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की हालिया रिपोर्ट में निवेश की घोषणाओं, निजी क्षेत्र के योगदान और कॉर्पोरेट वित्तपोषण में ईसीबी की भूमिका के रुझान पर प्रकाश डाला गया है।

निवेश घोषणाएं (वित्त वर्ष 25 के 9 महीने में)

निजी क्षेत्र के महत्वपूर्ण योगदान के साथ, भारत में निवेश गतिविधि तेज गति से बढ़ रही है।

  • वित्त वर्ष 2025 के नौ महीने (अप्रैल-दिसंबर 2024) में, ₹32.01 लाख करोड़ की कुल निवेश घोषणाएं रहीं।
  • यह वित्त वर्ष 2024 के नौ महीने में ₹23 लाख करोड़ से 39% की बढ़ोतरी को दर्शाता है, जो एक सकारात्मक निवेश दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है।
  • इन घोषणाओं में निजी क्षेत्र का हिस्सा लगभग 56% (वित्त वर्ष 2024) और लगभग 70% (वित्त वर्ष 25 के 9 महीने) था, जो मजबूत कॉर्पोरेट भरोसे का संकेत देता है।

भारतीय कॉर्पोरेट्स का सकल ब्लॉक

  • मार्च 2024 तक, भारतीय कॉर्पोरेट्स का सकल ब्लॉक 106.50 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जबकि मार्च 2020 में यह ₹73.94 लाख करोड़ था।
  • बीते पांच साल में, कॉर्पोरेट सकल ब्लॉक में सालाना औसतन लाख करोड़ से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।
  • इसके अतिरिक्त, मार्च 2024 में प्रगति पर पूंजीगत कार्य 13.63 लाख करोड़ का था, जो मजबूती से चल रही परियोजनाओं के विकास का संकेत देता है।

पारिवारिक शुद्ध वित्तीय बचत

भारत में पारिवारिक शुद्ध वित्तीय बचत (एचएनएफएस) वित्त वर्ष 2023 में 5.0% से बढ़कर वित्त वर्ष 24 में सकल घरेलू उत्पाद का 5.3% हो गई। इसके अतिरिक्त, भौतिक संपत्तियों के विषय में, बचत वित्त वर्ष 2023 में सकल घरेलू उत्पाद के 12.9% से बढ़कर वित्त वर्ष 24 में यह 13.5% हो गई।

जीडीपी के प्रतिशत के रूप में निवेश

हाल के वर्षों में सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों के योगदान के चलते, निवेश में जीडीपी के हिस्से के तौर पर सुधार हुआ है।

  • वित्त वर्ष 23 में, सरकारी निवेश जीडीपी के 4.1% तक पहुंच गयाजो वित्त वर्ष 12 के बाद सबसे अधिक है।
  • वित्त वर्ष 23 में निजी कॉर्पोरेट निवेश बढ़कर जीडीपी का 11.9% हो गया, जो वित्त वर्ष 16 के बाद का उच्चतम स्तर है।
  • वित्त वर्ष 24 में निजी निवेश की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 12.5% ​​होने का अनुमान है, जो बेहतर व्यावसायिक मनोभाव को दर्शाता है।

बाहरी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) (सितंबर 2024 तक)

ईसीबी भारतीय कॉर्पोरेट्स के लिए वित्त पोषण के एक प्रमुख स्रोत के रूप में उभरे हैं, जो पूंजी विस्तार और आधुनिकीकरण को सक्षम बनाते हैं।

  • सितंबर 2024 तक कुल बकाया ईसीबी $190.4 बिलियन थी।
  • इसमें से, गैर-रुपये और गैर-एफडीआई घटकों का हिस्सा लगभग $154.9 बिलियन था।
  • निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 63% ($97.58 बिलियन), जबकि सार्वजनिक क्षेत्र की हिस्सेदारी 37% ($55.5 बिलियन) थी।
  • हेजिंग का एक महत्वपूर्ण पहलू बना होना जारी है, जिसमें निजी कंपनियां कुल हेज कॉर्पस का लगभग 74% हिस्सा हेजिंग करती हैं।

वित्त वर्ष 25 में ईसीबी (नवंबर 2024 तक)

ईसीबी पाइपलाइन मजबूत बनी हुई है, जो विदेशी फंडिंग की लगातार मांग को दर्शाती है।

  • नवंबर 2024 तक, कुल ईसीबी पंजीकरण $33.8 बिलियन रहा।
  • वित्त वर्ष 24 में लगभग आधे पंजीकरण, पूंजीगत वस्तुओं के आयात, आधुनिकीकरण, स्थानीय पूंजीगत व्यय और नई परियोजनाओं के लिए हैं।
  • जीडीपी के प्रतिशत के रूप में ईसीबी पंजीकरण, वित्त वर्ष 20 में 1.9% के मुकाबले वित्त वर्ष 24 में घटकर 1.2% हो गया, जो बेहतर घरेलू वित्तपोषण विकल्पों को जताता है।

ईसीबी लागत रुझान (अप्रैल– नवंबर 2024)

ईसीबी पर ब्याज दरों में गिरावट का रुख देखा गया है, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए उधार लेने की लागत में कमी आई है।

  • अप्रैल-नवंबर 2024 के दौरान, ईसीबी की कुल लागत सालाना आधार पर 12 बेसिस प्वाइंट्स गिरकर 6.6% हो गई।
  • नवंबर 2024 में, ईसीबी की कुल लागत घटकर 5.8% हो गई, जो पिछले महीने के मुकाबले 71 बेसिस प्वाइंट्स कम है।

ईसीबी डेटा पर स्पष्टीकरण

हाल की रिपोर्टों ने भारत की ईसीबी देनदारियों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।

  • कुछ मीडिया स्रोतों ने गलत रिपोर्ट किया कि भारत का ईसीबी स्टॉक 2025 की शुरुआत में $273 बिलियन तक पहुंच गया।
  • हालांकि, आरबीआई डेटा (सितंबर 2024) के मुताबिक, वास्तविक ईसीबी बकाया $190.4 बिलियन है।
  • यह विसंगति विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) में $72.057 बिलियन को जोड़ने से आई है – दीर्घकालिक कॉर्पोरेट और सरकारी प्रतिभूतियों में ऋण निवेश, जिसे कॉर्पोरेट ईसीबी देनदारियों के तौर पर वर्गीकृत नहीं किया जाना चाहिए।
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संदर्भ

कृपया पीडीएफ फाइल देखें

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